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Indra Nooyi
Lifestyle of Indra Nooyi

Indra Nooyi: चेन्नई के छोटे से शहर से निकल कर रिसेप्शनिस्ट की जॉब करना। फिर पेप्सिको ज्वॉयन करना और उसकी प्रेसीडेंट बनना। फोर्ब्स की पावरफुल वूमेन की लिस्ट में शामिल होना और पूरी दुनिया को अपनी काबलियत मानने पर मजबूर करना। फिर पेप्सिको से रिटायर्ड होकर आराम करने के बजाय ऐमजॉन के बोर्ड में शामिल होना। क्या इतनी सारी कामयाबी कोई महिला एक जिंदगी में हासिल कर सकती है?
सुनकर या पढ़कर विश्वास तो नहीं होता कि कोई एक महिला ऐसा कर सकती है। लेकिन इंदिरा नुई ने ऐसा किया है। चेन्नई की रहने वाली साधारण सी इंदिरा को आज पूरी दुनिया इंदिरा नूई के नाम से जानती है और इनकी गिनती दुनियाभर की सबसे काबिल महिलाओं में होती है। इंदिरा नूई (Indra Nooyi) ने अपनी पूरी जिंदगी को 300 पन्नों की एक किताब में समेटा है। इस किताब का नाम है ‘माई लाइफ इन फुल: वर्क, फैमिली एंड अवर फ्यूचर’’। बहुत कम लोग ही जानते हैं कि इंदिरा नुई अब पेप्सिको में नहीं अमेजन में हैं। आइए आज जानते हैं कि कैसे रिसेप्शनिस्ट की जॉब से वह पेप्सिको का सफर पूरा करते हुए अमेजन के बोर्ड में शामिल हुईं।

चेन्नई से किया स्नातक

इंदिरा आज अमेरिका की निवासी है और भारतीय मूल की कहलाती हैं। लेकिन इनका जन्म तमिलनाडु राज्य में 1955 में हुआ था। पिता ‘स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद’ में कार्यरत थे और दादा अपने जमाने में जिला न्यायाधीश हुआ करते थे। इसलिए समय की शिक्षा इंदिरा को बचपन से ही घर पर मिली थी और समय का अनुशासन ही उनका भविष्य बनाने में बहुत काम आया था।
इंदिरा नूई की पढ़ाई उनके होमटाउन से हुई। फिर ग्रेजुएशन मद्रास विश्वविद्यालय से की। उन्होंने फिजिक्स, केमिस्ट्री और गणित में ग्रेजुएशन किया। फिर आईआईएम की परीक्षा क्रैक की और आईआईएम कलकत्ता से बिजनेस मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की।

Indra Nooyi
Indira is a resident of America today and is said to be of Indian origin

विदेश में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी कर पूरी की पढ़ाई

यह 1978 की बात है। नूई ने सार्वजनिक व निजी प्रबंधन में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के लिए येल स्कूल ऑफ मैनेजमेंट (Yale School of Management) में एडमिशन लिया और पढ़ने के लिए अमेरिका चली गईं। इंडिया और अमेरिका में चीजों के प्राइज़ का अंतर पता चलने पर नुई को अफनी जरूरतों को पूरा करने के लिए पार्ट टाइम जॉब करने की जरूरत महसूस हुई। तो नूई ने येल में पढ़ाई के दौरान नाइट शिफ्ट में रिसेप्‍शनिस्‍ट के तौर पर काम करना शुरू किया। जिससे कि वह अपने पहले जॉब इंटरव्यू के लिए एक वेस्टर्न सूट खरीदने के लिए पैसे जुटा सकें।

बॉम्बे के परमाणु ऊर्जा विभाग से शुरू किया करियर

नूई ने इंडिया में पढ़ाई करने के दौरान समय इंटर्नशिप के तौर पर बॉम्बे के परमाणु ऊर्जा विभाग से अपना करियर शुरू किया था। जब ग्रेजुएशन पूरा हुआ तो जॉनसन एंड जॉनसन के साथ प्रॉडक्ट मेनेजर के तौर पर जुड़ीं। इस दौरान उन्होंने प्रोडक्शन के क्षेत्र में मैनेजिंग के कई गुर सीखे। फिर वह अमेरिका पढ़ने गईं और वहां बूज एलेन हैमिलटन में इंटर्नशिप की। साल 1980 में उन्होंने येल स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से अपना पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा किया। जिसके बाद वह बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) से जुड़ी। यहां उन्होंने 6 साल कंसल्टेंट के तौर पर काम किया। इसके बाद वह कई कंपनियों में शामिल हुईं जिसमें Motorola, Inc., और इंजीनियरिंग कंपनी Asea Brown Boveri (अब ABB) शामिल हैं। यहां उन्होंने एक्जिक्यूटिव के तौर पर अपनी सेवाएं दीं।

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Career started from the Department of Atomic Energy, Bombay

नुई को डायरेक्टर की सलाह- जो हो, वही रहो

नूई के पास अमेरिका में जॉब इंटरव्यू में जाने के लिए कोई बिजनेस सूट नहीं था। बिजनेस सूट बहुत महंगे आते हैं इसलिए उन्होंने पार्ट टाइम जॉब के दौरान बचाए गए 50 डॉलर से दो बटन वाली एक डार्क ब्लू पॉलिएस्टर जैकेट और एक मैचिंग स्लैक्स खरीदी। लेकिन यह आउटफिट उन्होंने बिना ट्राय किये खरीदा। क्योंकि उन्होंने कभी भी पहले चेंजिंग रूम का इस्तेमाल नहीं किया था और यह उन्हें काफी असुविधाजनक लगा। इसलिए उन्होंने बड़ी लगने वाली जैकेट ले ली। क्योंकि उनकी मां कहा करती थी- कपड़े हमेशा थोड़े बड़े ही लेने चाहिए। वरना जैसे—जैसे हम बड़े होत हैं कपड़े छोटे होते जाते हैं।
लेकिन नुईं को उस वक्त याद नहीं रहा कि वह 24 साल की हैं और पूरी तरह बड़ी हो चुकी हैं। यह उनकी जिंदगी का पहला सबसे बड़ा खर्च था।
इंटरव्यू वाले दिन नूई को जैकेट काफी बड़ी हुई और स्लैक्स काफी छोटे। जैकेट के नीचे फिरोज रंग का पॉलिएस्टर ब्लाउज पहना जिसमें लाइट ब्लू, ब्लू और डार्क ब्लू कलर की वर्टिकल स्ट्राइप्स थीं। इंटरव्यू वाली जगह पर आए उम्मीदवार नूई को देखकर हंस रहे थे, जो नुई के लिए काफी शर्मिंदा करने वाला था। खैर नूई ने उन कपड़ों में ही इंटरव्यू दिया जो गया तो ठीक था लेकिन फिर भी वह निराश थी और इंटरव्यू खत्म होते ही अपने करियर डेवलपमेंट डायरेक्टर Jane Morrison के पास रोते हुए गईं। उन्होंने अपनी सारी समस्या डायरेक्ट को बताई। तब जेन ने उनसे पूछा- इंडिया में इंटरव्यू के लिए क्या आउटफिट पहनकर जातीं। नूई ने कहा- साड़ी। इस पर जेन ने उन्हें अगले इंटरव्यू में साड़ी पहनकर ही जाने की सलाह दी और कहा- अगर वे आपको नौकरी नहीं देते हैं तो ये उनका नुकसान होगा। जो हो, वही रहो।

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She joined PepsiCo in the year 1994

साल 1994 में पेप्सिको में वह शामिल हुईं

नूई साल 1994 में पेप्सिको कंपनी के साथ कॉरपोरेट स्ट्रैटेजी व डेवलपमेंट की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट के तौर पर जुड़ीं। यह अमेरिका और पूरे भारत के लिए खास दिन था क्योंकि 1994 में अमेरिका की 500 सबसे बड़ी कंपनियों में से एक में भी महिला सीईओ नहीं थी। पेप्सिको से नुई को वह हर चीज मिली जो एक इंसान अपनी जिंदगी में चाहता है और नुई ने भी हर मौके का फायदा उठाते हुए काफी मेहनत की। उनकी मेहनत को देखते हुए उन्हें साल 2001 में उन्हें कंपनी का सीएफओ बनाया गया और पांच साल बाद यानी 2006 में वह कंपनी की चेयरमैन व सीईओ बनीं। उस समय पूरे अमेरिका में केवल 11 महिला सीईओ थीं पहली अश्वेत और अप्रवासी महिला सीईओ। इसके अलावा इंद्रा नूई पेप्सिको की 5वीं और पहली महिला सीईओ थीं।

दुनिया की बेहतरीन सीईओ

नुई की गिनती दुनिया के बेहतरीन सीईओ में होती है। भारत सरकार ने नुई को साल 2007 में पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया। 2014 में फोर्ब्स ने नुई को विश्व की 100 सबसे पावरफुल वूमेन की लिस्ट में 13वें स्थान पर रखा था। फिर 2015 में फॉर्च्यून ने उन्हें दुनिया की दूसरी सबसे शक्तिशाली महिला का खिताब दिया। इनका नाम दो बार TIME मैगजीन की ‘दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची’ में भी आ चुका है।
नूई 2019 में पेप्सिको से रिटायर हुईं और इसी साल अमेजन के बोर्ड में शामिल हुईं।

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