Vitamin D deficiency and anaemia in pregnancy
Vitamin D deficiency and anaemia in pregnancy

Overview:सर्दियों में गर्भावस्था: विटामिन D की कमी और एनीमिया का बढ़ता खतरा

सर्दियों में कम धूप के कारण गर्भवती महिलाओं में विटामिन D की कमी आम है, जो एनीमिया के खतरे को बढ़ा सकती है। सही समय पर जांच, संतुलित आहार, सुरक्षित धूप और डॉक्टर की सलाह से लिया गया सप्लीमेंट इस जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है। जागरूकता और समय पर देखभाल से माँ और बच्चे दोनों की सेहत को सुरक्षित रखा जा सकता है।

Pregnancy Anemia Prevention: सर्दियों के मौसम में धूप कम मिलने की वजह से शरीर में विटामिन D की कमी आम हो जाती है, खासकर गर्भवती महिलाओं में। यह कमी सिर्फ हड्डियों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि खून बनने की प्रक्रिया को भी प्रभावित करती है। रिसर्च बताती है कि प्रेग्नेंसी के दौरान विटामिन D की कमी का सीधा संबंध एनीमिया से है, जिससे माँ और बच्चे दोनों की सेहत पर असर पड़ सकता है। ऐसे में सर्दियों में एनीमिया के खतरे को समझना और समय रहते बचाव करना बेहद ज़रूरी हो जाता है।

विटामिन D और एनीमिया का गहरा कनेक्शन

विटामिन D शरीर में आयरन के सही इस्तेमाल और रेड ब्लड सेल्स बनने में अहम भूमिका निभाता है। जब शरीर में विटामिन D कम होता है, तो हेप्सिडिन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे आयरन का अवशोषण ठीक से नहीं हो पाता। इसका सीधा असर हीमोग्लोबिन और रेड ब्लड सेल्स पर पड़ता है और एनीमिया का खतरा बढ़ जाता है। गर्भावस्था में यह स्थिति और भी संवेदनशील हो जाती है क्योंकि इस दौरान शरीर की पोषण ज़रूरतें दोगुनी हो जाती हैं।

सर्दियों में एनीमिया से बचने के लिए सबसे पहले विटामिन D और आयरन की कमी को पहचानना ज़रूरी है। डॉक्टर की सलाह से विटामिन D और आयरन सप्लीमेंट लेना मददगार हो सकता है। इसके साथ ही हफ्ते में कम से कम तीन दिन 15–30 मिनट तक धूप लेना, हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, दालें, चना-राजमा और विटामिन C से भरपूर फलों को डाइट में शामिल करना बेहद फायदेमंद है। नियमित ब्लड टेस्ट से हीमोग्लोबिन, फेरिटिन और विटामिन D के स्तर पर नज़र रखी जा सकती है।

सर्दियों में बचाव के ज़रूरी उपाय

Nourish your body, nurture your baby
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सर्दियों में एनीमिया से बचने के लिए सबसे पहले विटामिन D और आयरन की कमी को पहचानना ज़रूरी है। डॉक्टर की सलाह से विटामिन D और आयरन सप्लीमेंट लेना मददगार हो सकता है। इसके साथ ही हफ्ते में कम से कम तीन दिन 15–30 मिनट तक धूप लेना, हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, दालें, चना-राजमा और विटामिन C से भरपूर फलों को डाइट में शामिल करना बेहद फायदेमंद है। नियमित ब्लड टेस्ट से हीमोग्लोबिन, फेरिटिन और विटामिन D के स्तर पर नज़र रखी जा सकती है।

Input by

डॉ. कीर्ति खेतान, डायरेक्टर, ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी विभाग, सीके बिड़ला हॉस्पिटल®, दिल्ली

डॉ. पायल चौधरी, सीनियर कंसल्टेंट – ऑब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट, रोज़वॉक बाय रेनबो हॉस्पिटल®, दिल्ली

मेरा नाम सुनेना है और मैं बीते पाँच वर्षों से हिंदी कंटेंट लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हूं। विशेष रूप से महिला स्वास्थ्य, मानसिक सेहत, पारिवारिक रिश्ते, बच्चों की परवरिश और सामाजिक चेतना से जुड़े विषयों पर काम किया है। वर्तमान में मैं...