Hindi Poem: गुड्डा/गुड़िया या खेल खिलौना
पर हमें याद रखना होगा
के हमें तैयार किया गया
ऐसे कि हम हर माहौल में खुश
व एडजस्ट हो सके,,,
हमें सिखाते सिखाते
वो खुद को ही भूल गई
कि अब कहती हूँ
अम्मा अब तुम अपने लिए जिओ
अपने पसन्द की चीजें खरीदो
मां अब तुम छोटी हो जाओ
कि तुम्हारी बेटी बड़ी हो गई है!!!
