Hindi Social Story: सूत्रधार: आज दोपहर में ही अंकिता को लड़के वाले देखकर गए थे, और एक घंटे बाद ही उनका फोन आ गया।ममता जी: क्या हुआ जी !? किसका फोन था?घनश्याम जी: लड़के वालों का फोन था। अंकिता के लिए मना कर रहे हैं।सूत्रधार: पापा की बात सुनकर छोटी बेटी आंचल गुस्से में तिलमिला […]
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पछतावा-गृहलक्ष्मी की कहानी
Hindi Social Story: यूं तो मधुरिमा की शादी को चौदह वर्ष पूरे हो चुके थे, पर शायद घर में मिलते तिरस्कार से वो स्वयं को पूर्णतया अकेली सी महसूस करती थी हर पल।ताने मारने का कोई भी मौका सासू मां चूकती न थी ।परिवार का हर सदस्य ही मधुरिमा की बुराई करता और उसके हर […]
पावन प्रेम गंगा घाट सा-गृहलक्ष्मी की लघु कहानी
Hindi Kahani: आप अकेले होकर भी अकेले नहीं हैं,यही तो बनारस की ख़ूबसूरती है, और यह अस्सी घाट गुंजायमान होते हुये भी यहाँ अलौकिक शांति है।धवला मन ही मन सोचते हुये प्रमुदित हो रही थी कि सहसा हृदय में एक टीस सी उठी, माँ गंगा को निहारते हुये नेत्रों से अश्रुधारा बह निकली।हे माँ …बस […]
बड़े फख्र से कहता हूं—गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Prem Kahani: “आओ जी, फिर से स्वागत है आपका। इस बार बड़ी जल्दी आ गए।”“अरे-अरे, इतनी उखड़ी-उखड़ी सी क्यों बोल रही हो? ऐसे तो कोई किसी का स्वागत नहीं करता।” “हूंह…” “अच्छा, अब देख भी लो मेरी तरफ।” “क्यों चले आते हो बार-बार? क्या है मुझ में इतना खास कि तुम मुझे छोड़ नहीं […]
आरती—गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Short Story: आरती बहुत खुश थी, आज कॉलेज में उसका पहला दिन था। उसका सपना था एक अच्छे से कॉलेज से अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करे और फिर अच्छी सी जॉब करे, ताकि वो अपने परिवार की मदद कर सके। उसके परिवार में बस माँ और एक छोटा भाई था, उसके पिता की […]
पिया का घर-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: छोड़ बाबुल का घर, जब मैं पिया के घर आई,नये लोगों के बीच थोड़ा सहमी और संकुचाई;जैसा सुना था मैंने, उससे हटकर सबको पाई,ससुराल वालों ने मुझसे ऐसी प्रीति निभाई। जीवनसाथी के रूप में एक सच्चा साथी पाई,खुशियों पर मेरी जिसने, अपनी खुशियां लुटाई;स्नेह मिला इतना, कि कभी लगा नहीं मैं पराई,छोड़ बाबुल का घर, जब मैं पिया […]
लास्ट कैंडिडेट-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Motivational Story: “मिस्टर दीपक आपने सभी सवालों का जवाब बिल्कुल सही दिया है। हमें खुशी होगी आप जैसा काबिल व्यक्ति हमारे स्टाफ में शामिल हो। हम आपको कॉल करके बताएंगे कि कब से ज्वाइन करना है।”राजेन्द्र ने संगीत शिक्षक के लिए अंतिम अभ्यर्थी दीपक से कहा जिसके चेहरे पर शुन्य भाव उसने भी महसूस […]
यात्रीगण कृप्या ध्यान दें-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: एक आम यात्री की कहानी, जो हमेशा ध्यान देता रहता है… “यात्रीगण कृपया ध्यान दें!” यह वाक्य सुनते ही दिमाग में तुरंत स्टेशन की तस्वीर उभर आती है — प्लेटफॉर्म पर भागते लोग, चाय की केतली की सीटी, ट्रेन के इंजन की गुर्राहट, और ऊपर से लाउडस्पीकर पर किसी मीठी मगर भावहीन आवाज़ […]
आलू टमाटर की सब्जी-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Short Story in Hindi: आज बाबूजी की तेरहवीं है। नाते-रिश्तेदार इकट्ठे हो रहे हैं। उनकी बातचीत, हँसी मज़ाक देख-सुनकर उसका मन उद्दिग्न हो रहा है..”कोई किसी के दुख में भी कैसे हँसी मज़ाक कर सकता है? पर किससे कहे,किसे मना करे,, सभी तो एक जैसे हैं”वह बाबूजी की तस्वीर के सामने जाकर आँख बंद करके […]
ये कैसी छूट-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Social Story: आम भारतीय घरों की तरह सुधा के घर पर भी सुबह – सबेरे भाग- दौड़ मची थी| पतिदेव को ऑफिस जाना है| बच्चों को स्कूल भेजना है| ससूर जी मार्निंग वॉक से आने वाले है|सासु जी के लिए पूजा घर साफ कर प्रसाद बनाना है| सुधा चारों तरफ दौड़ रही थी,जिंदगी भर […]
