'टीचर्स डे' के मौके पर देखें गुरु की छवि को दिखातीं ये सीरीज: Teacher’s Day Series
Teacher’s Day Series

Teacher’s Day Series: टीचर्स का स्‍टूडेंट्स के जीवन में काफी महत्‍वपूर्ण योगदान होता है। ये एक ऐसा प्रोफेशन है जिसमें टीचर्स को वो पहचान तो नहीं मिलती जिसके वो हकदार हैं। लेकिन उनके मार्गदर्शन से न जाने कितने लोग दुनिया में अपना नाम कमा लेते हैं। आप लोगों को भी शायद कभी कोई ऐसा टीचर मिला हो अपनी जिंदगी में। आजकल जब शिक्षा भी एक व्‍यवसाय बन गया है। तो ऐसे में वो गुरु बहुत ही कम मिल पाते हैं जो स्‍टूडेंट्स की भलाई को अपना पहला कर्तव्‍य मानते हैं। शिक्षा को व्‍यवसाय बनाने वाले इस दौर में ओटीटी पर कुछ ऐसी सीरीज मौजूद हैं जिसमें टीचर्स स्‍टूडेंट को पढ़ाने के अलावा उनकी निजी समस्‍याओं से जुड़कर उन्‍हें पढ़ाई पर फोकस करने में मदद करते हैं। इस टीचर्स डे के मौके पर इन सीरीज को देख आप अपने उन टीचर्स की यादें ताजा कर सकते हैं जिन्‍होंने कभी आपको शिक्षा के साथ आपके जीवन को छुआ। आइए बताते हैं कुछ ऐसे ही टीचर्स की कहानियों वाली सीरीज के बारे में।

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इस सीरीज को शायद आपने देखा हो या हो सकता है अब तक आप इसे देख न पाएं हों। इस सीरीज में मुख्‍यत: इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए कोटा जाने वाले स्‍टूडेंट और उनकी समस्‍याओं के बारे में दिखाया गया है। लेकिन आज हम इसके दूसरे पहलू पर बात करते हैं। जी हां एक ऐसा टीचर जो स्‍टूडेंट के लिए सर नहीं भइया बनकर उस शहर में मशहूर होता है। ‘जीतू भइया’ इस सीरीज में वो टीचर बने हैं जो स्‍टूडेंट की पढ़ाई के साथ साथ उन्‍हें निजी जीवन में भी गाइड करते हैं। जिससे घर से दूर रहने वाले स्‍टूडेंट्स को किसी अपने के साथ होने का अहसास हो सके। यही नहीं वे कोचिंग को धंधा बनाकर चलाने वालों के बीच इसे बिजनेस बनने से रोकने का भी प्रयास करते हैं। एक ऐसा टीचर जो इस बात के लिए भी अडिग है कि पढ़ने में तेज बच्‍चों पर ज्‍यादा फोकस करने के बजाय एवरेज स्‍टूडेंट्स को ज्‍यादा मदद करनी चाहिए। इस सीरीज के तीन पार्ट्स आ चुके हैं। ये सीरीज अपने जीतू भइया वाले किरदार की वजह से दर्शकों के दिलों में बस गई है। तो अब तक अगर आपने ये सीरीज नहीं देखी है तो इसे नेटफ्लिस पर देख सकते हैं।। इस सीरीज से टीचर्स को भी कुछ प्रेरणा लेने की जरूरत है कि किस तरह अपने सभी स्‍टूडेंट्स पर बराबर का ध्‍यान देकर उन्‍हें एक समान बनने में मदद करें।

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ये कहानी है असल जिंदगी में स्‍टूडेंट्स के हीरो बनने वाले एक आम आदमी की। अमेजन मिनी टीवी पर फिजिक्‍स वाला नाम से मौजूद सीरीज अलख पांडे की असली कहानी पर आधारित है। उन्‍होंने कैसे अपने जीवन में पढ़ाने का निर्णय ले स्‍टूडेंट्स की मदद करने का निर्णय लिया। करोडों की सैलरी का ऑफर छोड़ उन्‍होंने कोचिंग के व्‍यवसाय के लोगों के खिलाफ खडे होने की हिम्‍मत की। पढाने के अपने जुनून के चलते कम पैसे और फ्री में पढाने की कोशिश में उन्‍हें किसी ने सीरियस नहीं लिया। ऐसे स्‍टूडेंट्स जो कोचिंग के लिए पैसे नहीं जुटा सकते उनको ध्‍यान में रखते हुए अपने काम की शुरूआत की। स्‍टूडेंट्स के लिए सुविधा लाने वाले इस टीचर की जर्नी को आप अमेजन मिनी टीवी पर देख सकते हैं।

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हमारी जिंदगी में कई बार हमारे कुछ संगी साथी या सीनियर उस टीचर की भूमिका निभाते हैं जो हमें लक्ष्‍य तक पहुंचने में मदद करते हैं। टीवीएफ की ‘संदीप भइया’ सीरीज भी एक ऐसे ही किरदार की कहानी है। ‘एस्‍पीरेंट’ सीरीज में संदीप भइया जो कि यूपीएससी की कई सालों से तैयारी कर रहे थे। अपने यूपीएससी के अटैम्‍प्‍ट में सफल नहीं हो पाते लेकिन उनके गाइडेंस से एक जूनियर को मदद मिलती है। उन्‍हीं की आगे की कहानी को ‘संदीप भइया’ में दिखाया गया है। कैसे खुद की तैयारी के साथ वो एक कोचिंग में पेपर चेक कर स्‍टूडेंट्स को तैयारी करने में मदद करते हैं। कोचिंग से तो उन्‍हें उसकी फीस मिलती है। लेकिन एक टिफिन सर्विस चलाने वाली लड़की की प्रतिभा पहचान कर वे उसकी मदद करते हैं। उसे उसके लक्ष्‍य तक पहुंचने के लिए तैयार करते हैं। इस सीरीज को देखकर शायद आपको अपने जीवन के किसी ऐसे भइया या सीनियर की याद आ जाए। इस सीरीज को आप यूट्यूब पर देख सकते हैं।

निशा सिंह एक पत्रकार और लेखक हैं, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिलेमें हुआ। दिल्‍ली और जयपुर में सीएनबीसी, टाइस ऑफ इंडिया और दैनिक भास्‍कर जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्‍थानों के साथ काम करने के साथ-साथ लिखने के शौक को हमेशा जिंदा...