Vitamin D deficiency and anemia
Vitamin D deficiency and anemia

Overview:विटामिन D की कमी कैसे बढ़ा देती है एनीमिया का खतरा

गर्भावस्था में विटामिन D की कमी आयरन के अवशोषण और खून बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर एनीमिया का जोखिम बढ़ा सकती है, इसलिए सही जांच और सप्लीमेंट बेहद ज़रूरी हैं।

Vitamin D Deficiency during Pregnancy: गर्भावस्था के दौरान विटामिन D की कमी और एनीमिया का गहरा संबंध होता है। विटामिन D शरीर में लाल रक्त कोशिकाएँ (रेड ब्लड सेल्स) बनाने और आयरन के सही इस्तेमाल में मदद करता है। शोध बताते हैं कि जिन गर्भवती महिलाओं में विटामिन D की कमी होती है, उनमें एनीमिया होने का खतरा ज़्यादा रहता है। इससे हीमोग्लोबिन, रेड ब्लड सेल्स और आयरन का स्तर कम हो सकता है। इसका एक बड़ा कारण विटामिन D का हेप्सिडिन नाम के हार्मोन पर असर है, जो आयरन के अवशोषण को कंट्रोल करता है।

विटामिन D की कमी के असर

  • आयरन का संतुलन: विटामिन D हेप्सिडिन हार्मोन को नियंत्रित करता है, जो शरीर में आयरन के स्तर को मैनेज करता है
  • आयरन का अवशोषण: जब विटामिन D कम होता है, तो हेप्सिडिन बढ़ जाता है। इससे फेरोपोर्टिन नाम का प्रोटीन घट जाता है और खाने से आयरन ठीक से शरीर में नहीं जा पाता।
  • रेड ब्लड सेल बनना: हड्डियों के मज्जा (बोन मैरो) में विटामिन D के रिसेप्टर्स होते हैं और यह रेड ब्लड सेल बनने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाता है।

क्लिनिकल निष्कर्ष

  • एनीमिया का ज़्यादा खतरा: जिन गर्भवती महिलाओं में विटामिन D की कमी होती है, उनमें एनीमिया होने की संभावना काफी ज़्यादा रहती है।
  • खून की सेहत पर असर: विटामिन D की कमी से हीमोग्लोबिन, रेड ब्लड सेल्स और हीमैटोक्रिट का स्तर कम हो सकता है, जबकि RDW बढ़ सकता है।
Vitamin D deficiency and anemia
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शोध यह भी दिखाते हैं कि जिन महिलाओं में विटामिन D का स्तर बेहतर होता है, उनमें रेड ब्लड सेल से जुड़े पैरामीटर्स जैसे MCV, MCH और MCHC बेहतर होते हैं, जबकि RDW कम रहता है।

सप्लीमेंटेशन

डॉ. पायल चौधरी, सीनियर कंसल्टेंट – ऑब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट, रोज़वॉक बाय रेनबो हॉस्पिटल®, दिल्ली के मुताबिक गर्भावस्था के दौरान अगर ज़रूरत हो तो विटामिन D सप्लीमेंट लेने से एनीमिया को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है, खासकर जब इसे आयरन सप्लीमेंट के साथ लिया जाए।

सर्दियों में धूप कम मिलने की वजह से गर्भवती महिलाओं में विटामिन D की कमी ज़्यादा देखने को मिलती है, जिससे एनीमिया का खतरा बढ़ सकता है। रिसर्च बताती है कि प्रेग्नेंसी के दौरान कम विटामिन D लेवल का सीधा संबंध एनीमिया के बढ़े हुए मामलों से है। ऐसा इसलिए क्योंकि विटामिन D खून बनने की प्रक्रिया और शरीर की पोषण व्यवस्था को प्रभावित करता है। ठंड के महीनों में विटामिन D का स्तर सही रखना, माँ की सेहत और खून के अच्छे स्तर बनाए रखने के लिए बहुत ज़रूरी है।

क्या करें – ज़रूरी उपाय

सबसे अहम है डॉक्टर की सलाह के अनुसार विटामिन D सप्लीमेंट लेना। विटामिन D की कमी पूरी होने से हीमोग्लोबिन का स्तर बेहतर रहता है और गर्भावस्था में एनीमिया होने की संभावना कम हो जाती है। इसके साथ-साथ सुरक्षित धूप लेना भी ज़रूरी है। हफ्ते में कम से कम तीन दिन, दोपहर की धूप में 15–30 मिनट तक बैठने से शरीर में नैचुरली विटामिन D बनता है, भले ही सर्दियों में धूप कम क्यों न हो।

पोषक तत्वों से भरपूर डाइट भी एनीमिया से बचाव में मदद करती है। गर्भवती महिलाओं को हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, दालें, चना-राजमा, लीन मीट और फोर्टिफाइड अनाज शामिल करने चाहिए। इनके साथ विटामिन C से भरपूर चीज़ें जैसे संतरा, नींबू, टमाटर और आँवला लेने से आयरन और दूसरे पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है।

जांच क्यों ज़रूरी है

नियमित जांच भी बहुत अहम है। हीमोग्लोबिन, फेरिटिन और विटामिन D की समय-समय पर ब्लड टेस्ट कराने से कमी का जल्दी पता चल जाता है, खासकर उन महिलाओं में जिन्हें धूप कम मिलती है या जिनकी पोषण ज़रूरतें ज़्यादा होती हैं।

किसी भी तरह का सप्लीमेंट शुरू करने से पहले अपने ऑब्स्टेट्रिशियन से बात करना ज़रूरी है, ताकि इलाज हर महिला की ज़रूरत के हिसाब से सुरक्षित और सही हो सके और माँ-बच्चा दोनों स्वस्थ रह सकें।

Input By- डॉ. पायल चौधरी, सीनियर कंसल्टेंट – ऑब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट, रोज़वॉक बाय रेनबो हॉस्पिटल®, दिल्ली

मेरा नाम मोनिका अग्रवाल है। मैं कंप्यूटर विषय से स्नातक हूं।अपने जीवन के अनुभवों को कलमबद्ध करने का जुनून सा है जो मेरे हौंसलों को उड़ान देता है।मैंने कुछ वर्ष पूर्व टी वी और मैग्जीन के लिए कुछ विज्ञापनों में काम किया है । मेरा एक...