man kee khoj
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Heart Touching Story: बौधिधर्म चीन पहुंचे। राजा को मालूम पड़ा, सो दौड़े आए। मिलन के दौरान राजा ने कहा, ‘भगवन्! मन अशांत रहता है। कृपया बताएं कि यह शांत कैसे होगा।’ बोधिधर्म का जवाब था, ‘अबकी बार आप जब भी आएं अपने मन को भी साथ लेते आएं।’ राजा बड़ा हैरान हुआ, बड़ा अजीब संत है। मन लाने के लिए कह रहा है। किंतु क्या करता, संत की आज्ञा। बताए गए समय पर राजा पहुंचा। बोधिधर्म ने पूछा, ‘आ गए! मन को खोजें कि मन कहां है?

जब मिल जाए तो उसे शांत बना दूंगा। राजा शांत बैठकर मन को ढूंढने लगा। अंदर झांकता ही गया, डूबता ही गया। उसे पता चल गया कि मन नाम की कोई चीज नहीं होती, जिसे ढूंढा जा सके। यह मात्र एक क्रिया है, जिसे अगर क्रियान्वित न किया जाए तो कोई झंझट नहीं होगा। राजा ने बोधिधर्म के सामने मस्तक नवाया और कहा कि मुझे समझ आ गई कि मेरे विचार करने की शैली ही मुझे बेचैन बनाए हुए थी।

ये कहानी ‘दिल को छू लेने वाली कहानियाँ’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंDil Ko Chhoo Lene Wali Kahaniyan (दिल को छू लेने वाली कहानियाँ)