Are Environmental Toxins and Microplastics Causing Early Menopause?
Are Environmental Toxins and Microplastics Causing Early Menopause?

Overview:हार्मोन पर हमला: कैसे पर्यावरणीय ज़हर समय से पहले मेनोपॉज़ ला रहे हैं

पर्यावरणीय ज़हर और माइक्रोप्लास्टिक्स अब महिलाओं के हार्मोनल हेल्थ के लिए एक बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। खासतौर पर उन महिलाओं में जिनका ओवरी रिज़र्व पहले से कम है या जिनमें बिना किसी स्पष्ट वजह के जल्दी मेनोपॉज़ हो रहा है, वहां पर्यावरणीय एक्सपोज़र की जांच बेहद ज़रूरी हो गई है। प्लास्टिक का कम इस्तेमाल, ताज़ा भोजन, सुरक्षित बर्तन और घर की हवा की गुणवत्ता सुधारकर इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

Microplastics Causing Early Menopause-आज के दौर में महिलाओं में समय से पहले मेनोपॉज़ (Early Menopause) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जहां पहले इसकी वजह जेनेटिक या मेडिकल मानी जाती थी, वहीं अब वैज्ञानिक रिसर्च एक नई और चिंताजनक दिशा की ओर इशारा कर रही है—पर्यावरणीय प्रदूषण और माइक्रोप्लास्टिक्स। हवा, पानी, खाने और रोज़मर्रा के इस्तेमाल की चीज़ों में मौजूद ये ज़हरीले तत्व धीरे-धीरे शरीर में जमा होकर हार्मोन सिस्टम को नुकसान पहुंचा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यही वजह ओवरी की उम्र को तेजी से घटा रही है और महिलाओं का रिप्रोडक्टिव समय पहले खत्म हो रहा है।

एंडोक्राइन-डिसरप्टिंग केमिकल्स कैसे ओवरी को नुकसान पहुंचाते हैं

फ्थैलेट्स, BPA, डाइऑक्सिन, PCB और कीटनाशक जैसे केमिकल्स एंडोक्राइन-डिसरप्टिंग केमिकल्स (EDCs) कहलाते हैं। ये शरीर के हार्मोन सिस्टम में दखल देते हैं—कभी प्राकृतिक हार्मोन की नकल करके और कभी उन्हें ब्लॉक करके। इससे दिमाग और ओवरी के बीच काम करने वाला हार्मोन नेटवर्क (HPO axis) बिगड़ जाता है।

डॉ. अलका चौधरी के अनुसार, इन केमिकल्स की वजह से ओवरी में मौजूद फॉलिकल्स को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस झेलना पड़ता है, जिससे वे समय से पहले नष्ट होने लगते हैं। कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि जिन महिलाओं के शरीर में इंडस्ट्रियल केमिकल्स का स्तर अधिक होता है, उनमें मेनोपॉज़ सामान्य उम्र से 2 से 4 साल पहले आ सकता है।

Microplastics Causing Early Menopause

माइक्रोप्लास्टिक्स—छोटे कण, बड़ा खतरा

माइक्रोप्लास्टिक्स आज सिर्फ समुद्र या मिट्टी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इंसानी खून, प्लेसेंटा और फेफड़ों के टिश्यू में भी पाए जा चुके हैं। ये सूक्ष्म प्लास्टिक कण अपने साथ BPA, फ्थैलेट्स और PFAs जैसे केमिकल्स को शरीर के अंदर ले जाते हैं और धीरे-धीरे उन्हें रिलीज़ करते रहते हैं।

डॉ. त्रिप्ती राहेजा के मुताबिक, माइक्रोप्लास्टिक्स शरीर में छोटे केमिकल डिलीवरी सिस्टम की तरह काम करते हैं। इससे लोकल सूजन, टिश्यू डैमेज और ओवरी फॉलिकल्स का तेज़ी से खत्म होना शुरू हो जाता है। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से पीरियड्स अनियमित होना, फर्टिलिटी कम होना और जल्दी मेनोपॉज़ का खतरा बढ़ जाता है।

Input By

डॉ. त्रिप्ती राहेजा, डायरेक्टर – ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, सीके बिड़ला हॉस्पिटल®, दिल्ली, के इनपुट्स

डॉ. अलका चौधरी, सीनियर कंसल्टेंट – ऑब्स्टेट्रिशियन व गायनेकोलॉजिस्ट, रेनबो हॉस्पिटल के इनपुट्स

मेरा नाम सुनेना है और मैं बीते पाँच वर्षों से हिंदी कंटेंट लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हूं। विशेष रूप से महिला स्वास्थ्य, मानसिक सेहत, पारिवारिक रिश्ते, बच्चों की परवरिश और सामाजिक चेतना से जुड़े विषयों पर काम किया है। वर्तमान में मैं...