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आओ लौटें गाँव की ओर —गृहलक्ष्मी की लघु कहानी
Aao Laute Gaon ki aur-Grehlakshmi ki Kahaniyan

गृहलक्ष्मी की लघु कहानी: रमाशंकर और दयाशंकर दो भाई थे। दोनों कृषि कार्य करके अपनी घर गृहस्थी चलाते थे।विवाह के उपरांत रमाशंकर की पत्नी ने कहा कि “कृषि कार्य में लाभ नहीं मिलता है, अतः हमें शहर में कुछ नया व्यवसाय शुरू करना चाहिए”।दयाशंकर ने अपने भाई को बहुत समझाया कि अपना पैतृक गाँव और कृषि छोड़कर न जाये किंतु रमाशंकर की आँखों पर स्वार्थ की पट्टी बंध चुकी थी। उसे लाभ कमाने और बड़ा व्यवसायी बनने की सूझ रही थी। उसने शहर में अपना कपड़ों का व्यवसाय प्रारंभ कर दिया धीरे-धीरे व्यवसाय अच्छा चल निकला ,कुछ आर्थिक सहायता जो रिश्तेदारों से ली थी, वह उन्हें लौटा दी। इसके बाद उसने अपने लिए एक सुंदर घर बनवाया। तथा गाँव में आना-जाना छोड़ दिया। एक बार गाँव में आकर उसने पिताजी का आम का बाग, जो उसके नाम पर था उसे भी कटवाने का निर्णय लिया। दयाशंकर ने उसे बहुत समझाया कि हरे-भरे वृक्षों को काटना सही नहीं है, किंतु भावनात्मक पक्ष आर्थिक पक्ष पर भारी पड़ा और रमाशंकर ने सारा बाग उजाड़ दिया।
वहीं दयाशंकर मन लगाकर कृषि कार्य करता रहा और जो कुछ धन अर्जित होता उससे ही कुटुंब का भरण-पोषण करता था। उसे बागवानी के प्रति अत्यधिक रुझान था,अतः वह हरे— भरे पौधे लगाता रहता था। उसने अपने घर के आस-पास नीम, जामुन, जैसे सुंदर वृक्ष लगाए। एक गुलमोहर का बड़ा सा पेड़ घर के आँगन में लहरा रहा था। जब उस वृक्ष पर लाल फूल आते तो वह गुलदस्ता जैसा दिखाई देता था। उसका घर प्राकृतिक सुंदरता से आच्छादित हो गया था। देखते ही देखते देश में कोरोनावायरस नामक महामारी फैली, शहर के व्यक्ति शहर से पलायन करके गाँव में आकर बसने लगे। मृत्यु के भय ने सभी को गाँव की ओर लौटा दिया। रमाशंकर को साँस लेने में परेशानी का अनुभव होने लगा, उसे डॉक्टर ने शुद्ध हवा लेने के लिए कहा।


चिकित्सक के परामर्श पर रमाशंकर सोचने लगा कि “काश उसने अपने गाँव की खेती और घर बेचकर मोटा मुनाफा नहीं कमाया होता, तो आज वह भी बीमारी के इस समय में गाँव में जाकर आश्रय प्राप्त कर लेता। जब दयाशंकर को अपने भाई की बीमारी के बारे में पता चला, तो वह शहर गया, और परिवार सहित दयाशंकर को अपने घर ले आया। दयाशंकर के घर की प्राकृतिक छटा, सौम्य वातावरण और स्वच्छ हवा से धीरे-धीरे रमाशंकर की बीमारी ठीक होने लगी। अब रमाशंकर को यह आभास होने लगा कि “हमें वृक्षों का काटना नहीं चाहिए, अपितु प्रकृति का संरक्षण करने हेतु पौधारोपण करना चाहिए ताकि समय आने पर हमें पर्याप्त मात्रा में शुद्ध वायु प्राप्त हो सके और पर्यावरण संतुलित रह सके।
आज रमाशंकर ने अपने शहर के घर को बेचकर एक बहुत बड़ा पार्क बनवाया है, जिसमें घने और छायादार वृक्ष लगाए गए हैं। जो समय आने पर लोगों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन तथा शुद्ध वायु प्रदान करेंगे।

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