Mahashivratri 2025
Mahashivratri 2025

Shiv Hindi Poem: शिव आदि है, अनंत है, सर्वज्ञ है, सर्वशक्तिमान है।
जिनके बिना सृष्टि का ना कोई आधार है।
कण-कण में समाया हुआ है महेश्वर।
संपूर्ण विश्व को बचाने के लिए शिव ने पान किया हलाहल।
शक्ति जिनकी अर्धांगिनी, संपूर्ण जग में मांँ विराजती।
शिव ने वाम अंग में दिया शक्ति को स्थान।
भार्या की महत्ता को दे स्थान,बन गए स्वयं अर्धनारीश्वर।
इसलिए ही तो भारतीय संस्कृति विश्व में है सबसे महान।
भगवान शिव ने प्रेम की पराकाष्ठा का सर्वोच्च रूप प्रकृति को दिया।
माता सती के यज्ञ में प्राण समर्पित करने पर,
रौद्र रूप आपने धारण किया।
कांपी वसुंधरा, थर-थर कांपे है आकाश।
जलघि में प्रलय आई, चारों ओर मचा है हाहाकार।
सभी देव मौन हैं, सृष्टि के बचने का ना कोई अब आसार है
पालनहार विष्णु ही अब जगत की आस है ।
शंभू शांत हो, तभी जीवन में कुछ प्राण हो।
कांधे पर उठाएं सती को शिव जब चले।
तब भगवान चक्रपाणि ने चक्र अपना छोड़ दिया।
माता सती का मृत शरीर छिन्न-भिन्न हो गया।
शिव का क्रोध भी अब शांत हो गया।
माता सती के यह छिन्न-भिन्न अंग शक्ति पीठ बन गए।
हम सबकी आस्था के प्रतीक बन गए।

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