Man bitten on arm and doctor explaining in hospital
Man bitten on arm and doctor explaining in hospital

summary:इंसान के काटने से नहीं फैलता रेबीज, गाजियाबाद में सामने आया अनोखा मामला

गाजियाबाद में एक व्यक्ति बहन के काटने के बाद रेबीज के डर से अस्पताल पहुंचा। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि इंसान के काटने से रेबीज नहीं फैलता, केवल टीटी इंजेक्शन जरूरी है।

Ghaziabad: रेबीज, एक जानलेवा वायरल बीमारी, आमतौर पर संक्रमित जानवरों जैसे कुत्ते, बिल्लियाँ, बंदर और चूहे के काटने से फैलती है। हालांकि, हाल के दिनों में एक अजीबोगरीब डर समाज में फैल रहा है, इंसानों के काटने से रेबीज फैलने का डर। यह डर, हालांकि निराधार है, लोगों को चिकित्सा सहायता के लिए प्रेरित कर रहा है, जहाँ इसकी आवश्यकता नहीं है। चिकित्सकों ने इस चिंता को स्पष्ट करते हुए कहा है कि मानव काटने से रेबीज फैलने का कोई खतरा नहीं है। यह चिकित्सा समुदाय द्वारा लगातार दोहराया जाने वाला एक तथ्य है, फिर भी आम जनता के बीच जागरूकता की कमी अक्सर अनावश्यक घबराहट पैदा करती है। यह महत्वपूर्ण है कि लोग विश्वसनीय चिकित्सा जानकारी पर भरोसा करें और अनावश्यक उपचार से बचें, जो न केवल संसाधनों को बर्बाद करता है बल्कि मरीजों में अनुचित चिंता भी पैदा करता है।

यह भ्रांति गुरुवार को गाजियाबाद के जिला एमएमजी अस्पताल में एक घटना के रूप में सामने आई, जिसने इस गलत धारणा को उजागर किया। विजयनगर निवासी एक 35 वर्षीय व्यक्ति अपनी बाईं बांह पर अपनी बहन द्वारा काटे जाने के बाद एंटी-रेबीज वैक्सीन (एआरवी) लगवाने के अनुरोध के साथ अस्पताल पहुंचा। उसकी चिंता स्वाभाविक थी, लेकिन चिकित्सकीय दृष्टिकोण से यह गलत थी। डॉक्टर ने तुरंत उसे समझाया कि उसे एआरवी की आवश्यकता नहीं है और इसके बजाय टेटनस टॉक्सोइड (टीटी) का इंजेक्शन लगाया गया और आवश्यक दवाएं दी गईं। यह घटना इस बात पर प्रकाश डालती है कि कैसे आम जनता में रेबीज और उसके संचरण के तरीकों के बारे में सटीक जानकारी का अभाव है। डॉक्टरों का काम केवल बीमारियों का इलाज करना नहीं है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य शिक्षा प्रदान करना भी है, ताकि ऐसे मिथकों को दूर किया जा सके और लोगों को सही समय पर सही उपचार मिल सके।

मानव काटने से रेबीज फैलने का डर समाज में एक नई चिंता का विषय बन गया है, जो अक्सर अनावश्यक चिकित्सा यात्राओं और गलतफहमी को जन्म देता है। गाजियाबाद में हाल ही में सामने आई एक घटना इस बात का प्रमाण है कि लोग अभी भी इस मिथक पर विश्वास करते हैं। विजयनगर का एक 35 वर्षीय व्यक्ति अपनी बहन द्वारा काटे जाने के बाद जिला एमएमजी अस्पताल पहुंचा। उसकी मुख्य चिंता रेबीज को लेकर थी और उसने तत्काल एंटी-रेबीज वैक्सीन (एआरवी) लगवाने का अनुरोध किया। यह अनुरोध, हालांकि एक आम आदमी के लिए तर्कसंगत लग सकता है, चिकित्सा विशेषज्ञों के लिए अनावश्यक था।

चिकित्सक ने एआरवी देने से इनकार कर दिया, क्योंकि यह चिकित्सा रूप से अनुचित था। इसके बजाय, उन्होंने उसे टेटनस टॉक्सोइड (टीटी) का इंजेक्शन लगाया, जो मानव काटने के मामलों में एक सामान्य निवारक उपाय है, क्योंकि मानव लार में टेटनस बैक्टीरिया हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त, उसे आवश्यक दवाएं भी लिख दी गईं, ताकि संक्रमण के किसी भी अन्य जोखिम को कम किया जा सके। बाद में, युवक को इमरजेंसी विभाग में भी टीटी का इंजेक्शन लगाया गया और दवाएं दी गईं, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि उसे उचित देखभाल मिल रही है।

Woman biting man while aggressive dog nearby
Woman biting man while aggressive dog nearby

गर्मी का मौसम अपने साथ कई स्वास्थ्य चुनौतियाँ लेकर आता है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए। गाजियाबाद के अस्पतालों में ओपीडी के आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है, वैसे-वैसे विशिष्ट बीमारियों के मामले भी बढ़ रहे हैं। जिला एमएमजी अस्पताल, संयुक्त अस्पताल और डूंडाहेडा अस्पताल की ओपीडी में कुल 2415 मरीज पहुंचे, जिनमें 393 बच्चे भी शामिल थे। अकेले जिला एमएमजी अस्पताल में 1583 मरीज देखे गए, जो इन संस्थानों पर पड़ने वाले स्वास्थ्य देखभाल के बोझ को दर्शाता है।

फिजिशियन डॉ. आलोक रंजन ने बताया कि ओपीडी में सबसे अधिक शिकायतें पेट दर्द से संबंधित थीं, जिनके लिए 52 मरीज पहुंचे। यह अक्सर दूषित भोजन या पानी के सेवन से जुड़ी होती है, जो गर्मी में खराब होने की अधिक संभावना होती है। इसके अलावा, उल्टी, दस्त, बुखार, खांसी-जुकाम और वायरल संक्रमण के मरीज भी बढ़ रहे हैं। ये सभी स्थितियां अक्सर गर्मी के कारण शरीर के कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली और डिहाइड्रेशन से जुड़ी होती हैं। बच्चे और बुजुर्ग विशेष रूप से इन बीमारियों के प्रति संवेदनशील होते हैं क्योंकि उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है या वे तापमान परिवर्तन के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।

डॉ. रंजन ने जनता को सलाह दी है कि वे पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि डिहाइड्रेशन से बचा जा सके। इसके अतिरिक्त, धूप से बचकर रहना भी महत्वपूर्ण है, खासकर दिन के सबसे गर्म घंटों के दौरान, ताकि हीटस्ट्रोक और अन्य गर्मी से संबंधित बीमारियों से बचा जा सके। उचित स्वच्छता बनाए रखना और ताजे, साफ भोजन का सेवन करना भी इन बीमारियों को रोकने में मदद कर सकता है। इन सरल एहतियाती उपायों का पालन करके, व्यक्ति गर्मी के मौसम में भी स्वस्थ रह सकते हैं और अस्पतालों पर अनावश्यक बोझ से बचा जा सकता है।

मैं एक बहुमुखी मीडिया पेशेवर हूं, जिसे कंटेंट लेखन में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। मेरा लक्ष्य ऐसी सामग्री पर ध्यान केंद्रित करना है जो सूचित, शिक्षित और प्रेरित करती है। चाहे लेख, ब्लॉग या मल्टीमीडिया सामग्री बनाना हो, मेरा लक्ष्य...