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माँ तुम हो मेरा  संसार!-गृहलक्ष्मी की कविता

Mother Poem: माँ तुम हो मेरा संसार, तुम  ही चंदा, तुम  ही खुसबू तुम फूलों की डाली , तुमसे मेरी  सारी खुशियां होली और दिवाली , सज ही गया मेरा   संसार  माँ तुम  हो  मेरा  सँसार! तुम ही चन्दा तुम ही चिराग पंख लगा मैं संग  उडूंगी कलियां जब  महकेंगी , माँ तुम हो इस […]

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“शिक्षक दिवस”-गृहलक्ष्मी की कविता

Teacher’s Day Poem: दीपक जैसे जलते  शिक्षक, अज्ञान-तिमिर करने को नाश,मेंटें जग के अंधियारे  को,  देकर प्रज्ञा,ज्ञान-प्रकाश,सदा प्रयत्नशील रहते हैं,  शिष्यों में सद्गुण भरने को,तन-मन से प्रयास  करते हैं,  शिष्यों के दुर्गुण हरने को,ना ही भूख दौलत की उनको,  ना ही कोई लालच-आस,दीपक जैसे जलते शिक्षक,  अज्ञान – तिमिर करने को नाश।शिष्यों की उपलब्धि देखकर,  सीना […]

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दहलीज—गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: दहलीजहर रिश्ते मे दहलीज होना चाहिए,चाहे माता पिता से रिश्ता हो,चाहे भाई बहन का हो,चाहे दोस्तों का हो,हर जगह दहलीज होना चाहिए, जब जब दहलीज पार हुई है,तब तब तहस नहस हुआ है,रिश्ते की मर्यादाओं को जंग लग जाती है,विश्वास का दमन टूट जाता है,सारे जगत मे बदनाम हो जाते हैं, जब दहलीज […]

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धरा अम्बर का मिलन-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: दूर क्षितिज पर व्योम को देखो,कैसे वसुधा को महका रहा।अपने प्रेम के आगोश की माला,मांँ अचला को पहना रहा। हरी भरी धरा भी देखो,गगन पर प्रेम बरसा रही।अपने नेह प्रेम की माला,वो अम्बर को पहना रही। हम सभी भी बने साक्षी,इस मधुर मिलन के संग की।जो मिलकर भी रहते हैं जुदा,बस बर्षा करें […]

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पत्नी धर्म निभाना-गृहलक्ष्मी की कविता

Poem in Hindi: साथ तेरा मिला जो मुझको, बिछड़ मुझसे अब न जाना। वपु रूप में बसों कही भी, चित्त से मुझे न बिसराना।। साथ तुम्हारा मुझे मिला है, हर जन्म में इसे निभाना। कहे जमाना कुछ भी हमको त्याग मुझे तुम न जाना।। सुख दुःख और कहासुनी से, मुझसे तुम न अमर्ष होना। हालात रहें […]

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मैं लड़की हूं-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: मैं लड़की हूं,पर अब लड़की नहीं रहना चाहतीसोचती थी, मैं भी अपने माता पिता केजीने का सहारा बनूँ, एक डॉक्टर बनीलड़की थी तो क्या ,मैं भी सर ऊंचा कर जी रही थीआज सोच बदल गई मेरीकाश मैं भी लड़का होती मुझे भी मनमानी करने का लाइंसेंस मिल जातारात को घर आती ,ना आती […]

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माता-पिता-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: दुनिया का सबसे मुश्किल काम हैं अपनी ही आंखों के सामनेअपने माता—पिता को बूढ़ा होते हुए देखना ये वो समय होता है जब हमईश्वर के इस लिखे को टाल भी नहीं सकते हैंमाता—पिता के वो खूबसूरत से चेहरे पर झूर्रियोंसे भर जाते हैं,उंगली पकड़कर चलाने वालेजब खुद चल नहीं पाते, सहारा देने वाले […]

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तुम जीना अपने लिए-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: सांत्वनाएँ सभी देंगेमगर तुम्हारे संघर्ष मे तुम्हारा साथ कोई नहीं देगासब कहेंगे कि तुम बहुत सबल होमगर तुम्हारे टूटे  मन की व्यथा कोई नहीं सुनेगातुम्हारी हर मुस्कान पर सवाल उठेंगेमगर जो आँसू जब्त किये है तुमने भीतर ही उनका हिसाब कोई नहीं पूछेगातुम हर दिन  बिखरोगीमगर कोई तुम्हें नहीं समेटेगामगर फिर भी जीना […]

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क्या हमारी बच्चियों का…?-गृहलक्ष्मी की कविता

Poem on Daughter: अहिल्या गार्गी जैसी विदुषियों पर आज आघात पर आघात है,क्या हमारी बच्चियों के भविष्य का सिर्फ यही परिणाम है। टूटा बांध सब्र का अब आता नहीं करार,कर दो अंग-भंग इन भेड़ियो के मोदी जी,करो इन राक्षसों  के समूचे वंश का विनाश। जो कर सके रक्षा बेटियों की तुम,तभी तो तुम कहलाओगे सच्चे […]

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भारत का गुणगान-गृहलक्ष्मी की कविता

Independence Hindi Poem: भारत की इस पावन धरा की, क्या सुनायें दास्तां,मेरे वतन प्यारे वतन शत् शत् नमन तुमको सदा। करता हिफाज़त हिमपति,जो हिंद का सिरमौर है‌‌।पावन बहे भागीरथी, धरती पे जैसे स्वर्ग है।सागर पखारे नित् चरण,गोदी मे कुदरत की बसा।ऐसे शिरोमणि देश की,हम क्या सुधारें दास्तां। जाति धर्म का भेद ना, रहते हैं सब […]

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