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नारी की सुंदरता-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: तुम्हारी आँखों में काजल की गहराई,गजरे की महक से महकता है मेरा मन,तुम्हारी मुस्कान में अधरों की लाली,गले में हार की शोभा, तुम्हारी सुंदरता की कहानी। तुम्हारी कमर में करधनी की झनकार,हाथों में चूड़ियों की छम छम,पाँव में पाजेब की झंकार,बिछिया के घुँघरू की आवाज, तुम्हारी सुंदरता का जादू। तुम्हारी सुंदरता में आकर्षण है,तुम्हारे श्रृंगार में मादकता है,तुम्हारी आँखों […]

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नारी की सुंदरता-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: तुम्हारी आँखों में काजल की गहराई,गजरे की महक से महकता है मेरा मन,तुम्हारी मुस्कान में अधरों की लाली,गले में हार की शोभा, तुम्हारी सुंदरता की कहानी। तुम्हारी कमर में करधनी की झनकार,हाथों में चूड़ियों की छम छम,पाँव में पाजेब की झंकार,बिछिया के घुँघरू की आवाज, तुम्हारी सुंदरता का जादू। तुम्हारी सुंदरता में आकर्षण है,तुम्हारे श्रृंगार में मादकता है,तुम्हारी आँखों […]

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मॉ कहती थी-गृहलक्ष्मी की कविता

Mother’s Poem in Hindi: मॉ कहती थी सारा शरीर गवा कर बेटे को जन्म दिया हैवो मेरे शरीर का हिस्सा है मॉ कहती थीपिता ने घूप मे पासीना बहा कर हर इच्छा को पूरा किया है ,पर कहते नही थेपढ़ने में था होनहार, दूध का क़र्ज़ भी अदा करा , पिता का भी अरमान पूरा कियाचबूतरे में बैठी औरतें बात […]

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बाबू जी की विदाई-गृहलक्ष्मी की कहानियां 

Hindi Kahani: घर के आगंन मे चिड़िया सुबह—सुबह शोर कर रही थी। आवाज बड़ी प्यारी लग रही थी बाहर आ कर देखा ठंडी हवा चल रही थी गरमी के बाद शरद आने वाला होता हे तो कुछ दिन हवा ठंडी भी अच्छी लगती हे ।बाबू जी बाहर आंगन मे अपनी कुरसी पर बैठे महाराज से […]

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दूल्हन-गृहलक्ष्मी की कविता

दूल्हन बैठी थी , घर के आँगन मेंमेहंदी आलता और हाथी दांत का चूड़ा पहन केबारात आयी थी दरवाजे पर, दो सो बारातियों को ले करदूल्हे राजा सज रहे थे, शेरवानी पहन कर के, गले मे गानी डाले हुएघोड़ी पर बैठे थे, द्वार पर हुआ था, पिता का पिता से मिलन ,भाई का भाई से […]

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