भला हो सरकार का, सस्ते होने के कारण घर की रजिस्ट्री मेरे नाम, बिजली का मीटर मेरे नाम, बैंक ने गाड़ी के लिए कर्ज दिया तो गाड़ी मेरे नाम।
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दादी की दीदीनुमा हसरत और हरकत – गृहलक्ष्मी कहानियां
पड़ोस वाले घर की दादीजी आजकल नेताओं के मिजाज की मानिंद बदली-बदली सी नजर आ रही हैं। यूं तो जब से उन्हें जाना है, उम्र से दस वर्ष पीछे मगर समय से दस साल आगे की वेशभूषा में नजर आती रही हैं। अभी पिछले ही हफ्ते की बात है। वे गोपगप्पे वाले को अपने दरवाजे […]
अमूल्य योग्यता – गृहलक्ष्मी कहानियां
वाराणसी, औरंगाबाद की दस वर्षीय वैष्णवी की कलम से लिखी इस कहानी में हर उम्र के लोगों के लिए एक सीख छुपी है, पढ़िए-
दो चिडिय़ा – गृहलक्ष्मी कहानियां
इस स्तंभ के अंतर्गत 12 वर्ष तक की उम्र के बच्चे अपनी कोई भी कविता, कहानी, पेंटिंग व बचपन की रचनात्मक फोटो या अपने मन की कोई और बात अभिव्यक्त करना चाहते हैं तो हमें लिख भेजें, नाम, उम्र, पता व फोटो के साथ। आपकी कृति कहीं से नकल की गई ना हो, इस बात का खास ख्याल रखें। चुनी गई तीन प्रविष्ठियों को मिलेगा आकर्षक उपहार।
बस, अब और नहीं – गृहलक्ष्मी कहानियां
नटखट और चुलबुली तश्शू कैसे एक राजनेता बनी और कैसे उसने निर्णय लिया अपने पति से अलग होने का… पेश है, भावनाओं के सूत्र में पिरोई गई एक विशेष कहानी।
अथ पति व्यथा कथा – गृहलक्ष्मी कहानियां
पति के दुखों को देखकर तो कई बार पहाड़ तक रोने लगते हैं। पति अगर साधारण बना रहे तो बीबी का नौकर लगता है और बनने ठनने लगे तो पत्नी उस पर शक करने लगती है।
बिंदास लेखन – गृहलक्ष्मी कहानियां
अभी पढ़ते-पढ़ते एक विचार मन में आया कि क्यों न मैं भी टॉप-जींस पहनकर लिखूं। शायद लिखने की गति बदल जाए और लेखन में कुछ कड़कपन आ जाए। मतलब थोड़ी फास्ट, समयानुसार रचा-सजा, हाई हील पहने, कंधे पर बैग लटकाए, कान से मोबाइल चिपकाए, आंखों पर गोगल चढ़ाए एकदम बिंदास।
