भारत कथा माला
उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़ साधुओं और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं
एक बार की बात है की एक देश का राजा था। आम राजाओं जैसा। उसकी एक रानी थी आम रानियों की तरह बहुत सुन्दर। उसका एक मल्लाह था। आम मल्लाहों जैसा।
राजा को समुन्द्र में किश्ती में सैर करने का बहुत शौक था। राजा सिर्फ अपने उसी वफादार मल्लाह को ही साथ ले कर जाता था।
राजा हर रोज़ शाम को अपनी रानी के साथ किश्ती में समुन्द्र में रोज़ सैर करने के लिए जाता था और वह मल्लाह को किश्ती दूर, बहुत दूर ले जाने के लिए कहा करता था। वहाँ जा कर राजा और रानी आपस में प्यार भरी बातें किया करते थे और कुछ कूट राजनीति के मशविरे भी किया करते थे।
एक दिन रानी ने राजा को कहा- यदि मल्लाह ने हमारी बातें सुन कर किसी को बता दी तो? राजा ने कहा- नहीं। ये मेरा वफ़ादार है। और इसकी हिम्मत कैसे पड़ सकती है? इसे मेरे बारे में नहीं पता? इसके पीछे राजा का रूतबा बोल रहा था।
परन्तु रानी नखरीली थी। बोली- नहीं। इसका पक्का प्रबंध होना चाहिए।
राजा ने आम राजाओं की तरह रानी की ज़िद के आगे घुटने टेक दिए। राजा ने मल्लाह की जिह्वा कटवा दी और मल्लाह बेजुबान हो गया।

कुछ दिनों के पश्चात फिर रानी ने कहा- ठीक है। जिह्वा कटने से यह बोल तो नहीं सकता परन्तु हमारी बातें सुन तो सकता है। हो सकता है इशारों से बता दे।
रानी कुछ ज्यादा ही संदेहशील होती जा रही थी। राजा ने लाख समझाने की कोशिश की और कहा की ये तुम्हारा वहम है। ऐसा नहीं हो सकता।
रानी अपनी ज़िद पर अड़ी रही।
राजा फिर आम राजाओं की तरह रानी के आगे हार गया। राजा ने सिक्का पिघलवा कर उसके कानों में डलवा दिया। उसे सुनना बंद हो गया।
कुछ दिनों पश्चात रानी ने फिर कहा- हुजूर सुना है की बहरा और गूंगा आदमी दूसरे आदमी के होंठों को हिलते देख कर बातों का अनुमान लगा लेता है। ये देख तो सकता है और हमारे होंठो की हरकत से बातों का अनुमान लगा सकता है।
राजा रानी की माँगो से परेशान हो उठा। परन्तु रानी नखरे वाली अपनी ज़िद पर अडिग रही। अंततः राजा हार गया। उसने मल्लाह की आँखें भी निकलवा दी।
अब मल्लाह ना बोल सकता था, ना सुन सकता था और ना ही देख सकता था।
अब वह किश्ती अपने अनुभव के साथ चलाता था। एक दिन राजा और रानी समुन्द्र में सैर कर रहे थे की ज़ोरदार तूफान आ गया। किश्ती तफान में घिर गई। राजा और रानी चीख-चीख कर मल्लाह को आवाजें देने लगे। परन्तु मल्लाह को ना तूफान सुनाई दे रहा था और ना ही दिखाई दे रहा था। ना ही राजा और रानी की चीखें सुनाई दे रही थी। किश्ती तूफान में घिरती जा रही थी। ना ही मल्लाह तूफान में से निकलने का कोई उपाय करने की स्थिति में था और ना ही राजा और रानी किश्ती में से भाग कर कहीं जा सकते थे। तूफान बढ़ता जा रहा था …. किश्ती तूफान में घिरती जा रही थी… मौत सामने खड़ी थी..।
राजा रानी को कोस रहा था।
– काश! मल्लाह की जिह्वा ना कटवाई होती।
– काश! मल्लाह के कान ना बंद करवाए होते।।
– काश! मल्लाह की आंखें ना निकलवाई होती।।।
भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’
