an indian child playing korean love games
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Overview: बच्चों के मोबाइल में कोरियन लव गेम्स खेलने के नुकसान

अगर बच्चे हर वक्त कोरियन लव गेम्स खेलते हैं तो इससे उन पर काफी गलत असर पड़ता है।

Korean Love Games Effects: आज के समय में बच्चों का स्क्रीन के साथ टाइम बिताना बेहद ही आम बात है। अमूमन बच्चे घंटों अपने कमरे में चुपचाप बैठे रहते हैं और मोबाइल में बस गेम खेलते रहते हैं। ऐसे में पैरेंट्स को लगता है कि सबकुछ ठीक है, जबकि वास्तव में ऐसा नहीं है। आजकल कोरियन लव गेम्स बच्चों के बीच काफी पॉपुलर हो रहे हैं, जो पहली नज़र में मासूम लगते हैं लेकिन इनका असर गहरा हो सकता है। ये कोरियन लव गेम्स बच्चे के मासूम मन और उसकी भावनाओं पर अपनी गहरी पैठ बनाते हैं। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में-

how korean love games work and impact on child mental health
Korean Game Impact

इन गेम्स में बच्चे अपनी पसंद से एक एआई कैरेक्टर को बनाते हैं। बच्चे इन काल्पनिक किरदारों से बात करते हैं, इमोजी भेजते हैं और साथ ही साथ, डेली लव चैलेंजेस को पूरा करते हैं। धीरे-धीरे बच्चे भावनात्मक रूप से इन एआई किरदारों से जुड़ जाते हैं और उन्हें असली लोगों से ज्यादा इन किरदारों से लगाव हो जाता है।

Indian child ignoring friends while being absorbed in a smartphone
When does the problem arise

बच्चों के गेम खेलना या कोरियन कल्चर के बारे में जानने में समस्या नहीं है। असली समस्या तब पैदा होती है, जब एक बच्चा अपनी असली जिंदगी, असली दोस्तों और अपनी खुद की पहचान से ज्यादा उस स्क्रीन पर दिखने वाले काल्पनिक किरदार को अहमियत देने लगता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि वह काल्पनिक एआई किरदार कभी उनसे बहस नहीं करता या लड़ता नहीं है, बल्कि उनकी बात मानता है और मीठी बातें करता है। जिससे धीरे-धीरे बच्चे को लगने लगता है कि असली दुनिया के लोग जैसे माता-पिता, रिश्तेदार और दोस्त बोरिंग हैं और वह मोबाइल वाला किरदार ही उसका असली हमसफर है।

वहीं, दूसरी ओर माता-पिता बच्चों के हाथ में फोन थमाकर निश्चिंत हो जाते हैं। हम सोचते हैं कि चलो, बच्चा परेशान नहीं कर रहा, शांति से बैठा है। जबकि उन्हें यह समझने की जरूरत है कि वह शांति नहीं, अलगाव है। उसके उस काल्पनिक दुनिया के कैरेक्टर की लत लग रही है, जिसमें असली रिश्तों के लिए कोई जगह नहीं बचती। 

अक्सर पैरेंट्स जब सच समझने लगते हैं तो फिर वे बच्चों के हाथ से फोन छीन लेते हैं। जबकि यह हल नहीं है। बेहतर होगा कि आप सीधे उनके हाथ से मोबाइल छीनने से पहले उन्हें अपना समय और साथ दें।

कोरियन कल्चर के बारे में जानना समस्या नहीं है। लेकिन साथ ही साथ, बच्चों को यह भी सिखाएं कि वे कौन हैं, उनकी संस्कृति और उनके असली रिश्ते कितने अनमोल हैं।

बच्चों के स्क्रीन टाइम के लिए सीमाएं तय करें। उन्हें यह समझाएं कि डिजिटल दुनिया सिर्फ और सिर्फ मनोरंजन के लिए है। 

हमेशा याद रखें कि मोबाइल इस्तेमाल करने या कोरियाई संस्कृति में किसी तरह की बुराई नहीं है। बस माता-पिता के रूप में आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि वर्चुअल लाइफ बच्चे की रियल लाइफ को ना निगलने लगे। 

मैं मिताली जैन, स्वतंत्र लेखिका हूं और मुझे 16 वर्षों से लेखन में सक्रिय हूं। मुझे डिजिटल मीडिया में 9 साल से अधिक का एक्सपीरियंस है। मैं हेल्थ,फिटनेस, ब्यूटी स्किन केयर, किचन, लाइफस्टाइल आदि विषयों पर लिखती हूं। मेरे लेख कई प्रतिष्ठित...