Kartik Aryan and Ananya Panday's 'Tu Meri Main Tera' fails to impress, lacking both strong story and acting.

Summary: क्या देखने लायक है कार्तिक आर्यन और अनन्या पांडे की 'तू मेरी मैं तेरा' फिल्म

क्रिसमस के मौके पर रिलीज़ हुई कार्तिक आर्यन और अनन्या पांडे की फिल्म ‘तू मेरी मैं तेरा’ को लेकर दर्शकों की उम्मीदें काफी थी। लेकिन फिल्म देखने के बाद कई लोगों को लगा कि कहानी और एक्टिंग दोनों में वह जादू नहीं दिखा, जिसकी तलाश थी।

Tu Meri Main Tera Movie Review: आज क्रिसमस के साथ ही लॉन्ग वीकेंड की शुरुआत हो गई है और कई लोगों की छुट्टियां भी हैं। ऐसे में लोग अपनी छुट्टियों का पूरा मज़ा लेने के लिए फैमिली और दोस्तों के साथ मूवी डेट जरूर प्लान करते हैं। अगर आप भी कुछ नया देखने का मन बना रहे हैं लेकिन यह नहीं समझ पा रहे कि कौन सी मूवी देखें, तो क्रिसमस के मौके पर कार्तिक आर्यन और अनन्या पांडे की फिल्म ‘तू मेरी मैं तेरा’ सिनेमाघरों में रिलीज़ हो चुकी है। अब आप सोच रहे होंगे कि यह फिल्म कैसी है और क्या यह पैसे वसूल करने लायक है या नहीं। तो चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि आज हम आपको बताएंगे कि यह फिल्म आपको देखनी चाहिए या नहीं, और फिल्म की कहानी किस तरह की है। तो चलिए जानते हैं फिल्म का रिव्यू।

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कार्तिक आर्यन और अनन्या पांडे की यह फिल्म एक हल्की-फुल्की रोमांटिक ड्रामा के रूप में शुरू होती है। कार्तिक रे के किरदार में हैं, जो अमेरिका में रहता है, जबकि अनन्या रूमी की भूमिका में हैं, जो आगरा की रहने वाली है। दोनों की मुलाकात क्रोएशिया की खूबसूरत लोकेशंस में होती है और उनकी दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल जाती है। फिल्म का पहला हिस्सा पूरी तरह रोमांस, घूमने-फिरने और संगीत के जादू पर केंद्रित है। सीन्स खूबसूरत हैं और संगीत दिल को भाता है, लेकिन कहानी में कोई बड़ी नई बात नहीं है।

इस फ़िल्म की कहानी में मोड़ तब आता है जब शादी की बात सामने आती है। रूमी अपने पिता, जो एक फौजी हैं, को अकेला छोड़कर अमेरिका जाने से इनकार करती है, वहीं रे अपनी मां की इच्छा के अनुसार भारतीय बहू चाहता है। माता-पिता की जिम्मेदारी और व्यक्तिगत प्यार के बीच का यह टकराव फिल्म की मुख्य कहानी बनता है। अफसोस की बात यह है कि फिल्म इस अनबन को बहुत सीधे तरीके से पेश करती है। इसे देखकर हर दर्शक को यही एहसास होगा कि “अरे, यह सीन तो हमने पहले भी देखा है।”

अनन्या पांडे ने कई मौकों पर अपने किरदार में जज़्बात दिखाने की कोशिश की है, और कुछ सीन में यह सच में काम कर जाता है। लेकिन कई जगह उनका अभिनय थोड़ा ज़्यादा भारी लगता है, खासकर इमोशनल सीन में, जिससे वो स्वाभाविक नहीं लगते। कार्तिक आर्यन इस रोल में पूरी तरह फिट नहीं दिखे। कई बार उनका एक्सप्रेशन ओवरएक्टिंग जैसा लग जाता है और उनकी कॉन्फिडेंस वाली परफॉर्मेंस कभी-कभी स्क्रीन पर भारी पड़ती है। दोनों की रोमांटिक केमिस्ट्री भी उतनी असरदार नहीं है कि कहानी में दिलचस्पी बनाए रखे। जैकी श्रॉफ और नीना गुप्ता ने अपने किरदारों में वही पुराना अंदाज़ निभाया है।

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समीर विद्वांस ने फिल्म को अच्छे अंदाज में पेश किया है, लेकिन कहानी में वह पकड़ नहीं बना पाते। फिल्म का पहला हिस्सा लाइट हार्टेड कॉमेडी और रोमांटिक है, लेकिन जैसे ही कहानी सीरियस होती है, चीजें अटपटी लगती है। म्यूजिक की बात करें तो विशाल-शेखर का काम फिल्म को थोड़ी जान देता है। टाइटल ट्रैक और ‘हम दोनों’ जैसे गाने मज़ेदार हैं, जबकि शादी वाले सीन्स में पुराने हिंदी गाने माहौल तो बनाते हैं, लेकिन ज्यादा असर नहीं छोड़ पाते।

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसके लोकेशन और विज़ुअल प्रेज़ेंटेशन में दिखती है। क्रोएशिया और आगरा की लोकेशन में फिल्माए गए सीन सच में आंखों को भाते हैं। लेकिन कहानी का कमजोर होना फिल्म का सबसे बड़ा नेगेटिव प्वाइंट पहलू है।

यदि आप खूबसूरत लोकेशंस और रोमांटिक गानों का आनंद लेना चाहते हैं, तो यह फिल्म देखी जा सकती है। लेकिन कहानी में कुछ नया और रोमांचक खोज रहे हैं, तो यह वही पुराना फॉर्मूला लगेगा।

स्वाति कुमारी एक अनुभवी डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं, जो वर्तमान में गृहलक्ष्मी में फ्रीलांसर के रूप में काम कर रही हैं। चार वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली स्वाति को खासतौर पर लाइफस्टाइल विषयों पर लेखन में दक्षता हासिल है। खाली समय...