Hindi Short Poem: मुझे कुछ भी तो नहीं आता फिर भी सारे काम मैं निपटा लेती हूँ। औरों की तबियत का ख़याल रखती, खुद बुखार की गोली खाकर भी नाश्ता-खाना समय से बना देती हूँ। हाँ, मुझे कुछ भी तो नहीं आता फिर भी, सारे काम मैं निपटा लेती हूँ… याद ही नहीं कब चैन […]
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ये बारिशे-गृहलक्ष्मी की कविता
Very Short Poem-सुनो!!ये बारिशे हो जानेके बादबहुत देर तककच्ची ही नहींपक्की सड़कें भी गीलीगीली सीरहती हैं।वैसे ही जैसे!!आंखों सेआंसुओं की बारिशहो जाने केबाद !!कच्चे ही नहीं पक्केमन का कोना भीबहुत देर..बाद तकसीला सीलासा रहता है।। Also read: वो गुलाबी साड़ी-गृहलक्ष्मी की कविता
दहलीज़-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: मायका एक लड़की के लिए वह दहलीज़ है,जहाँ छूट जाते हैं, उसके कुछ सपने, कुछ अपने।मायका मन से बंधी एक डोर है, हर एक लड़की के लिए,जहाँ जिया होता है,उसने अपना बचपन, खेलें गुड्डे गुड़ियों के खेल।और वही गुड़ियां जब बड़ी हो जाती हैं तो छूट जाती है,माँ की आंचल से बंधी हुई […]
बंटवारा-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: घर बंट रहा नहीं है ये किसी का,किसी का संसार बंट रहा।होता देख बंटवारा घर का आजएक मां का कलेजा फट रहा। बचपन में चूरन टाफी मीठी गोलियां बांटने वाले भाईआज जायदाद बांट रहे,पहनते थे जो कपड़े एक दूजे के प्रेम से,आज जायदाद की खातिरभरे बाजार आज एक दूसरे की इज्जत उतार रहे। […]
तर्पण—गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: अब कुछ दिन तक खूब पूजे जायेंगे,क्या वो सचमुच धरती पर आयेंगे ?दाल रोटी जिन्हें ना मिली समय से,वो सुबह – सुबह ही खीर पूरी खायेंगे। क्या वो ————- दो घड़ी उसके साथ बिताया नहीं कभी,पुत्र होने का कर्तव्य निभाया नहीं कभी ।उनको जीते – जी तृप्त नहीं कर पाए जो,वहीं आज कल तर्पण […]
कैसी होती है न औरतें-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: श्रृंगार जो औरत का गहना है,हर वक्त हर पल पहना है.जिंदगी के भागमभाग में व्यस्त हो जाएचुटकी भर सिंदूर कभी न लगाना भूल पाए,वो बाबूजी के लिए पराठा,वो अम्मा जी के चने का साग,पति के लिए परवल की सब्जी,बच्चों की वो प्यारी मैगी..भले दो कौर ही वो खुद खाए,चुनरी साड़ी तीज उसे जां […]
प्रिय के जन्मदिन पर एक पाती प्रेम भरी-गृहलक्ष्मी की कविता
आपके जन्मदिन पर भी प्रिय अपने लिए ही कुछ चाहती हूं,पत्नी हूं प्रिय तो पत्नी का हक जताना जानती हूँ। स्वास्थ्य सुख समृद्धि बिछे मेरे आंगन में आपके साथ में,हो हर ख्वाब पूरे आपके बस आपके ख्वाबों में सजना चाहती हूं।आपके जन्मदिन पर भी प्रिय अपने लिए ही कुछ चाहती हूं। खिलें सुमन सुरभित सुरम्य […]
निर्वासित बेटियाँ -गृहलक्ष्मी की कविता
Poem in Hindi: ठुकराई गई बेटियाँ बुआ नैहर वापस आ तो जाती हैं पर वह पहले की भांति चहकती बिल्कुल नहीं हैं। बोझ समझती हैं खुद को भूल जाती है अपने वजूद को कोशिश करती हैं मुस्कुराने का छिपा नहीं पाती अपने दुख को। एक कोना तलाशती हैं घर में जो हक जताते थकती नहीं […]
शिक्षा—गृहलक्ष्मी की लघु कहानी
Shiksha Poem: शिक्षा वह अनमोल हीरा है जिसे एक शिक्षक ही दे सकता है, किसी बच्चे को कुंदन बनाना है किसे सोना यह एक शिक्षक ही समझ सकता है।हर बच्चे को एक मूर्ति के समान तरस्ता है ,शिक्षक बन जाता है एक मूर्तिकार, किसी बच्चे को क्या रूप देना है यह एक शिक्षक ही समझ […]
सभी शिक्षकों को समर्पित-गृहलक्ष्मी की कविता
Poem for Teacher: गीली मिट्टी को ठोंक पीट,देकर आकार सजाते है।बनती है तभी इमारत,जब वो नींव की ईंट बनाते हैं। देकर किताब हाथों मे ,वो पढ़ना लिखना सिखलाते हैं।‘क’ से कोरे कागज को‘ज्ञ’ ज्ञानी तक ले जाते है। उन नन्हैं मुन्ने वर्तमान को देश का भविष्य बनाते है।वो शिक्षक है जो घर घर मे,शिक्षा की अलख […]
