Technology's support for women's health
Technology's support for women's health

Technology in Women Health: स्मार्ट वेलनेस टेक उन तकनीकों और डिवाइसों को कहते हैं जो हमारी सेहत का ध्यान रखने में मदद करती हैं। यह इसलिए तेजी से लोकप्रिय हो रही है क्योंकि आज महिलाएं अपनी सेहत के प्रति ज्यादा जागरूक हैं।

आज की महिलाएं जीवन के हर क्षेत्र में मजबूती से कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं।करियर हो, घर हो या खुद की सेहत वे हर जिम्मेदारी को संतुलित करने की पूरी कोशिश करती हैं। इसी दौरान सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला एक नया शब्द सामने आया है- स्मार्ट वेलनेस टेक। अब आपके मन में सवाल आ सकता है कि आखिर यह है क्या? चिंता मत कीजिए, हम आपको इस शब्द का मतलब और इससे जुड़ी हर जरूरी डिटेल बताते हैं।

स्मार्ट वेलनेस टेक वे तकनीकें और स्मार्ट डिवाइस हैं जो हमारी सेहत का ख्याल रखने में मदद करते हैं। ये इसलिए तेजी से फेमस हो रहे हैं क्योंकि आज लोग अपनी सेहत के लिए ज्यादा जागरूक हैं और उन्हें ऐसी टेक्नोलॉजी चाहिए जो आसानी से, अपने ही समय पर, आपकी सेहत को ट्रैक कर सके और तुरंत उपयोगी सलाह भी दे सके।

महिलाओं की सेहत से जुड़े कई पहलू जैसे पीरियड्स हार्मोन, प्रेग्नेंसी, नींद, मानसिक स्वास्थ्य, फिटनेस अब ऐह्रश्वस और वियरेबल डिवाइस की मदद से आसानी से ट्रैक किए जा सकते हैं। ये तकनीकें महिलाओं को उनकी जरूरत के हिसाब से व्यक्तिगत सलाह, समय-समय पर आपको याद दिलाती है और हेल्थ इनसाइट्स देती हैं, जिससे वे अपनी सेहत पर बेहतर नियंत्रण रख पाती हैं।

पीरियड और फर्टिलिटी ट्रैकिंग ऐप्स : ये ऐप्स महिलाओं को उनके पीरियड्स ट्रैक, मूड, ओव्यूलेशन और हार्मोनल बदलाव को समझने में मदद करती हैं। ऐह्रश्वस पहले से बता देती हैं कि अगला पीरियड कब आएगा और फर्टाइल विंडो कब है।

डाइट और फिटनेस ट्रैकिंग ऐप्स: इन ऐप्स में खाना, कैलोरी, पानी, स्टेप्स और एक्सरसाइज रिकॉर्ड की जा सकती है। ऐप्स बताती हैं कि क्या खाना चाहिए, कैलोरी कितनी है और फिटनेस लक्ष्य के हिसाब से क्या सुधार करना चाहिए। वजन कम करने या फिट रहने में इनकी बड़ी मदद मिलती है।

मेडिटेशन और स्ट्रेस मैनेजमेंट ऐप्स : ये ऐप्स गाइडेड मेडिटेशन, रिलैक्सेशन म्यूजिक और माइंडफुलनेस एक्सरसाइज देती हैं, जिससे तनाव कम होता है, एकाग्रता बढ़ती है और मानसिक शांति मिलती है।

स्लीप ट्रैकिंग ऐप्स : ये ऐप्स नींद कितनी अच्छी थी, कितने घंटे की, और नींद में क्या पैटर्न रहा सब ट्रैक करती हैं। ऐप्स नींद सुधारने के लिए सुझाव भी देती हैं, जिससे थकान और नींद की समस्या कम होती है।

वर्कआउट और योगा ऐप्स : इन ऐप्स में घर पर करने लायक वर्कआउट, योगा, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, कार्डिओ और स्ट्रेचिंग के वीडियो मिलते हैं। इसमें सही फॉर्म भी दिखाते हैं ताकि चोट न लगे।

health monitoring devices
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अब महिलाएं घर पर ही कई तरह की स्वास्थ्य की जांच आसानी से कर सकती हैं, जिससे रोजाना अपनी सेहत पर नजर रखना बहुत आसान हो गया है।

स्मार्ट बीपी मॉनिटर: स्मार्ट बीपी मॉनिटर ब्लड प्रेशर मापता है और उसका डेटा सीधे फोन में सेव कर देता है। इससे बीपी की मॉनिटरिंग घर बैठे ही हो जाती है।

फिटनेस ट्रैकर बैंड: यह दिनभर में उठाए गतिविधियों का स्तर बताता है। इससे महिलाएं आसानी से जान पाती हैं कि वे रोजाना कितनी सक्रिय हैं।

पानी पीने की ट्रैकिंग: यह फीचर आपके प्रतिदिन पानी पीने की मात्रा को ट्रैक करता है। अगर आप अक्सर भूल जाते हैं कि कितनी पानी पी चुके हैं, तो यह आपको याद दिलाता है।

स्मार्ट वॉच: यह सिर्फ समय नहीं दिखाती, बल्कि दिल की धड़कन, ऑक्सीजन लेवल, नींद की गुणवत्ता और मासिक धर्म चक्र जैसी जानकारी भी देती है।

smart watch
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पल्स ऑक्सीमीटर: कुछ हाई‑एंड फिटनेस ट्रैकर्स में एसपीओ 2 सेंसर होता है, जो आपके खून में ऑक्सीजन का स्तर मापता है।

स्मार्ट थर्मामीटर: यह तापमान जल्दी मापता है और उसका रिकॉर्ड फोन में सेव कर देता है। बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल में यह बहुत मददगार है।

ग्लूकोमीटर: ग्लूकोमीटर घर पर ही शुगर लेवल माप देता है। यह खासतौर पर उन महिलाओं के लिए उपयोगी है जिन्हें डायबिटीज है।

कामकाजी महिलाओं के पास समय कम होता है, इसलिए वे अपनी सेहत का ध्यान रखने के लिए स्मार्टवॉच, फिटनेस ट्रैकर, योगा या वर्कआउट ऐप और हेल्थ रिमाइंडर जैसे तकनीक का इस्तेमाल करती हैं। इनकी मदद से वे व्यस्त जीवनशैली के बीच ही अपने कदम गिन सकती हैं।

How do women manage data privacy in digital health?
How do women manage data privacy in digital health?

1. सबसे पहले, किसी भी ऐप को इस्तेमाल करने से पहले उसकी प्राइवेसी पॉलिसी एक बार देख लें, ताकि पता रहे कि आपका डेटा कहां और कैसे इस्तेमाल होगा।
2.. हर ऐप के लिए हमेशा अलग-अलग पासवर्ड रखें और अगर हो सके तो टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन भी चालू करें। इससे कोई भी आपके अकाउंट में आसानी से घुस नहीं पाएगा।
3. अपनी ऐप को सिर्फ वही परमिशन दें जिसकी जरूरत हो। अगर ऐप बिना लोकेशन या कैमरा के भी काम कर सकता है, तो ये परमिशन देने की जरूरत नहीं होती।
4. अपने फोन और सभी ऐप्स को समय-समय पर अपडेट करते रहें। अपडेट से आपका फोन ज्यादा सुरक्षित रहता है और डेटा चोरी होने का खतरा भी कम हो जाता है।

स्वाति कुमारी एक अनुभवी डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं, जो वर्तमान में गृहलक्ष्मी में फ्रीलांसर के रूप में काम कर रही हैं। चार वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली स्वाति को खासतौर पर लाइफस्टाइल विषयों पर लेखन में दक्षता हासिल है। खाली समय...