Hindi Poem: विनेश अगर तुम्हें लड़ता न देखा होताजंतर मंतर के मैदानों से लेकरपेरिस के अखाड़ों तकशायद कभी न जान पातेये सोने और चांदी के तमगेकितने बेमानी हैंइनमें वो चमक कहाँजो तेरे जज़्बे तेरी कूवत में हैतुम्हारी कुश्ती की बात तो ख़ैर क्या ही करे हमउसकी दहक तो उस रोज़ सुज़ाकी की आँखों में देखी […]
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खिलखिलाती हुई हँसी-गृहलक्ष्मी की कविता
Poem in Hindi: मासूम सा वह बचपन अब खोने लगा हैहवा का रुख अब बदलने लगा हैरस्सियों के झूले में गुनगुनाती खुशियांकोयल के कूकों जैसी किलकारियांपिट्टो,कितकित और चोर-सिपाहीअब क्यों सब भूलने लगे हैं मोबाइल पर ही थिरकने लगीं अब उंगलियां इनमें ही बसी अब बच्चों की दुनिया आभासी बनकर ही सिमटने लगीं हैंअब इस दुनिया से क्यों कटने […]
दिल पुकार रहा है सजना-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: प्रीतमय समां सुहाना उजला आसमांदर्दे दिल रहा पुकार है साजनाहो कहां, हो कहां, हो कहां, ओ…… साजना ढूंढती खोजती हूं रात दिनमन तड़प रहा है पिया तेरे बिनआ भी जाओ अब नहीं आजमांदर्दे दिल रहा पुकार साजनाहो कहां, हो कहां, हो कहां, ओ……. साजना मेघ बूंद आज जलाती मुझेचांदनी भी हाय सताती मुझेशीत […]
शिव शक्ति की महिमा-गृहलक्ष्मी की कविता
Shiv Hindi Poem: शिव आदि है, अनंत है, सर्वज्ञ है, सर्वशक्तिमान है।जिनके बिना सृष्टि का ना कोई आधार है।कण-कण में समाया हुआ है महेश्वर।संपूर्ण विश्व को बचाने के लिए शिव ने पान किया हलाहल।शक्ति जिनकी अर्धांगिनी, संपूर्ण जग में मांँ विराजती।शिव ने वाम अंग में दिया शक्ति को स्थान।भार्या की महत्ता को दे स्थान,बन गए […]
वो गुलाबी साड़ी-गृहलक्ष्मी की कविता
Teej Hindi Poem: मुझे आज भी याद है वो पहली हरियाली तीज चौथ,जब आप गुलाबी साड़ी मेरे लिए लाए थे।कम थे पैसे जेब में पर,मेरे लिए तो जैसे चांँद ही लाए थे।मुझे आज भी याद है…मेरा पूरा करने श्रंगार,गजरे भी तुम संग लाए थे।मुझे आज भी याद है..लाये थे संग में मोती के कंगन,जो मेरे […]
जरूरत- गृहलक्ष्मी की कहानी
Grehlakshmi Ki Kahani: ‘संजू ओ संजू, देखो तो तुम्हारा लाडला तुम्हारे लिए कितना रो रहा है।’ दिनेश ने ड्राइंग रूम से ही आवाज लगाई। ‘ओफ ओ, बाथरूम में थी। चैन से कुछ भी नहीं कर सकती। अभी जनाब को मेरी जरूरत है इसलिए रो रहे हैं मेरे लिए। जब इन्हें मेरी जरूरत नहीं होगी तो […]
शिव सती और सावन-गृहलक्ष्मी की कविता
Sawan Poem: सावन की ऋतु आई है,चारों ओर हरियाली छाई है। घनघोर बादल छाए है, मोर पपीहे गीत गाएँ है। सावन में भोले बाबा आते हैं, सब मंदिरों की शान बढ़ाते हैं। शिव के भक्तों का उमड़ा जन सैलाब है, कावड़ियों की टोली जय जय कार करती है।हर हर महादेव से गूंजता हर द्वार है।भक्ति दर्शन करने आते हैं,भक्ति में लीन […]
दूल्हन-गृहलक्ष्मी की कविता
दूल्हन बैठी थी , घर के आँगन मेंमेहंदी आलता और हाथी दांत का चूड़ा पहन केबारात आयी थी दरवाजे पर, दो सो बारातियों को ले करदूल्हे राजा सज रहे थे, शेरवानी पहन कर के, गले मे गानी डाले हुएघोड़ी पर बैठे थे, द्वार पर हुआ था, पिता का पिता से मिलन ,भाई का भाई से […]
सावन में आया है नैहर से बुलावा-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Sawan Poem: नैहर से से आयो है बुलावा,नैहर की अमराई बुलाए रही।संग की सहेली बाट निहारे,मईया सिंधारा सजाएं रही।सावन के झूले रहे हैं बुलाए,बाबुल का लाड़ बताए रहे।हरी हरी चूड़ियां हाथों में सज गई,पर अखियां वीरा की राह निहार रहीं ।पिया नाम की मेहंदी रखकर,सज संवर हर सखी इतराए रही।प्रेम का झौंटा दियो मोरे […]
सावन फिर से याद आया—गृहलक्ष्मी की कविता
Sawan Poem: फिर से आज सावन में,वो गुजरा जमाना याद आया आज की बरखा की बूंदों नेफिर वही अमृत बरसाया।वो पहला प्यार का इजहारवो सावन में मधुर मिलन फिर से याद आया।जब हम थे तुमसे मिले,सुमन खुशियों के हमारे बीच खिले।वो किशोरावस्था का अल्हड़पन,वो पहला स्पर्श तुम्हारा आज फिर याद आया।फिर से आज सावन में…थी […]
