Health Problems
Pets Diseases Credit: Istock

Overview: बार–बार इन्फेक्शन और जुकाम होना नहीं है सामान्य, कहीं पैट्स तो नहीं है जिम्‍मेदार

पैट्स हर किसी को अच्‍छे लगते हैं लेकिन कई बार ये गंभीर बीमारी को न्‍यौता दे सकते है। लेकिन उचित देखभाल और वैक्‍सीन से खुद को सुरक्षित किया जा सकता है।

Health Problems Due To Pet: पालतू जानवर यानी कि पैट्स हमारे जीवन में खुशी और दोस्‍ती लाते हैं, लेकिन कई बार वे कुछ ऐसी हिडन बीमारियां भी लेकर आते हैं जिनसे चाहते हुए भी आप दूरी नहीं बना पाते। इन बीमारियों को ज़ूनोटिक डिजीज कहा जाता है। ये बीमारियां बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी या फंगस के कारण होती हैं और पैट्स से इंसानों में फैल सकती हैं। खासकर खराब स्वच्छता, कमजोर इम्‍यूनिटी या पालतू जानवरों की उचित देखभाल न होने पर यह खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, सही देखभाल से इस समस्‍याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। तो चलिए जानते हैं पैट्स से किन बीमारियों का खतरा हो सकता है।

टॉक्सोप्लाज्मोसिस

यह पेरासाइट्स के कारण होने वाली बीमारी है, जो बिल्ली के मल में पाया जाता है। गर्भवती महिलाओं और कमजोर इम्‍यूनिटी वाले लोगों के लिए यह खतरनाक हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि बिल्ली के लिटर बॉक्स को रोज साफ करें और दस्ताने पहनें। गर्भावस्था में किसी और से यह काम करवाएं। इसके अलावा कच्चा मांस खाने से भी बचें, क्योंकि यह भी पेरासाइट्स का स्रोत हो सकता है।

रिंगवर्म

रिंगवर्म एक फंगल इन्फेक्शन है, जो त्वचा, सिर या नाखूनों को प्रभावित करता है। बिल्लियां और कुत्ते इस बीमारी को फैला सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि पैट्स को नियमित रूप से नहलाएं और उनकी ग्रूमिंग करें। उनके रहने की जगह को कीटाणुरहित करें। जिन जानवरों के शरीर पर गंजे धब्बे या घाव हों, उन्हें न छुएं। पैट्स को छूने के बाद हमेशा हाथ धोएं।

कैट स्क्रैच डिजीज

यह बैक्टीरियल इन्फेक्शन बार्टोनेला हेन्सेले के कारण होता है, जो बिल्लियों के खरोंचने या काटने से फैलता है। इसलिए बिल्लियों, खासकर बिल्ली के बच्चों के साथ रफ खेल से बचें। खरोंच या काटने की जगह को तुरंत साबुन और पानी से धोएं। बिल्लियों को घर के अंदर रखे।

लेप्टोस्पायरोसिस

Leptospirosis
Leptospirosis

यह बैक्टीरियल इन्फेक्शन कुत्तों या जंगली जानवरों के मूत्र से फैलता है। दूषित मिट्टी या पानी के संपर्क में आने से यह इंसानों में पहुंच सकता है। अपने कुत्ते को वैक्सीन लगवाएं। बाढ़ के पानी या कीचड़ वाली जगहों पर टहलने से बचें। पालतू के मल-मूत्र की सफाई के दौरान दस्ताने पहनें।

साल्मोनेलोसिस

यह साल्मोनेला बैक्टीरिया के कारण होता है, जो सरीसृप, पक्षी या दूषित पालतू भोजन से फैल सकता है। पालतू या उनके भोजन को छूने के बाद हाथ धोएं। सरीसृपों को रसोई और 5 साल से छोटे बच्चों से दूर रखें।

रेबीज

रेबीज एक घातक वायरस है, जो संक्रमित जानवरों के काटने से फैलता है। यह तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है और लक्षण दिखने के बाद लगभग हमेशा घातक होता है। अपने पालतू को रेबीज की वैक्सीन लगवाएं। आवारा या जंगली जानवरों से संपर्क न करें। काटने या खरोंचने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।

जुकाम और फेफड़ों का इन्फेक्शन

कुछ पालतू जानवर, जैसे पक्षी, फेफड़ों के इन्फेक्शन या जुकाम जैसे लक्षण पैदा करने वाले रोगाणु फैला सकते हैं। पैट्स के पिंजरे को नियमित रूप से साफ करें और उनके संपर्क में आने के बाद हाथ धोएं। पक्षियों को छूने के बाद चेहरा न छुएं और सांस लेने में दिक्कत होने पर चिकित्सक से संपर्क करें।

बचाव के उपाय

नियमित जांच: पैट्स की नियमित जांच और टीकाकरण करवाएं।

स्वच्छता: पालतू और उनके रहने की जगह को साफ रखें। उनके मल को तुरंत हटाएं।

हाथ धोना: पालतू को छूने, उनके भोजन या मल को संभालने के बाद हमेशा हाथ धोएं।

बच्चों को सिखाएं: बच्चों को पालतू के साथ सुरक्षित व्यवहार करना सिखाएं और उन्हें स्वच्छता का महत्व बताएं।

पालतू का खानपान: कच्चे मांस से बचें और पशु चिकित्सक की सलाह पर ही भोजन दें।