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मायामृग—गृहलक्ष्मी की कहानियां
Mayamrig-Grehlakshmi Story

नित्या अपनी सखी के विवाह समारोह में सम्मिलित होने उसके घर आयी थी ।
घर में बेटी के विवाह के कारण,
सभी के मुख पर मुस्कुराहट और आनंद का भाव फैला हुआ था।
ऐसे किसी विशेष अवसर पर ही दूर -पास के सम्बन्धी एकत्र होते हैं , तब बातों का सिलसिला एकबार प्रारम्भ हो जाए तो ,रोके नहीं रुकता ।
वहाँ भी सब लोग स्वादिष्ट व्यंजनों और बातों के चटखारे में व्यस्त थे ।

लेकिन , फ़रवरी माह की उस सुखद सुबह में , नित्या को , अल्हड़ हवा का कोई झोंका , यहाँ से वहाँ डोलता ,
एक सुगंध ,विवाह के पकवानों से अलग ,

एक पदचाप, व्यस्तता भरी हलचल से तीव्र

और एक प्रफुल्लता ,मेहमानों की सम्मिलित हँसी से अधिक गुंजायमान प्रतीत हो रही थी ।

यह अनीता थी !

विवाह के मस्त वातावरण से अलग पन्द्रह वर्षीया अनीता, घर के बाहर लगे एक पेड़ के पास खड़ी थी।

नित्या की दृष्टि अनीता पर गयी, उसने –
लम्बा छरहरा शरीर, गोरा दपदपाता रंग, तीखे नयन नक्श की स्वामिनी अनीता के मुख पर सौम्यता का अभाव देखा ।
असमय ,अकारणीय अभिमान से मुख पर रुक्षता आ गयी हो , उसे ध्यान से देखने पर ,नित्या को ऐसा प्रतीत हुआ ।
कुछ संदेह से भरा ,उसका ह्रदय बार-बार सोचता – यह लड़की सबके बीच क्यों नहीं बैठती है ?
अनीता को ढोलक बजाती या एक ही स्थान पर खड़ी हो ,हाथ हिला-हिला कर नाचती ,अधेड़ महिलाओं में रुचि न हो , यह समझा जा सकता था ।

लेकिन अपनी चचेरी-मौसेरी बहन और भाभियों के प्रति भी उसमें कोई लगाव दिखाई नहीं दे रहा था।

अपने आप को एक विशेष व्यक्तित्व में ढालने को तत्पर वह , इन सब से दूरी बना कर खड़ी थी ।

घर में बहिन और भाभियों ने भी अपना मूंह टेढ़ा कर , उसके प्रति अवहेलना दिखानी प्रारम्भ कर दी। यह बात, अनीता का पीछा करती, नित्या की जिज्ञासु दृष्टि ने भांप लिया था ।
विवाह स्थल घर से दूर था। इसलिए भोजन समय से पूर्व करके , पुरुष और युवा लड़के वहाँ का प्रबंध देखने घर से निकल गए ।
घर में बच्चे, महिलाएँ और बूढ़े भोजन कर रहे थे , तब नित्या ने , अनीता को किसी से हँस हँस कर बात करते देखा ।
वह रत्नाकर था ।
अनीता बाहर पेड़ के पास खड़ी , उसी की प्रतीक्षा कर रही थी ।
अपनी सखी रोशनी के पास बैठी नित्या की दृष्टि बार—बार , कमरे के दरवाज़े को लांघ कर बाहर पहुँच जाती।
वहाँ कमरे में, अनीता की माँ भी बैठी थीं।
उन्होंने हर बार नित्या की दृष्टि का अनुसरण किया ।

उसकी उत्सुकता को शान्त करने के लिए वह
अपने स्थान से उठकर , नित्या के पास आ बैठीं और बोलीं – रत्नाकर फोटोग्राफर है ,हमारी अनीता के फोटो नेट पर बहुत पसंद किए जाते हैं। आज वो यहाँ उसके डांस की शूटिंग करने आया है ।
नित्या ने घोर आश्चर्य से भर कर कहा – क्या मतलब ?

अनीता की माँ मुंह पर आँचल दबा कर हँसी – तुम जानो न हो क्या ? हमारी अनीता के डांस की फ़ोटो यू ट्यूब पर खूब वायरल हो रही हैं ।
निश्चय ही यह बात बड़े गर्व के साथ कही गई थी .

पर नित्या के मन में संदेह का एक अंकुर और फूटा ।
उसने सोचा – निपट गांव देहात की लड़की ने ,कम आयु में ऐसी लम्बी छलांग कैसे लगायी ?

प्रत्यक्ष में कहा – ध्यान रखो , आपकी बेटी बहुत छोटी है .
अनीता की माँ ने कहा – शौक -शौक़ की बात है । बच्चे का रुझान जिधर हो वहीं जाना चाहिए ।
नित्या ने ध्यान से अनीता की माँ की ओर देखा , वह कृषक परिवार की , पुष्ट शरीर वाली ,परिश्रमी घरेलू महिला थीं । उनका जीवन चूल्हे-चौके , ढोर-डंगर , गोदाम में भरे अनाज की देखभाल में ही व्यतीत होता लग रहा था ।

नित्या ने मनन किया ,
क्या उन्हें यह ज्ञान रत्नाकर से मिला ?

रत्नाकर उसके साथी किसी अच्छे उद्देश्य से कार्य करने वाले युवक ,प्रतीत नहीं हो रहे थे । यह बात अलग थी , उस समय वह बड़ी गम्भीरता से , अनीता के परिवार को अपने प्रभाव में लाने सफल हो चुके थे ।
नित्या चाह रही थी कि रत्नाकर के विषय में स्पष्ट रूप से बात करे , लेकिन विवाह के घर का उत्साह और प्रसन्नता भरा वातावरण देखकर अप्रिय सत्य बोलने से रुक गयी ।

फिर भी ध्यान बार-बार आस पास की फुसफुसाहटों से भटकता –

अनीता ! गुड़गांव वाले जीजाजी के पास बैठी है ।
अनीता ! ने सुबह से चार बार ड्रेस बदली है ।
अनीता ! रत्नाकर से फोटो खिंचवा रही है ।
अनीता ! नेल पॉलिश लगा रही है ।
अनीता ! के सुनहरे बाल हवा में उड़ रहे हैं ।
अनीता ! के माँ बाप अति प्रसन्न हैं ।
अनीता – अनीता -अनीता – अनीता ।

रोशनी के हाथों में मेहंदी लग चुकी थी ,इसलिए वह कमरे में , दीवार के सहारे बैठी थी ।

नित्या भी उसके पास जा बैठी ।

समय मिलने पर उसने धीरे से कहा -सुन रोशनी ! क्या अनीता ने डांस का विधिवत प्रशिक्षण लिया है ?
रोशनी बोली – नहीं , पढ़ाई में मन लगता नहीं है ,पता नहीं किस चक्कर में फस गयी है ।
नित्या बोली – हाँ , मुझे भी ऐसा लग रहा है .
रोशनी बोली – मामा की बेटी है इसलिए चुप रहती हूँ ।
कभी गाँव से बाहर काम धंधा करने निकले नहीं , अब टीवी और नेट की दुनिया को सारी दुनिया का सच समझ रहे हैं ।

उन दोनों के वार्तालाप में विघ्न पड़ा ।

दो लड़के कमरे में प्रविष्ट होकर , वहाँ बैठी महिलाओं और लड़कियों से बोले – आप सब भी सीन में हैं, बाहर आ जाइए ।
एक लड़की ने तमक कर कहा -हमें नहीं आना वीडियो में।
दो युवा स्त्री , सिर का पल्लू ठीक करते हुए ,असहमति जता कर ,दूसरे कमरे में चली गयीं ।
बस दो चार अधेड़ महिला , आनंदित होती हुई , लड़कों के साथ बाहर निकल गयी ।
मानो वह भी नए जमाने के रंग ढंग में मग्न होना चाह रही थी ।
अनीता के नाच की वीडियोग्राफी शुरू हो गयी ।

ग्रामीण परिवेश में। , ढोलक ठुनकाती महिलाएं ,
हाथ में हुक्के की नली पकड़े , खाट पर बैठे , बाबाजी।

घर की चारदीवारी की मुँडेर पर बैठे बालक ।
मोटर साइकिल का सहारा लेकर खड़े , युवा लड़के ।

यह सब नाच के दृश्य में बीच बीच में दिखाया जाने वाला ग्रामीण पृष्ठभूमि का सैट था ।

इस सब का निरीक्षण करके रत्नाकर ने कहा –
ओके !
अनीता नाचने लगी – मेरी पतली कमरिया बल खाए !

पन्द्रह वर्षीया अनीता , यूट्यूब पर कितने लाइक्स बटोरेगी ?

किस किस को इससे लाभ मिलेगा ?
अनीता का भविष्य क्या है ?
किन राहों से निकल कर , वह अपनी मंज़िल पाएगी ?
क्या सच में उसे अपनी मंज़िल का पता मालूम है ?
ऐसे बहुत से प्रश्न नित्या के मस्तिष्क में घूम रहे थे।
उसे अपना कॉलेज समय याद आने लगा ।
कॉलेज में भी ऐसे बहुत से विद्यार्थी थे जो अपने भविष्य के प्रति उदासीन रहते हुए , उद्दंड हो गए थे ।
प्रेम में डूबी लड़कियों की भावुकता देखी
उन्मुक्त जीवन जीने की आकांक्षी कुछ लड़कियों की कामुकता भी देखी ।
फिर भी वह सब शिक्षा के नाम पर डिग्रियाँ बटोर तो रहे ही थे । यह डिग्रियाँ , कभी न कभी जीवन में गंभीरता से खड़े होने का आधार बनी होंगी ।

यूट्यूब पर कमर मटकाती अनीता का आधार क्या है ?

नित्या की गंभीर मुख मुद्रा देख कर उसकी सखी ने पूछा – तू किस सोच में डूब गयी ?
नित्या बोली -मैं अनीता के विषय में सोच रही हूँ , उसने और रत्नाकर ने किस चतुराई से आज का यह समय चुना है ।
रोशनी बोली – हाँ ,मैं भी यह सोच रही हूँ . लेकिन कोई प्रतिवाद नहीं कर सकती । मामा -मामी को हमारी बात ईर्ष्या भरी लगती है । उन्हें लगता है , मैं तो पढ़ कर शहर में जॉब करने निकल गयी लेकिन हम अनीता को आगे बढ़ना नहीं देना चाहते ।
नित्या ने पूछा -आगे कहाँ बढ़ेगी ?
रोशनी ने व्यंग्य किया – उन्हें लगता है ,इस समय कम पैसों में काम करने वाली उनकी खूबसूरत लड़की कल
शायद फ़िल्म करने लगे । यह भी नहीं तो , टीवी सीरियल मिल ही जाएँगे । मुझे डर लगता है , अनुभव हीन यह लड़की किसी अनहोने कांड की हीरोइन न बन जाए ।
इस बिन्दु पर आकर , दोनों के मूंह से एक गहरा निःश्वास निकला । बात ठहर गयी ।
दोनों सखियां उदास दृष्टि से बाहर की ओर देखने लगीं ।
वहाँ अनीता एक नायिका की तरह ठुमक रही थी ।
घर में उपस्थित सब अतिथि , उस नृत्य का आनंद उठा रहे थे ।
कहीं , कोई आपत्ति नहीं , कोई विरोध नहीं।
उस समय , ग्रामीण परिवेश के साधारण परिवार के मन में संस्कार , जीवन मूल्य जैसे गंभीर विचार नहीं उठ रहे थे ।
वहाँ सब रोशनी नाम की लड़की के विवाह उत्सव में सम्मिलित होने आए थे ।
पर वह दिन अनीता के नाम हो गया ।
नित्या सोच रही थी –
एक मायामृग बड़े शहरों से छोटे शहर , कस्बे – गांव में छलांग लगाता चौकड़ी भर रहा है ।
जाने किस किस को छलेगा !

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