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Bharat Katha Mala
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भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

जगदीश इस नौगांव में वन विभाग के अधिकारी के रूप में एक साल से कार्यरत थे। प्रारंभ में तो उनका यहां दिल नहीं लगता था, पर धीरे-धीरे उन्हें यहां अच्छा लगने लगा। वह जब भी स्कूल की तरफ से निकलते अक्सर देखते एक छोटी-सी बिटिया अख़बार पर हल्दी, मिट्टी, गेरू और फूलों के रंगों से सीढ़ियां और पतंगे बना रही होती मानो आसमान छू लेना चाहती हो। जगदीश कहते- “बेटा क्या बना रही हो।” मीरा धीरे से जवाब देती- “नहीं पता बस रंग अच्छे लगते हैं।”

एक दिन 15 अगस्त पर स्वतंत्रता दिवस समारोह में जगदीश स्वयं ही ढेर सारी ड्राइंग फाइल और रंगों के डब्बे लेकर पहुंच गए। और बोले- “जो बच्चे अच्छी ड्राइंग करेंगे मैं हर महीने रंग और फाइल भी दूंगा।” बच्चों ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किया। उस दिन ही जगदीश को चित्र बनाने वाली बिटिया का नाम पता चला कि यह है मीरा।

उसने बहुत सुंदर राष्ट्रीय गीत सुनाया सभी को बहुत अच्छा लगा।

चार दिनों बाद जगदीश उधर से गुजर रहे थे। क्या देखते हैं मीरा तो आज भी अख़बार पर ही चित्र बना रही है। जगदीश ने पास जाकर पूछा – “बेटा आप की ड्राइंग फाइल कहां गई “मीरा ने बिना सिर उठाए बोला- “मुझसे एक गलती से फट गई।” जगदीश ने कहा- “कोई बात नहीं मैं आपको नई फाइल लाकर दूंगा।” जगदीश को मीरा का भोलापन बहुत अच्छा लगा।

जगदीश सुबह-सुबह सैर को निकल रहे थे अचानक उनके पैर ठहर गए। मीरा के घर से कुछ आवाजें आ रही थी। उनसे रहा नहीं गया और वह जल्दी-जल्दी मीरा के घर की ओर चल दिए। यह क्या वहां का नज़ारा देख कर उनको बहुत दुख हुआ। मीरा की मां बुरी तरह डंडे से मीरा को पीट रही थी साथ ही बोल रही थी- “तुझे चित्र बनाने का बहुत शौक है, आज बिल्कल स्कल नहीं जाएगी।” जगदीश ने जोर से बोला- “आप कैसी मां है क्या कोई इस तरह अपने बच्चे को मारता है।” मीरा की मां थोड़ी सहम गई फिर बोली- “बाबूजी आपको नहीं पता यह काम चोरी करती है और सारे दिन सीढ़ियों को रंगों से गंदा करती रहती है।” जगदीश ने गुस्से से कहा- “जो भी है पर यह बच्चा है और बच्चे को इस तरह मारना कानूनी अपराध है, अगर आपने दोबारा यह ग़लती की तो मैं स्वयं आपकी शिकायत चाइल्ड हेल्प लाइन पर कर दूंगा।

बालमन की कहानियां
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जगदीश को बहुत दुख हुआ कोई मां अपने ही बच्चे को इस तरह कैसे मार सकती है। बच्चे की कीमत कोई मुझसे पूछे अभी दो वर्ष पूर्व की ही तो बात है जगदीश शहर से बाहर था उसके घर में दुखद घटना घटी गैस सिलेंडर फटने से उसकी पत्नी और 12 साल के बेटे का निधन हो गया। यह भुलाना उसके लिए आसान नहीं था। पर जब से नौगांव में आया था मीरा में उसे अपना बच्चा दिखता था और वह अपना ग़म भूल जाता था। उसका दिल कर रहा था वह मीरा को गोद में उठा ले पर उसका कोई रिश्ता भी तो नहीं था। सोचते-सोचते वह कब मीरा के पिता राधे के पास खेत पर भी जा पहुंचा उसे स्वयं पता नहीं चला। मीरा के पिता ने उसे– “राम-राम बोला।” जगदीश बोला- “राधे अभी मैं तुम्हारे घर से ही आ रहा हूं, और मैं हैरान हूं कोई मां अपने बच्चे को इस तरह कैसे मार सकती है।” राधे हाथ जोड़कर जोर-जोर से रोने लगा और बोला- “बाबूजी मैं क्या करूं मीरा के पैदा होते ही इसकी मां का निधन हो गया। दूसरी शादी इसीलिए की थी कि मीरा को मां मिलेगी, इसको तो मां कहते हुए भी शर्म आती है।” जगदीश बोला- “अगर राधे तुम अनुमति दो तो मैं मीरा को गोद लेना चाहता हूं, पूरी कानूनी कार्यवाही के साथ। वह बहुत होशियार बिटिया है।” राधे बोला- “साहब मैं मीरा को बहुत प्यार करता हूं उसके लिए कुछ कर नहीं सकता अगर आप जैसा पिता उसे मिलेगा तो वह बहुत खुश रहेगी।”

मीरा को जगदीश ने हॉस्टल में पढ़ाई हेतु भेज दिया। मीरा पढ़ाई में बहुत होशियार थी सभी शिक्षकों की चहेती भी। एक चित्रकला प्रतियोगिता में उसने भाग लिया। अखबार में उसका रिजल्ट आया जगदीश बहुत खुश था। मीरा को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ था। खुशी की बात यह थी की पुरस्कार में एक लाख की धनराशि के साथ ही पुरस्कार राष्ट्रपति के हाथों मिलना था। जगदीश ने फोन पर मीरा को बधाई दी। जिस दिन पुरस्कार मिलना था। जगदीश ने गांव से उसके माता-पिता को भी बुला लिया। मीरा भी यह देखकर बहुत खुश थी। मीरा के माता-पिता भी आज मीरा पर गर्व महसूस कर रहे थे। मीरा की मां ने कहा- “बेटा मुझे माफ़ कर दो” मीरा मां के गले लग गई और बोली- “मां कभी बेटी से माफ़ी नहीं मांगती।” जगदीश सोच रहे थे मेरी छोटी-सी मीरा की सोच कितनी बड़ी है। कल तक चित्रों के माध्यम से आसमान पर पतंगे उड़ाती थी आज स्वयं आसमान पर उड़ रही है पर पैर आज भी ज़मीन पर ही है।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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