Motivational Story: मैं तो कहीं रही थी, यह परिवार ऐसे ही कोई ना कोई कांड करेगा । आते ही फूलमती जो हमारे मोहल्ले में लगभग सभी घरों में बर्तन झाड़ू पोछा का काम करती थी, हाथों को नचाते हुए बोली।
वैसे भी फूलमती को बर्तन साफ करने के साथ-साथ इधर-उधर के घरों की बात करने में बहुत मजा आता है।
या शायद उसका लेवल भी इतना ही है। लेकिन आज फूलमती ने जिस अंदाज से अपना हाथ नचाया, उसके इस शैली पर मैं भी अपने ऑफिस की फाइलों को छोड़कर उसकी बात सुनने के लिए मजबूर हो गई।
क्या हो गया? कोई बात हो गई फूलमती?
मेरा इतना ही पूछना भर ही था की फूलमती की बातों की एक्सप्रेस चल पड़ी। बीबी जी एक कप चाय तो पिलायेगा, कहकर आराम से बात करने की मुद्रा में वह आ गई। अरे !वह आपके पड़ोस वाले जो जगदीश शुक्ला के मकान में जो किराएदार आए थे । हां, हां मैंने कहा तो क्या हुआ उन्हें? मुझे जिज्ञासा हो रही थी।
मुझे तो इन सास बहू के लक्षण पहले से ही ठीक नहीं लग रहे थे। पर हुआ क्या? मैंने फिर से पूछा।
होना क्या था? क्योंकि मुझे भी वह परिवार बड़ा भला लगता था, इसलिए मैं अपनी जिज्ञासा रोक नहीं पा रही थी।
होना क्या था सोसाइटी के सभी घरों से कुछ ना कुछ समान उधार ले रक्खा था। दोनों सास बहू ने, वह 6 नंबर वाली ने तो सुन रही हूं₹25000 उधार दे रखे थे। दुकान वाले भैया, केबल वाले और तो और बीबी जी सब्जी वालों का भी कुछ उधार रुपया फंस गया है।
अच्छा, हुआ बीबी जी मेरे को काम पर नहीं रखा। नहीं तो मैं भी सर पकड़े बैठी होती, मेरे भी पैसे मारे जाते। मैंने धीमे से हामी भारी क्योंकि मैं भी मिक्सी उधार दे रखी थी।
मैं तो बैठकर फ्लैशबैक में चली ही गई शायद फूलमती भी वही सोच रही थी। जब से मोहल्ले में यह परिवार किराए पर रहने आया था। तभी से मोहल्ले में मैं ही नहीं सभी लोग बहुत प्रभावित थे। परिवार में कुल तीन सदस्य थे। माताजी, शालिनी उनकी बहू और उनका इकलौता पुत्र, जिसको वह लोग वन विभाग में बड़ा अफसर बताती थी।
मोहल्ले में आते ही ऐसे सबसे घुल मिल गए थे, की कोई माताजी से गांधी बड़ा की रेसिपी पता करने जा रहा है तो कोई स्वेटर की नई डिजाइन पूछ रहा है, तो कभी सुनने में आ रहा है की माताजी खुद ही किसी के घर में नारियल के लड्डू बनवा रहे हैं या अचार की नई रेसिपी सिखा रही है।
नई उम्र की बहूएं,लड़कियां सब शालिनी पर फिदा, जिसको देखो वह शालिनी से ही प्रभावित ,अरे! क्या बाल है? कोई उसके स्टाइलिंग सेंस का कायल तो कोई उसके नेल आर्ट का। ब्यूटी टिप्स संबंधी जानकारी या किसी न किसी बहाने सभी लोग इस परिवार की चकाचौंध से इस परिवार से संबंध बनाने के लिए लालायित रहते।
और नौबत यहां तक आ गई थी, मोहल्ले में हम सब पुराने लोग, आपस में बातचीत कम करने लगे थे। सभी इस फैमिली के आगे अपने पॉइंट्स बढ़ाने के चक्कर, में एक दूसरे से कटने लगे थे। अब जब मैं ध्यान से सोचती हूं,तो मुझे लगता है।
दोनों ही सास, बहू सामने वाले को देखकर, उस की बातों से उसका रुझान जानकर उस व्यक्ति से वैसे ही बात करके उसको प्रभावित करने की कला जानती थी।
खैर नतीजा तो आप सभी जान ही रहे हैं। मोहल्ले में हम सभी परिवारों का आपस में संवाद कम होने का, इस परिवार को कितना लाभ हुआ था। किसी को शंका भी ना हुई, जिसे जितने पॉइंट उसे परिवार के लिए कमाए थे, उसको उतना ही तगड़ा चूना लगा था।
सोसाइटी के हर परिवार को कहीं ना कहीं चूना लगा रहा होगा जैसे मुझे मिक्सी का,ऐसा मेरा विश्वास है। पर हमारी सोसाइटी में सभी को अपनी गलती का एहसास था सो इसका नतीजा अच्छा ही निकला था, भले चूना लग गया था, लेकिन हम आपस में फिर पहले की तरह सुख-दुख बांटने लगे थे।
