Hindi Best Story: किस्मत को कुछ और ही मंजूर था पूरे कश्मीर में दंगे भड़कने लगे और धीरे-धीरे पूरा शहर जलने लगा।
अिंजू ने उसे आते हुए खिड़की से छुपकर देखा था तो वो थोड़ा मुस्कुराते हुए कहती है कि आपको मेरी हाइट कम नहीं लग रही। इस पर मानव भी मुस्कुराता है और कहता है कि मैंने कहां माप के देखी है। फिर वो दोनों सामने लगे बड़े शीशे के पास खड़े हो जाते हैं, अंजू उसके कंधों तक पहुंचती है तो कहती है कि ज्यादा कम नहीं है, हील पहनकर ठीक हो जाएगी। इस पर मानव हंसते हुए कहता है कि मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं कि रोज नई हील खरीद सकूं। हां, ये कर सकता हूं कि मैं नंगे पांव चल पडूंगा आपके साथ। इस पर अंजू हंसते हुए कहती है कि फिक्र मत करो मैं अपने पापा से बोल दूंगी वो दस बीस जोड़ी दहेज में दे देंगे और दोनों हंसने लगते हैं।
कहानी उस दौर की है जब कश्मीर की सर्द वादियां साम्प्रदायिकता की आग में झुलसने लगी थीं। राज्य से हिंदुओं पर अत्याचार की छुटपुट घटनाएं हर रोज सामने आ रही थीं। कश्मीर की एक
छोटी-सी ब्राह्मïण बस्ती में रमेश डोगरा नाम के पंडित का परिवार रहता था उनकी दो बेटियां थीं- बड़ी बेटी अंजू डोगरा और छोटी शीतल डोगरा। दोनों की उम्र में एक साल का अंतर था अंजू अठारह की हुई थी तो शीतल सत्रह की। उस बक्त शीतल प्लस
टू में पढ़ रही थी। तो अंजू फर्स्ट ईयर में। अंजू का कॉलेज और शीतल का स्कूल अलग-अलग दिशा में थे तो दोनों बहनें अलग-अलग रास्ते से पढ़ने जाती थीं। शीतल के स्कूल के रास्ते मे आर्मी की
एक चौकी पड़ती थी जिसमें मनमीत शर्मा नाम का नया-नया भर्ती हुआ लड़का ड्यूटी करता था, अभी उन्नीस का ही हुआ होगा। वह कांगड़ा जिले के नगरोटा गांव का रहने वाला एक लंबा स्मार्ट और बहुत ही मिलनसार स्वभाव का लड़का था।
शीतल रोज उसी रास्ते से जाती तो दोनों की नजरें एक-दूसरे को देखकर शर्म से झुक जातीं। धीरे-धीरे बात आगे बढ़ी और कब वो दोनों प्यार में पड़ गए कुछ पता ही नहीं चला अब हर रोज आते-जाते
एक-दूसरे का हाल पूछना बातें करना आम हो गया था।
प्लस टू में पढ़ रही थी। तो अंजू फर्स्ट ईयर में। अंजू का कॉलेज और शीतल का स्कूल अलग-अलग दिशा में थे तो दोनों बहनें अलग-अलग रास्ते से पढ़ने जाती थीं। शीतल के स्कूल के रास्ते मे आर्मी की एक चौकी पड़ती थी जिसमें मनमीत शर्मा नाम का नया-नया भर्ती हुआ लड़का ड्यूटी करता था, अभी उन्नीस का ही हुआ होगा। वह कांगड़ा जिले के नगरोटा गांव का रहने वाला एक लंबा स्मार्ट और बहुत ही मिलनसार स्वभाव का लड़का था। शीतल रोज उसी रास्ते से जाती तो दोनों की नजरें एक-दूसरे को देखकर शर्म से झुक जातीं। धीरे-धीरे बात आगे बढ़ी और कब वो दोनों ह्रश्वयार में पड़ गए कुछ पता ही नहीं चला अब हर रोज आते-जाते एक-दूसरे का हाल पूछना बातें करना आम
हो गया था।
हो गए। अब शीतल और मनमीत को मिले हुए चार दिन बीत गए बाहर कर्फ्यू लग गया था। एक रात पुलिस ने आकर पूरे गांव वालों को घर से निकलकर सुरक्षित जगहों पर जाने को कह दिया। शीतल को बिना मनमीत को कुछ बताए रात के अंधेरे में अपने माता-पिता और बहन के साथ कश्मीर छोड़ना पड़ा। वे हिमाचल के कांगड़ा में अपने एक रिश्तेदार के पास आ गए। मनमीत ने शीतल को
ढूंढने की बहुत कोशिश की लेकिन उसका कुछ पता न चल सका। उस वक्त न फोन थे और न ही कोई दूसरे साधन, जिससे एक-दूसरे को संपर्क किया जा सकता। अब दोनों ही एक-दूसरे के लिए तड़पने लगे, ये किस्सा अब अधूरा रह गया था।

लगभग सात साल बाद शीतल अब पच्चीस साल की हो गई और अंजू छब्बीस साल की। उनके लिए रिश्ते ढूंढने शुरू किए क्योंकि परिवार बाहर से आकर बसा था तो कोई जान पहचान न होने के कारण अंजू की शादी के लिए अखबार में इश्तिहार निकाला। इश्तिहार पढ़कर कांगड़ा का ही
एक युवक जिसका नाम मानव था उसने उनसे संपर्क किया। मानव की वहीं पर एक फोटो स्टूडियो था। मानव बहुत अच्छे स्वभाव का होनहार संस्कारी युवक था। वह एक दिन उनके घर जाता है और अंजू के माता-पिता के पैर छूकर आशीर्वाद लेता है और अपने बारे में सबकुछ बता देता है। हालांकि मानव सजातीय नहीं था उसने बताया कि वो एक गरीब परिवार से है। एक बहन है, जिसकी शादी हो चुकी है
और घर में केवल माता-पिता हैं। लड़की के पिता उसे कहते हैं कि बेटा हमें इस रिश्ते से कोई दिक्कत नहीं पर हम खुलकर एक बात करना चाहते हैं। आपकी जो भी मांग है वो हमें पहले ही बता दो। जो भी हमारे पास है वो हमारी बेटियों का ही है। हमारा कोई बेटा तो है नहीं। इस पर मानव बड़ी शालीनता से
कहता है कि अंकल हम गरीब हैं लेकिन भिखारी नहीं! भगवान ने दो हाथ-पैर सही सलामत दिए हैं। दो वक्त की रोटी का इंतजाम बहुत अच्छे से हो जाता है। आप इस तरह की बात करके मुझे शॄमदा न करें। मेरी भी बहन है हमने जब उसकी शादी में कोई दहेज नहीं दिया तो मैं ये पाप कैसे कर सकता हूं। ऐसी ही कुछ बातें होती हैं और लड़का उन्हें पसंद आ जाता है।
मां-बाप उठकर चले जाते हैं और कहते हैं कि लड़की को चाय लेकर भेज देते हैं। आप लोगो को अगर कोई सवाल पूछने हैं तो बात कर लें। थोड़ी देर में अंजू चाय और बर्फी लेकर आती है और मानव के
आगे रखकर सामने बैठ जाती है। मानव एक नजर देखता है अंजू को और अंजू मानव को! लेकिन दोनों काफी देर तक खामोश बैठे रहते हैं। न वो कुछ बोलती है न वो कुछ कहता है। फिर अंजू शुरुआत करती है, वह कहती है- ‘आप चाय के साथ कुछ खा क्यों नहीं रहे हैं, बर्फी पसंद
नहीं है क्या आपको।’ मानव मुस्कुराते हुए कहता है- ‘नहीं ऐसी बात नहीं है वो बस आप लो न पहले।’ फिर दोनों की बात शुरू होती है। मानव की लंबाई छ: फुट के आसपास थी तो अंजू 5 फुट 4 इंच। अंजू
ने उसे आते हुए खिड़की से छुपकर देखा था तो वो थोड़ा मुस्कुराते हुए कहती है कि आपको मेरी हाइट कम नहीं लग रही। इस पर मानव भी मुस्कुराता है और कहता है कि मैंने कहां माप के देखी है। फिर वो दोनों सामने लगे बड़े शीशे के पास खड़े हो जाते हैं। अंजू उसके कंधों तक पहुंचती है तो कहती है कि ज्यादा कम नहीं है हील पहनकर ठीक हो जाएगी। इस पर मानव हंसते हुए कहता है कि मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं कि रोज नई हील खरीद सकूं। हां, ये कर सकता हूं कि मैं नंगे पांव चल पडूंगा
आपके साथ। इस पर अंजू हंसते हुए कहती है कि फिक्र मत करो मैं अपने पापा से बोल दूंगी वो दस-बीस जोड़ी दहेज में दे
देंगे और दोनों हंसने लगते हैं। फिर काफी बातें करते हैं और दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगते हैं। फिर मानव उसे कहता है कि अपनी कोई तस्वीर तो दे दो। इस पर अंजू कहती है कि तस्वीर का क्या करोगे मेरे पास कोई अच्छी तस्वीर नहीं है अभी। मानव कहता है कि तस्वीर का मुरब्बा थोड़ी
बनाऊंगा बस घर जाकर मेरे माता-पिता पूछेंगे तो उन्हें दिखानी तो पड़ेगी न कि उनकी होने वाली बहु कैसी है। दोनों हंसने लगते हैं और फिर अंजू तस्वीर लेने जाती है। तब तक अंजू के माता-पिता भी अंदर आ जाते हैं दोनों को खुश देखकर वो कहते हैं कि ठीक है बेटा, हम आपके घर आकर आपके माता-पिता से बात कर लेंगे। मानव बहुत खुश था क्योंकि अंजू ने तस्वीर के पीछे अपने घर का लैंडलाइन नंबर भी लिख दिया था और कहा कि कोई बात करनी हो तो इस पर फोन कर लें। मानव ने भी अपनी दुकान का नंबर उन्हें दे दिया तो जब अंजू अकेली होती तो मानव को फोन कर लेती, दोनों एक-दूसरे को बेहद पसंद करने लगे थे। कुछ दिन बाद मानव फोन करता है, फोन अंजू के
पिता उठाते हैं तो मानव प्रणाम करके पूछता है कि आप आए नहीं घर में सब इंतजार कर रहे हैं। इस पर अंजू का पिता उसे प्यार से कहते हैं कि हम जल्द आएंगे। दरअसल अंजू को एक और रिश्ता आया था जो
सजातीय था और लड़का सरकारी नौकरी भी करता था। इसलिए अंजू के माता-पिता चाहते थे कि पहले वहां से हां, हो जाए और अगर बात नहीं बनी फिर मानव तो है ही। वह लड़का जब अंजू को देखने आया तो उस वक्त शीतल प्राइवेट स्कूल में बच्चों को पढ़ाने गई हुई थी। लड़का घरवालों को पसंद आ जाता है लेकिन अंजू मानव से ही शादी करना चाहती है। घरवालों ने जोर देकर कहा कि
यह लड़का सजातीय होने के साथ-साथ सरकारी नौकरी भी करता है। इससे अच्छा रिश्ता नहीं मिल सकता है। बाद में पछताने से अच्छा है कि आज हमारी बात मानकर इस लड़के से शादी कर लो। घरवालों के जोर डालने पर अंजू मानव को फोन करके सबकुछ बता देती है और कहती है कि जो
भी हुआ उसे भूल जाना मैं मजबूर हूं। अगर मेरे बस में होता तो मैं कभी आपको नहीं छोड़ती। मानव भी कहता है कि तुम्हें इतना अच्छा रिश्ता मिल रहा है तो मैं तुम्हारी खुशियों को कैसे छीन सकता हूं। मेरे पास है ही क्या तुम्हें देने के लिए तुम फिक्र मत करो और खुशी-खुशी शादी कर लो।
मानव बहुत खुश था क्योंकि अंजू ने तस्वीर के पीछे अपने घर का लैंडलाइन नंबर भी लिख दिया था और कहा कि कोई बात करनी हो तो इस पर फोन कर लें।
मानव की दुकान फोटोग्राफी के लिए काफी मशहूर थी और वैसे भी उस बक्त कांगड़ा में एक या दो ही दुकान थी फोटोग्राफी की। एक हफ्ते बाद मानव की दुकान पर एक लड़का आता है और फोटो
वीडियो के लिए शादी की बुकिंग कर लेता है। दोनों एक-दूसरे से अनजान थे। लड़का अपने घर का पता और कुछ एडवांस दे देता है। तय दिन मानव अपना कैमेरा लेकर लड़के के घर पहुंच कर फोटो शूट करता है। शाम को बारात जाती है और जब लड़की वालों के घर पहुंचती है तो मानव के पैरों तले जमीन खिसक जाती है क्योंकि यह अंजू का ही घर था। लेकिन अब कुछ किया नहीं जा सकता था। वह भी बिना किसी को कोई शक हुए अपना काम शुरू करता है। रिबन कटाई की रस्म शूट हो रही थी तो सामने शीतल अपनी सहेलियों के साथ जीजा का स्वागत कर रही है। मगर जीजा को देखकर शीतल की आंखों में आंसू टपकने लगते हैं क्योंकि उसका जीजा कोई और नही बल्कि मनमीत ही था जिसे वो कश्मीर में मिली थी और आज भी उसका इंतजार कर रही थी। उधर मनमीत भी सेहरे की आड़ में आंसू छुपाकर अंदर ही अंदर घुट रहा था। जैसे-तैसे वो जयमाला तक पहुंचता है। मनमीत को जयमाला डालने के लिए पंडित जी कहते हैं तो मनमीत के हाथ कांपने लगते हैं वो जयमाला वाली कुर्सी पर धड़ाम से बैठ जाता है। सब परेशान हो जाते हैं कि शायद मनमीत की तबियत खराब हो
गई है। सब मनमीत को हवा देने लगते हैं और पूछते हैं- आपकी तबियत खराब है गई है। सब मनमीत को हवा देने लगते हैं और पूछते हैं- आपकी तबियत खराब है क्या? अब मनमीत खुद को रोक नहीं पाता और कहता, मैं यह शादी नहीं कर सकता। मैं अपने आपको धोखा नहीं दे सकता।
सारी जिंदगी पछताने से अच्छा है कि मैं अभी सब कुछ बता दूं फिर वह अपनी और शीतल की प्यार की कहानी सबको बताता है। यह सुनकर अंजू के मुरझा, चेहरे पर खुशी की रौनक आ जाती है क्योंकि मन ही मन वो मानव से प्यार करती थी। अब क्या था मानव, अंजू, मनमीत और शीतल चारों वहीं खड़े थे। सभी को यही लग रहा था जैसे कि भगवान ने उनकी सुन ली हो! अंजू, मनमीत से कहती है, ‘आप इतना परेशान क्यों होते हैं, भगवान जो करता है अच्छा ही करता है।’
जिसका मेल जिससे होना होता है वह किसी न किसी बहाने मिल ही जाता है। अब सब घरवालों ने मिलकर आपस में सलाह की और मानव के घरवालों को उसी समय बुलावा भेजा। एक ही मंडप में
दोनों जोड़ों का शुभ विवाह कर दिया गया। इस प्रकार एक टूटे दिलों के जुड़ने की एक
प्यार भरी कहानी फिर से शुरू हो गई।
