Hindi Poem: कल सारी रात नींद नहीं आई,
बारिश की वह बूंदें,
जो संगीत सी लगती थी,
उन्होंने एक दहशत सी फैलाई।
मेरा पंजाब सहम रहा है,
तिनके की तरह बिखर रही है,
किसी की सारी उम्र की कमाई।
पर सलाम है
मेरे पंजाब के हौसले को,
जिसने इस बेदर्द मौसम में भी,
अपनी हिम्मत न भुलाई।
हर इंसान कर रहा है कोशिश,
इस बाढ़ से उबरने की,
न जाने कितनी पाक रूहों ने
की है रहनुमाई।
हे ईश्वर, आप कृपा कर देना
और मेंह न बरसाना।
इन बूँदों को कह देना,
जाकर बरसो तुम वहाँ,
जहाँ के लोगों की आँखें
तुम्हारे इंतजार में पथराई।
अब तो बस हिम्मत दे देना,
मेरे पंजाब को,
जो लड़ते हैं हालात से,
कभी देते नहीं दुहाई।
पंजाब डूबता नहीं उठता है—गृहलक्ष्मी की कविता
