जयद्रथ-प्रसंग के बाद पांडव काम्यक वन छोड़कर द्वैतवन में चले गए और वहीं अपने दिन बिताने लगे। एक दिन युधिष्ठिर के पास एक ब्राह्मण आकर बोला‒हे राजन! मैं निकट के वन में रहता हूं और आपसे सहायता लेने आया हूं। मैंने यज्ञाग्नि उत्पन्न करने वाली अरणी और मथनी पेड़ पर टांग रखी थीं। अचानक एक […]
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शाप बना वरदान – महाभारत
अर्जुन ने भगवान शिव से पाशुपत अस्त्र प्राप्त कर लिया। इसलिए अपने वचन के अनुसार इंद्र उन्हें दिव्यास्त्र देने के लिए स्वर्ग ले गए। वहां देवताओं ने उनका स्वागत किया। अर्जुन को सभी दिव्यास्त्र मिल चुके थे, इसलिए उन्होंने लौटने का विचार किया, परंतु इंद्र ने उन्हें स्वर्ग में कुछ दिन और रहने के लिए […]
अर्जुन की परीक्षा – महाभारत
एक बार महर्षि व्यास पांडवों से मिलने आए। वे त्रिकालदर्शी थे। उन्होंने पांडवों से कहा- “पुत्रों ! मनुष्य के जीवन में सुख-दुःख का आना-जाना लगा रहता है। विधि का यही विधान है। मुझे स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि तेरह वर्ष बाद जब तुम वनवास पूरा करोगे, तब कौरवों के साथ तुम्हारा भीषण युद्ध होगा। […]
अन्न का एक दाना – महाभारत
पांडवों ने महर्षि धौम्य को अपना कुल-पुरोहित बनाया था। इसलिए जब उन्हें पांडवों की वनवास-यात्रा के विषय में पता चला तो वे वन में उनके निकट ही कुटिया बनाकर रहने लगे। एक दिन युधिष्ठिर ने उनसे कहा- “महात्मन् ! अनेक ऋषि-मुनि और ब्राह्मणगण स्नेहवश हमारे साथ रह रहे हैं, परंतु मेरे समक्ष धर्मसंकट उत्पन्न हो […]
शिशुपाल-वध – महाभारत
श्रीकृष्ण की सुप्रभा नामक एक मौसी थी, जिसका विवाह चेदि देश के दमघोष के साथ हुआ था। विवाह के उपरांत सुप्रभा ने एक पुत्र को जन्म दिया। उसका नाम शिशुपाल रखा गया। साधारण बालकों की अपेक्षा शिशुपाल की चार भुजाएं और तीन नेत्र थे। उसका विचित्र रूप देखकर सुप्रभा और राजा दमघोष ने भयभीत होकर […]
अर्जुन को वनवास – महाभारत
युधिष्ठिर ने यह नियम बनाया था कि द्रौपदी एक-एक महीना प्रत्येक भाई के पास रहेगी और जब वह किसी भाई के साथ होगी तो दूसरा भाई उसके कक्ष में नहीं आएगा। इस नियम का उल्लंघन करने वाले को बारह वर्ष तक वन में निवास करना होगा। सभी भाई इस नियम का पालन करते थे। ऐसा […]
गांडीव और सुदर्शन – महाभारत
कुंती और पांडव जीवित हैं, यह समाचार चारों ओर फैल गया था। राजा द्रुपद आदरसहित उन्हें अपने महल में ले आए। हस्तिनापुर में भीष्म पितामह, विदुर, धृतराष्ट्र, दुर्योधन को भी यह सूचना प्राप्त हो चुकी थी। भीष्म पितामह के परामर्श से धृतराष्ट्र ने पांडवों को लाने के लिए विदुर को भेजा। विदुर बहुमूल्य उपहार लेकर […]
द्रौपदी का पूर्व जन्म – महाभारत
यह कथा द्रौपदी और पांडवों के जन्म से जुड़ी है, जो शापवश मनुष्य योनि में जन्मे। केतकी ने द्रौपदी, धर्मराज ने युधिष्ठिर, वायुदेव ने भीम, इंद्र ने अर्जुन तथा अश्विनी कुमारों ने नकुल एवं सहदेव के रूप में जन्म लिया। यह कथा इस प्रकार है- केतकी दक्ष प्रजापति की पुत्री थी। अपनी सुंदरता व सदाचार […]
मछली की आंख – महाभारत
पांडव एकचक्रा नगरी को छोड़कर किसी सुरक्षित स्थान की खोज में भटक रहे थे। तभी उनकी भेंट महर्षि व्यास से हुई। उन्होंने उन्हें पांचाल देश जाने का परामर्श दिया। कुंती ने भी पुत्रों से पांचाल चलने का आग्रह किया। अतः पांडव पांचाल की ओर चल पड़े। मार्ग में महर्षि धौम्य का आश्रम पड़ा। पांडवों ने […]
द्रौपदी का जन्म – महाभारत
पांचाल देश में परम पराक्रमी राजा पृषत राज्य करते थे। उनका एक पुत्र था, जिसका नाम द्रुपद था। राजा पृषत की महर्षि भारद्वाज के साथ मित्रता थी। इसलिए उन्होंने द्रुपद को शिक्षा-दीक्षा लेने के लिए उन्हीं के पास भेजा। वहीं महर्षि भारद्वाज के पुत्र द्रोण भी रहते थे। द्रुपद और द्रोण में गहरी मित्रता हो […]
