Know why sleep is repeatedly broken at night
Know why sleep is repeatedly broken at night

Waking up at Night Frequently: महिलाओं में स्लीप क्राइसिस वह स्थिति है जब लगातार नींद न आने, बार-बार नींद टूटने की समस्या बढ़ जाती है। इसका असर मूड, सेहत और रोजमर्रा की ऊर्जा पर साफ दिखाई देता है।
समय रहते समझकर संभाला जाएं तो नींद और स्वास्थ्य- दोनों बेहतर बनाए जा सकते हैं।

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में महिलाओं में स्लीप क्राइसेस यानी व्यवस्थित नींद न आना, अधूरी नींद या बार-बार नींद टूटने की समस्या तेजी से बढ़ रही है। यह सिर्फ थकान या चिड़चिड़ापन नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को गहराई से प्रभावित करने वाली स्थिति बन चुकी है। कामकाज का दबाव, परिवार और रिश्तों की जिम्मेदारियां, मातृत्व की चुनौतियां,
हार्मोनल उतार-चढ़ाव और लम्बे समय तक स्क्रीन का इस्तेमाल और समाज की अपेक्षाएं, ये सभी मिलकर महिलाओं की नींद की गुणवत्ता को पूरी तरह से खराब कर रहे हैं। दिनभर की भागदौड़ में शरीर थक जाता है, लेकिन दिमाग शांत नहीं होता, जिससे नींद देर से आती है या गहरी नहीं होती।

मल्टीटास्किंग: घर, ऑफिस, बच्चों की देखभाल, रिश्तों की जिम्मेदारी, एक ही समय में कई भूमिकाएं निभाने वाली महिलाएं मानसिक रूप से कभी ‘ऑफ-मोड’ में नहीं जा पाती हैं । दिमाग हमेशा सक्रिय रहने से नींद की गुणवत्ता भी खराब होती है।

तनाव और ओवरथिंकिंग: महिलाएं भावनात्मक रूप से ज्यादा संवेदनशील होने के कारण हर बात को गहराई तक सोचती हैं। रात में सोने से पहले उनके दिमाग में, क्या करना है, क्या किया था, किसे क्या कहना था ऐसे सवाल चलते रहते हैं। यही ओवरथिंकिंग नींद की सबसे बड़ी दुश्मन है।
अनियमित रूटीन और स्क्रीन टाइम में बढ़ोतरी: सुबह जल्दी उठना, देर रात तक काम करना, बच्चों का होमवर्क घर के कामों के बीच महिलाओं का स्लीप शेड्यूल एक जैसा नहीं रह पाता। सोशल
मीडिया, रील्स, सीरियल्स, ऑनलाइन वर्क के समय डिजिटल स्क्रीन से निकलने वाली ‘ब्लू लाइट’ मेलाटोनिन को कम करती है।

महिलाओं से जुड़े स्लीप डिसऑर्डर्स इंसोम्निया: इस स्थिति में नींद आने में बहुत समय लगता है, या अक्सर रात में बार-बार नींद खुल जाती है। कई बार नींद आती भी है तो गहरी नहीं होती, जिससे सुबह उठकर थकान, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में मुश्किल महसूस होती है। तनाव, एंग्जायटी, हार्मोनल परिवर्तन और अधिक स्क्रीन टाइम इसके प्रमुख कारण हैं।
रेस्टलेस लेग सिंड्रोम: इसमें सोते या लेटते समय पैरों में अजीब-सा खिंचाव, खलबली, जलन या पैर हिलाने की अनियंत्रित इच्छा महसूस होती है, जिससे नींद टूटती रहती है। प्रेग्नेंसी, आयरन की कमी और थकान से यह समस्या बढ़ सकती है।

स्लीप एह्रिश्वनया: इस समस्या में सोते समय सांस कुछ पलों के लिए रुक जाती है। मोटापे, थायरॉइड, पीसीओएस या गर्भवती महिलाओं में यह अधिक देखा जाता है। इसकी वजह से शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और नींद बीच-बीच में टूटती रहती है।

सर्केडियन रिदम डिसऑर्डर: अनियमित रूटीन, देर रात तक जागना या शिफ्ट में काम करने से शरीर की आंतरिक घड़ी गड़बड़ा जाती है। इसके कारण सही समय पर नींद नहीं आती या सुबह उठने में काफी कठिनाई महसूस होती है।

नाइट ईटिंग सिंड्रोम: इसमें रात के समय बार-बार भूख लगती है और नींद टूट जाती है। भावनात्मक तनाव, हॉर्मोनल असंतुलन और अनियमित खानपान इसके मुख्य कारण हैं।

अन्य कारण: इसी तरह मेनोपॉज वाली महिलाओं में हॉट फ्लैशेज और मूड स्विंग्स के कारण नींद बुरी तरह प्रभावित होती है। थायरॉयड, पीसीओएस, एंग्जायटी, डिप्रेशन और आयरन की कमी जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही महिलाएं भी नींद ना आने की समस्या से जूझती हैं।

मासिक धर्म समस्याएं और हार्मोनल
असंतुलन: नींद की कमी से एस्ट्रोजेन, प्रोजेस्टेरोन और कोर्टिसोल जैसे हार्मोन असंतुलित होने लगते हैं। इसका सीधा असर मासिक चक्र पर दिखता है, पीरियड्स अनियमित होना, ज्यादा दर्द
होना या पीरियड्स मिस हो जाना जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं।

मानसिक स्वास्थ्य: महिलाएं नींद की कमी के कारण जल्दी तनाव, चिड़चिड़ापन और भावनात्मक अस्थिरता महसूस करने लगती हैं। लगातार स्लीप क्राइसिस से एंग्जायटी, डिप्रेशन और पैनिक एपिसोड का खतरा बढ़ जाता है। दिमाग की सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है, जिससे निर्णय लेने में कठिनाई होती है।

ऊर्जा में कमी: नींद की कमी के कारण शरीर को पर्याप्त रिकवरी नहीं मिल पाती। दिनभर थकान, कमजोरी और भारीपन महसूस होता है। महिला की काम करने की क्षमता और फोकस काफी कम हो जाता है, जिससे घरेलू और प्रोफेशनल लाइफ पर नकारात्मक असर पड़ता है।

मेटाबॉलिज्म धीमा होना: स्लीप क्राइसिस मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देती है, जिससे वजन तेजी से बढ़ने लगता है। इसके अलावा भूख नियंत्रित करने वाले हार्मोन भी डिस्टर्ब हो जाते हैं, जिससे अनहेल्दी क्रेविंग बढ़ती है।

दिल और इम्युनिटी संबंधी खतरा: लगातार कम नींद से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, दिल की बीमारियों और डायबिटीज का रिस्क भी बढ़ जाता है। इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ने से महिला जल्दी संक्रमण का शिकार होने लगती है।

Home remedies for restful sleep
Home remedies for restful sleep

गर्म दूध या हर्बल चाय: गर्म दूध में मौजूद ट्रीप्टोफैन नींद लाने में मदद करता है। वहीं कैमोमाइल या लैवेंडर टी शरीर को रिलैक्स करती है और दिमाग को शांत बनाती है।

पैरों में सरसों या नारियल तेल की मालिश: रात को हल्के हाथों से पैरों की मालिश करने से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और शरीर को आराम मिलता है। यह नींद जल्दी आने में मदद करता है।

कमरे का वातावरण नींद के लिए अनुकूल रखें: कमरा शांत, मौसम के अनुसार सही तापमान बनाये रखें। तेज रोशनी या शोर नींद में बाधा डालते हैं। लैवेंडर ऑयल का डिफ्यूजर भी एक अच्छा विकल्प है। शांत वातावरण में जैसी ही सुकून भरी नींद आती है।

स्क्रीन टाइम बंद करें: मोबाइल, टीवी और लैपटॉप की ब्लू लाइट दिमाग को सक्रिय बनाये रखती है, जिससे नींद देर से आती है। इससे बचने के लिए सोने से एक घंटा पहले ही डिजिटल डेटॉक्स को
अपनाएं।

धूप लें: सुबह की धूप शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक को ठीक करती है, जिससे रात में नींद स्वाभाविक रूप से आती है। शरीर में विटामिन डी का स्तर बने रहने से फुर्ती बनी रहती है।

हेल्थ एक्सपर्ट डॉक्टर हॢषता ने बताया की महिलाओं को हर रात तकरीबन 9:30 के आसपास सो जाना चाहिए ताकि सुबह उठने पर उन्हें फ्रेश महसूस हो सके। उनका कहना है कि अगर पूरी नींद ना ली जाए तो जल्द ही आप ब्रेन फोग की समस्या से जूझने लगेंगी। नींद की कमी से हमरे दिमाग के काम करने और सोचने समझने की शक्ति पर काफी नकारात्मक असर पड़ता है।

1. रोज एक ही समय पर सोएं और जागें। यह आदत नींद के चक्र को संतुलित रखती है।
2. हल्की शाम की वॉक या योगा की आदत जरूर अपनाएं। यह तनाव घटाकर शरीर को रिलैक्स करता है।
3. रात का खाना हल्का रखें, भारी भोजन पाचन को धीमा करता है, जिससे नींद प्रभावित होती है।

उत्तराखंड से ताल्लुक रखने वाली तरूणा ने 2020 में यूट्यूब चैनल के ज़रिए अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद इंडिया टीवी के लिए आर्टिकल्स लिखे और नीलेश मिश्रा की वेबसाइट पर कहानियाँ प्रकाशित हुईं। वर्तमान में देश की अग्रणी महिला पत्रिका...