Karva Chauth Poem: तुम ताको, करवा चौथ चंद्रमैं पूर्णचंद्र तुम्हें तकता हूँतुम मेरी उम्र की दुआ करोमैं अमर प्रेम की करता हूँ झुमकों को तकते, नयन मेरेबाहों का बना मेरे, कण्ठहारप्रेयसि! सिंदूरी होठों सेलिख दूं माथे पर अमर प्यार तुम देखो अटारी पर जाकरश्यामल आकाश से घिरा चाँदमैं मेघ वर्ण की छाया बनकरूँ […]
Author Archives: प्राणेन्द्र नाथ मिश्र
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कृष्ण जन्म -गृहलक्ष्मी की कविता
Krishna Janam: आसन्न प्रसव, देवकी सतीथी भाद्रमास की घनी रात,संयुक्त,अभिजीत अश्विनी पलअष्टमी तिथि, रोहिणी गात। दूसरा प्रहर वह रात्रि का थामनोहारिणी छबि पृथ्वी की थी,स्रोतस्वाति जल दर्पण सेदस ओर दिशा भी पुलकित थी। तारिका राज्य उज्ज्वल हो उठाखिल उठे पुष्प असमय ऐसेमलयानिल आकर दिव्य श्लोकगुंजित कर, चला गया जैसे। यह विजय मुहूर्त रात्रि का थाचहुं […]
