Mother's Poem in Hindi
Mother's Poem in Hindi

Mother’s Poem in Hindi: मॉ कहती थी सारा शरीर गवा कर बेटे को जन्म दिया है
वो मेरे शरीर का हिस्सा है मॉ कहती थी
पिता ने घूप मे पासीना बहा कर हर इच्छा को पूरा किया है ,पर कहते नही थे
पढ़ने में था होनहार, दूध का क़र्ज़ भी अदा करा , पिता का भी अरमान पूरा किया
चबूतरे में बैठी औरतें बात करती, बेटा हो तो ऐसा बाप सुन कर , सिर के गमछे को ही सिर की पगड़ी
समझता था मॉ कहती थी
नौकरी लग गयी,फूल सी दुल्हन आलता लगे पैरो में पाजेब बाजाती आ
अंगना लाल पैरो से शोभित कर दिया
घर ख़ुशी से महका था , पर आलते मे छिपा शैतान था,
बाबू जी गम पीगये
जाते जाते कह गये दुल्हनियाँ हमेशा खुश रखना   मॉ कहती थी
घर आँगन किलकारियाँ से भरा ,मै भी बच्चों। मे  उनका अक्स देखती थी
खुश रहती थी मॉ कहती थी, बीत गये दस साल बच्चे हो गये बड़े
पति को जाना पड़ा विदेश दो महीने के लिये कार्यालय के काम से
शैतानी ने जोर पकडा और छोड दिया मॉ को वृद्धा आश्रम में
बच्चे स्कूल से आए पूछा दादी कहॉ हे ,बोली किसी रिश्तेदार के यहाँ है बच्चों का मन ना लगा
पति ने पूछा मॉ कहाँ है बोली बहन के कह कर गयी है
बहुत ढूंढा पर माने नही
स्कूल की तरफ़ से बच्चे गये वृद्धा आश्रम में देखने बुजुग   को
दादी को देखा हो गये गद गद
लौट कर ना घर गये  ,ना दादी को घर जाने का कहा  
बस डाईवर को कहा आप घर  जाओ   ,अब ढूंढे अपने बच्चे
घर आ कर बस ड्राइवर ने कहा ,घर मे बता दो हम अपना। मिशन पूरा करेंगे
बस ड्राइवर को छोड़ दिया दण्ड देकर
अब गये।  आक्षम मे मॉ बच्चो को देख कर अति उत्साहित
पति ने कहा निकलो मेरे घर से , मॉ ने कहा , क़सूर मेरा हे ,मे चली गयी थी
अब शैतान मन गिरा चरणों में मॉ मुझे क्षमा करो ,आप आलते  आँगन सजाती हो मे आज आप के चरणों से पूरा घर पवित्र करूँगी