गणेश चतुर्थी इस बार 22 अगस्त को है, जिसके लिए पूरे देश में जोर-शोर से तैयारी चल रही है। बुद्धि, ज्ञान और विघ्नविनाशक के रूप में पूजे जाने वाले श्री गणेश जी के स्वागत के लिए भक्तगण पूरी तरह से तैयार हैं। ऐसा माना जाता है कि गणपति जी का जन्म मध्यकाल में हुआ था इसलिए उनकी स्थापना इसी काल में होनी चाहिए। वास्तु विषेशज्ञ नरेश सिंगल जी बता रहे हैं कि इस बार गणपति बप्पा की मूर्ति की स्थापना का सबसे शुभ समय क्या है और घर पर पूजन करने की सरल विधि, जिससे की आप बप्पा को प्रसन्न कर सुख, समृद्धि और सौभाग्य पा सकें।

गणपति बप्पा की मूर्ति की स्थापना का सबसे शुभ समय

22 अगस्त को गणेश चतुर्थी पर आकाश में चंद्रमा को नहीं देखना है। गणेश जी की मूर्ति स्थापना का समय व पूजा का समय 22 अगस्त के दिन दोपहर में 02 घंटे 36 मिनट का समय है। दिन में 11 बजकर 06 मिनट से दोपहर 01 बजकर 42 मिनट तक। गणेश जी की पूजा शौदाक्ष उपचार विधि से करनी चाहिए यह उत्सव 10 दिन तक चलता है। पूर्णिमा के बाद कृष्ण पक्ष में आनेवाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाते हैं संकट शब्द से ही संकष्टी बना है नाम से ही स्पष्ट होता है कि किसी भी प्रकार के संकट से मुक्ति पाने के लिए इस व्रत को मनाया जाता है और अमावश के बाद आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। विनय शब्द से विनायक बना है इसलिए विद्या, विनय, विवेक की प्राप्ति हो और हम अपने विवेक से सभी प्रकार के विघ्न-बाधाओं से मुक्ति पा सकें इसलिए विशेष रूप से विनायक चतुथीं मनाते हैं।

शिव पुराण के अनुसार माता पार्वती ने उबटन से एक खूबसुरत प्रतिमा बनायी और उसमें जीव प्रदान कर दिया और उसे द्वार पर निगरानी के लिए कहा और निर्देश दिया कि किसी को भी अन्दर नहीं आने देना क्योंकि मैं स्नान करने जा रही हूँ। इसी समय शिव आए जो अन्दर प्रवेश करने लगे। भगवान शिव से परिचित नहीं थे और माता का निर्देश भी था कि किसी को अंदर नहीं आने देना इसलिए गणेश जी ने शिव को रोका शिव को बहुत क्रोध आया और उन्होंने त्रिशूल से गणेश के सिर को धड़ से अलग कर दिया इतने में पार्वती वहां आयी और गणेश की यह स्थिति देख बहुत दुःखी हो गयी। शिव ने पार्वती की प्रसन्नता के लिए हाथी के बच्चे का मस्तक गणेश जी के धड़ से लगाकर पुनः जीवित कर दिया। माता पार्वती ने गणेश की  इस आकृति को देखा तो दुःखी हो गयी तभी सारे देवी देवता आए और आर्शीवाद स्वरूप अद्वितीय उपहार भेंट किये। इन्द्र ने अंकुश, वरूण ने पाश, ब्रह्मा ने अमरत्व, लक्ष्मी ने ऋद्धि-सिद्धि, सरस्वती ने समस्त विद्या आदि भेंट किया और उन्हें सर्वसममति से प्रथम देव के रूप में पदस्थापित किया इसलिए इनकी पूजा-अर्चना के उपरान्त ही अन्य देवी-देवताओं का पूजन किया जाता है।

घर पर पूजन करने की सरल विधि

  • गणेश जी की पूजा में एक विशेष प्रकार की घास या दूब का प्रयोग किया जाता है।
  • गणेश जी के साथ शिवजी, पार्वती जी, नंदी और कार्तिकेय जी का भी पूरे समस्त शिव परिवार की पूजा करनी चाहिए।
  • गणेश जी के पूजन की आसान विधि यह है कि सबसे पहले प्रसन्नचित्त होकर के शुद्ध जल से स्नान करके और जिस कमरे में गणेश जी की पूजा करनी है वंहा, साफ सफाई करके सुदर्शन बिठाकर के पूजा के लिए फूल, धूप, दीप लाल रंग की मूवी चंदन, लड्डू, कपूर आदि को थाली में रखकर के सजाए।
  • ‘ओम श्री गन गणपतए नमः’ का 108 बार जाप करने से विशेष फल प्राप्त होता है।
  • ध्यान रखें पूजा करते समय किसी बात पर गुस्सा नहीं करना चाहिए।
  • पूजा करने के पश्चात गाय को गुड़ और गेहूँ अवश्य खिलाएं।

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