धरा अम्बर का मिलन-गृहलक्ष्मी की कविता
Dhara Ambar ka Milan

Hindi Poem: दूर क्षितिज पर व्योम को देखो,
कैसे वसुधा को महका रहा।
अपने प्रेम के आगोश की माला,
मांँ अचला को पहना रहा।

हरी भरी धरा भी देखो,
गगन पर प्रेम बरसा रही।
अपने नेह प्रेम की माला,
वो अम्बर को पहना रही।

हम सभी भी बने साक्षी,
इस मधुर मिलन के संग की।
जो मिलकर भी रहते हैं जुदा,
बस बर्षा करें अपने बच्चों पर,
ममता और दुलार की।

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