Pet Dogs Responsibilities: वर्तमान आधाुनिक युग में स्टेटस सिंबल के तौर पर कुत्ता पालने का बहुत शौक होता है। खासकर विदेशी नस्लों के कुत्तों को पालने का शौक तेजी से बढ़ रहा है। लोग पालतू कुत्ते का फैमिली मेंबर की तरह पालन-पोषण करते हैं और प्यार देते हैं। इसके बावजूद कई बार डाॅग-लवर्स अपने पालतू कुत्ते के व्यवहार को भी समझ नहीं पाते और बड़े लाड-प्यार से पाले जाने वाले पेट डाॅग्स न केवल दूसरों पर, उन पर भी हमला कर देते हैं। जिसका अच्छा-खासा खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ता है। पिछले कुछ अर्से से पालतू कुत्तों के आक्रामक हमले की घटनाएं सुर्खियों में रही हैं। जिसके चलते जरूरी है कुत्ता पालने वाले मालिकों को कुछ नियम-कायदों को ध्यान में रखना जरूरी है।
हाल ही में भारत सरकार ने कुत्तों की 23 खतरनाक नस्लों की बिक्री और प्रजनन पर बैन करने का एलान किया है। इन नस्लों में पिटबुल टेरियर्स, टोसा इनु, अमेरिकन स्टैफोर्डशायर टेरियर, फिला ब्रासीलेरियो, डोगो अर्जेंटीनो, अमेरिकन बुलडॉग, बोअरबोएल, कांगल, टार्नजैक, बैंडोग, सरप्लानिनैक, जापानी टोसा, अकिता, मॉस्टिफ्स, राटविलर, रोडेशियन रिजबैक, कैनारियो, अकबाश और मास्को गार्डडॉग, वोल्फ डॉग, जर्मन शेफर्ड शामिल हैं। सरकार ये फैसला ऐसे वक़्त पर लिया है जब देश में कुत्तों के काटने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के मुताबिक पालतू कुत्ते रखना किसी व्यक्ति का मौलिक अधिकार है। वह अपनी इच्छा से कुत्ता पाल सकता है, लेकिन बतौर पालतू का मालिक होने के नाते आपकी कुछ जिम्मेदारियां बढ़ जाती है।
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सही तरीके से देखभाल

सबसे पहले यह बात जांच लें कि आप वाकई कुत्ता पाल सकते हैं या एक बच्चे की तरह कुत्ते का ध्यान रख सकते हैं। क्योंकि जब आप कुत्ता अडाॅप्ड करेंगे, यकीनन कम उम्र या कुछ महीने का ही लेंगे। जो एक छोटे बच्चे की तरह उसका पालन-पोषण, खान-पान, घर के वातावरण में ढालना, उसके साथ खेलना, ट्रेनिंग देना, पाॅटी से लेकर अन्य क्रियाओं पर ध्यान देना होगा। अगर आप अपने बिजी शेड्यूल में उसकी जिम्मेदारी उठा पाएं-तभी उसे घर में लाएं।
रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस

अगर आप डाॅग-लवर हैं और कुत्ता पालना चाहते हैं-इसके लिए आपको स्थानीय नगर निगम में रजिस्ट्रेशन करवाना और लाइसेंस बनवाना चाहिए। इससे एनिमल वेलफेयर बोर्ड को कुत्ते के वैक्सीनेशन, बीमारी या उसके बारे में तमाम जानकारी पता रहती है। मालिक के लिए यह रजिस्ट्रेशन नियत अवधि के बाद रीन्यू कराना भी जरूरी है।
नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट
इस बात का ध्यान रखें कि आपके कुत्ता पालने से आसपास के पड़ोसियों को किसी तरह की आपत्ति न हो। वरना आप दुविधा में रहेंगे। देश के कई राज्यों में तो पालतू कुत्ता रखने के लिए अपने पड़ोसियों से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना भी जरूरी है।
न हो पड़ोसियों को परेशानी

कुत्ते को होम-फ्रेंडली और सोशल फ्रेंडली बनाने के लिए समुचित नियंत्रण में रखना जरूरी है। इसके लिए उसे शुरू से ही ट्रेनिंग देनी पड़ती है। यह मालिक की जिम्मेदारी होती है। जरूरत हो तो इसके लिए किसी पशु ट्रेनर की मदद भी ली जा सकती है। जैसे कुत्ते बेवजह न भौंके। जिसके चलते घर के अन्य सदस्यों या पड़ोसियों को परेशानी हो। खासकर रात को न भौंके जिससे पड़ोसी की नींद खराब हो जाए। कुत्ते के भौंकने से दूसरों को हुई असुविधा के लिए जुर्माना तक भरना पड़ सकता है।
साफ-सफाई का ध्यान
मौसम के हिसाब से पेट डाॅग के लिए घर में अनुकूल वातावरण बनाए रखना भी जरूरी है। क्योंकि उन्हें गर्मी-सर्दी बहुत लगती है। जिसे दूर करने के लिए गर्मियों में जहां कमरा हवादार होने के लिए पंखे, कूलर या एसी की व्यवस्था होनी चाहिए, वहीं सर्दियों में उसके बिस्तर में कंबल और पीठ ढकने के लिए गर्म कपड़ों की व्यवस्था जरूर करनी चाहिए। अगर आपका पालतू बालों या फर वाला है, तो बदलते मौसम में उसके बाल नेचुरली झड़ते हैं। घर में यहां-वहां फैले बालों को यथासंभव नियमित रूप से साफ करना जरूरी है। ऐसा करना हाइजीन के हिसाब से जरूरी है, साथ ही बालों के अनचाहे ही इन्हेल करने पर परिवार के सदस्यों को श्वसन संबंधी समस्याएं होने का खतरा रहता है।
पालतू की देखभाल

उनकी नियमित साफ-सफाई जरूरी है क्योंकि 8-10 दिन में नहलाना, बालों की कंघी करना, नाखून काटना, उठने-बैठने की जगह या उसका बिस्तर और खाने-पीने के बर्तनों की नियमित तौर पर साफ-सफाई रखना बहुत जरूरी है। वरना वो किसी संक्रमण का भी शिकार हो सकता है। साफ-सफाई का ध्यान न रखने पर उसके शरीर में टिक्स पड़ सकते हैं। जो न केवल उन्हें परेशान करते है, बल्कि मनुष्यों में स्थानांतरित होकर कई तरह की त्वचा संबंधी समस्याएं और लाइम रोग होने की आशंका रहती है। टिक से जल्द से जल्द छुटकारा पाने के लिए पशु-चिकित्सक को दिखाना और कुत्ते को टिक-रोधी दवाई और शैम्पू से नहलाना जरूरी है।
जरूर लगवाएं रेबीज वैक्सीन
सुनिश्चित करें कि कुत्ते को समय-समय पर वैक्सीन खासकर रेबीज वैक्सीन जरूर लगवाएं। जिससे अगर वो गलती से किसी को काटता भी है तो व्यक्ति का रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव हो सके। इसके अलावा अपने पेट को डीएपी जैसी कोर वैक्सीन को भी निर्धारित समय पर लगवाएं जो उसे संक्रमण से बचाव करने में मदद करती है।
घर से बाहर ले जाते समय

बाहर ले जाते समय उसके गले में पट्टा और चैन जरूर बांधे ताकि वह आपकी पहुंच से बाहर न चला जाए या अचानक दूसरों को किसी तरह का नुकसान न पहुंचाए। जरूरी नहीं कि दूसरा व्यक्ति एनिमल-लवर हो, कुत्ते को सामने से आता देखकर ही डर सकते हैं। अगर आप अपने कुत्ते को चैन में बांध कर ले जाएंगे तो संभव है कि उसका डर दूर रहेगा। अगर आप किसी अपार्टमेंट में रहते हैं तो आप आने-जाने के लिए लिफ्ट में ले जा सकते हैं। कोशिश करें लिफ्ट में तब जाएं जब वो खाली हो। साथ ही कुत्ते को पूरे नियंत्रण में और मुंह पर स्मगल जाल लगाकर जाएं ताकि वो किसी को नुकसान न पहुंचा पाए।
गंदे न हो सार्वजनिक स्थान
शौचादि के लिए मालिक को ध्यान रखना चाहिए कि किसी पड़ोसी के घर के आगे या सार्वजनिक स्थान गंदे न हो। अगर ऐसा होता भी है तो शौच साफ करने की जिम्मेदारी मालिक की बनती है। कायदे से इसके लिए उन्हें पाॅॅलिथीन साथ लेकर जाना चाहिए। लेकिन बहुधा वे इसकी अनदेखी कर जाते हैं जो सर्वथा अनुचित है। इसकी वजह से पर्यावरण तो गंदा होता ही है, उन्हें पास-पड़ोस की रंजिश का भी सामना करना पड़ता है।
