Summary: आज का किशोर भावनाओं के बोझ से खुद में सिमट रहा है
किशोरावस्था में हर भावना गहरी लगती है। परिवार का साथ भी कई बार दबाव बनता है, इसलिए किशोर दूरी बनाते हैं। उन्हें प्रेम से अधिक भावनात्मक सुरक्षा चाहिए।
Teenager Loneliness: टीनएज किसी भी बच्चे के लिए शारीरिक और मानसिक बदलावों से भरा होता है। इस उम्र में जो चीज माता-पिता या दूसरों के लिए बहुत छोटी होती है, वही चीज टीनएजर को गहरी भावनात्मक चोट पहुंचा सकते हैं। यहां तक कि उन्हें अकेलेपन के एहसास से भी भर सकते है। बहुत से माता-पिता सोचते हैं कि हम अपने बच्चों का इतना ख्याल रखते हैं, प्यार करते हैं, फिर क्यों वह इस तरह हमसे कटा हुआ महसूस करते है। आईए जानते हैं इस लेख में, माता-पिता के प्यार के बावजूद टीनएजर क्यों अकेलापन महसूस करते हैं।
टीनएजर में अकेलेपन का कारण
छोटी बातों को बहुत बड़ा समझना: किशोरावस्था में बच्चे बहुत संवेदनशील हो जाते हैं। इस समय वह बहुत से हार्मोनल और दिमागी विकास से गुजर रहे होते हैं, जिसका असर उनमें शारीरिक और भावनात्मक बदलाव के रूप में देखा जा सकता है। इस स्थिति में अगर उनके शारीरिक परिवर्तन पर कोई टिप्पणी करता है या फिर वह अपने पहले क्रश से ना सुनते हैं या खुद से अपने प्राइवेट पार्ट्स को छूते हैं या खुद को सेल्फ सेटिस्फाई करके उसके बाद उसे गलत काम समझते हैं तो यह सभी बातें उन पर बुरा प्रभाव डालता है। हालांकि यह सभी बातें बहुत छोटी हैं पर सही मार्गदर्शन के अभाव में यह बच्चे के लिए बहुत बड़ी बातें बन जाती हैं। इस समय किशोरी का दिमाग इतना विकसित नहीं होता कि वह तथ्य को समझ सके। वह कैसा महसूस कर रहे हैं इस पर उनका बर्ताव निर्भर करता है।

परिवार का साथ, दबाव लगता है: इस उम्र में बच्चों के अंदर अपनी पहचान और स्वतंत्रता की इच्छा सर उठती है। ऐसे में जब परिवार द्वारा लगातार उन्हें निर्देश दिया जाता है, साथ बैठने खाने या घूमने को कहा जाता है तो बच्चा इसे अपने ऊपर दबाव की तरह देखा है। इसका एक कारण यह भी है कि परिवार के साथ रहने या घूमने पर उन्हें बेकार के जजमेंटल व्यवहार में बांधने की कोशिश करी जाती है जो की टीनएजर को प्यार से ज्यादा बोझ समझ में आता है।
माता-पिता की कोशिश और टीनएजर की उलझन: माता-पिता अपनी तरफ से बच्चों को खुश करने, अकेलापन महसूस न होने देने की बहुत कोशिश करते हैं, परंतु टीनएजर के लिए यह सब उलझन की तरह हो जाता है। इसका एक कारण उम्र के गैप के कारण समझ में अंतर का होता है।
टीनएजर में अकेलापन क्यों बढ़ रहा है
वर्तमान समय में टीनएजर के अकेलेपन का कारण केवल पेरेंट्स या उनका प्यार नहीं है। बल्कि यह अकेलापन टेक्नोलॉजी, सामाजिक दबाव, डिजिटल दबाब, अनजाने इनफ्लुएंसर का दबाव ये सभी टीनएजर के दबाव का कारण है।
आज हर बच्चे पर हर चीज चाहे वह खेल हो या पढ़ाई उस पर टॉपर बनने का दबाव है बिना यह जाने की वह कितना कर सकता है।
आज टीनएजर अपना कंपेयर सिर्फ अपने क्लासमेट से नहीं करते बल्कि उन इनफ्लुएंसर से करते हैं जो उनकी उम्र में करोड़ों के मालिक बन चुके हैं।
टीनएजर सिर्फ पढ़ाई, खेल या अच्छा दिखने का दबाव ही नहीं महसूस कर रहे बल्कि फिल्म, वेब सीरीज में देखे गए इंटिमेसी सीन उनके अंदर के यौन भावना को भी कम उम्र में बढ़ा रहे हैं। जिसे पूरा न कर पाने या उन्हें संभालने का दबाव भी वह महसूस कर रहे हैं।
पेरेंट्स किस तरह टीनएजर की मदद कर सकते हैं
माता-पिता अपने अनुभवों के बजाय इस उम्र में आने वाले बदलावों को ध्यान में रखकर अपने बच्चों की देखभाल करें।
टीनएजर से बातचीत में अपनी अपेक्षाओं से ज्यादा उनकी भावनाओं को समझे।
उन्हें सुधारने की बजाय, उन्हें समझने में अपनी रूचि दिखाएं।
उनसे बात करते हुए बड़े उपदेश की जगह छोटी बातों को महत्व दें।
उनके स्वतंत्रता और निजी समय का सम्मान करें।
माता-पिता समझे आज की दुनिया आपके समय से तेज हो चुकी है। आज बच्चा कम उम्र में ही बहुत कुछ जानता है। यह नहीं कहा जा सकता कि इस अत्यधिक जानने में वह कितना समझाता है। समय से पहले बिना किसी मेहनत और रिसर्च के अत्यधिक जानना आज टीनएजर में थकान का कारण बनता जा रहा है। ऐसी स्थिति में माता-पिता टीनएजर को उपदेश या दबाव से नहीं प्यार से समझा सकते हैं।
