Karva Chauth Poem: तुम ताको, करवा चौथ चंद्र
मैं पूर्णचंद्र तुम्हें तकता हूँ
तुम मेरी उम्र की दुआ करो
मैं अमर प्रेम की करता हूँ
झुमकों को तकते, नयन मेरे
बाहों का बना मेरे, कण्ठहार
प्रेयसि! सिंदूरी होठों से
लिख दूं माथे पर अमर प्यार
तुम देखो अटारी पर जाकर
श्यामल आकाश से घिरा चाँद
मैं मेघ वर्ण की छाया बन
करूँ अलका में प्रिय! भ्रमर- नाद
अंगों अंगों में लहराऊं
गति, ताल, छंद और लय बनकर
तुम गीत बनो, संगीत बनो
सागर में चाँदनी को छूकर
करधनी बनूँ, बांधू. तुमको
मैं सात जन्म के बंधन में
चंद्रमा हो तुम मेरे जीवन का
देखूँ मैं तुम्हें प्रति क्षण क्षण में
