Teacher’s Day Poem: दीपक जैसे जलते शिक्षक,
अज्ञान-तिमिर करने को नाश,
मेंटें जग के अंधियारे को,
देकर प्रज्ञा,ज्ञान-प्रकाश,
सदा प्रयत्नशील रहते हैं,
शिष्यों में सद्गुण भरने को,
तन-मन से प्रयास करते हैं,
शिष्यों के दुर्गुण हरने को,
ना ही भूख दौलत की उनको,
ना ही कोई लालच-आस,
दीपक जैसे जलते शिक्षक,
अज्ञान – तिमिर करने को नाश।
शिष्यों की उपलब्धि देखकर,
सीना चौड़ा हो जाता,
ख़ुशी झलकती मुखमण्डल से,
गौरव से सर उठ जाता,
शिक्षक की नजरें करतीं,
शिष्यों के गुण की तलाश,
दीपक जैसे जलते शिक्षक,
अज्ञान-तिमिर करने को नाश।
ना ही प्रशंसा,पुरस्कारों के,
शिक्षक भूखे होते हैं,
वे तो बस अपने शिष्यों की,
उन्नति से खुश होते हैं।
“भावुक”शिष्यों को निखार कर,
उन्हें बना देते हैं खास,
दीपक जैसे जलते शिक्षक,
अज्ञान-तिमिर करने को नाश,
मेंटें जग के अंधियारे को,
देकर प्रज्ञा,ज्ञान- प्रकाश।
Also read: ‘टीचर्स डे’ के मौके पर देखें गुरु की छवि को दिखातीं ये सीरीज: Teacher’s Day Series
