Janmo Janmo ka Bandhan
Janmo Janmo ka Bandhan

Hindi Poem: जन्म-जन्म का साथ हमारा,
बंधा है कच्चे धागे से,
पर दिल से दिल की ये डोर,
अटूट है विश्वास के सागे से।

हरी काँच की चूड़ियाँ जब खनकती हैं,
सजती हैं मेरी कलाई में,
लाल बिंदिया दमक उठती है माथे पर,
सिंदूर की लाली मुस्काती है ललाट पे,
लाल महावर, बिछिया, ये सोलह श्रृंगार —
सब तेरे नाम से सजे हैं मेरे प्यार।

मेरे पिया, तेरे नाम का वरदान है ये,
करवा माँ से पाया आशीर्वाद है ये —
बंधन नहीं, आस्था है,
जो जन्मों-जन्मों तक रहे अडिग।

न पहचान, न कोई दूरी,
बस तेरी धड़कनों की मजबूरी,
तेरे कदमों पर कदम रखती,
तेरी ओर, बस तेरी ओर चली मैं।

प्यार हमारा राधा–कृष्ण सा हो,
जो समय के पार अमर रहे,
बंधन हमारा शिव–पार्वती सा,
जो हर जन्म में साकार रहे।

जब भी जन्म लूँ मैं फिर से,
तेरी परछाईं बन जाऊँ,
हर साँस में तेरा नाम बसा हो,
तेरे बिना अधूरी सी रह जाऊँ।

धरा से गगन तक की इस दूरी में,
जैसे बारिश की बूँदें धरा को भिगो जाती हैं,
वैसे ही तेरे स्पर्श से मैं खिल उठती हूँ,
तेरे साथ से मैं पूर्ण हो जाती हूँ।

तू दिल है तो मैं धड़कन बन जाऊँ,
तू आवाज़ है तो मैं सुर बन जाऊँ,
तेरी साँसों में बसकर,
पूरी कर दूँ अपना सफर —
धरा से गगन तक,
सिर्फ तेरी बाँहों में समाई हुई।

ऐसा हो मेरा —
जन्मों-जन्मों का बंधन।