Jude Bechne Wali
Jude Bechne Wali

Hindi Kahani: जुड़े बेचने वाली लड़की जो कि आज की तारीख में मेरी पत्नी मेरी जीवन संगिनी है.मुझे वह शादी से पहले ही पसंद थी. वह बिल्कुल मेरी ऑफिस के सामने वाली सड़क के किनारे फुटपाथ पर अपने टोकरे में विभिन्न तरह के जुड़े रखकर बेचा करती थी. वह यह सारे जुड़े खुद ही अपने हाथों से गूंथती थी.

वह देखने में काफी सीधी और सरल थी. उसका रंग सावला बेशक था लेकिन उसके शरीर की बनावट का आकर्षण किसी गौर वर्ण लड़की के आकर्षण को भी फीका कर दे, ऐसा था. उस पर बिना किसी मेकप के उसकी सुंदरता कुछ और निखर आ रही थी. यह उसका आकर्षण या उसके प्रति मेरे मन में प्यार की कोई भावना ही थी कि, मैं उसको नजदीक से देखने की चाह में एक जोड़े जुड़े हर दिन खरीद लेता था. जबकि उसे लगाने वाली मेरे फ्लैट में कोई थी ही नहीं और होती भी कैसे क्योंकि अभी तक मुझे कोई ऐसी लड़की मिली ही नहीं कि जिसे मैं अपनी जीवन संगिनी बना सकूं.

उससे इसी तरह से जुड़े खरीदते-खरीदते मुझे पूरे दो साल हो गये लेकिन बात और सारी सिचुएशन वहीं की वही यानी कि ढाक के तीन पात वाली मैं उससे जुड़े  खरीदता वह भी मुझे जुड़े पकड़ाकर पैसे ले लेती.वैसे अब मुझे थोड़ा सा यह एहसास जरूर होने लगा था कि, उसे भी मेरी इस चाहत का कुछ-कुछ एहसास है लेकिन फिर भी वह चुप है . शायद! इसका कारण उसकी और मेरी आर्थिक स्थिति या फिर आज की अल्ट्रा मॉडर्न लड़कियो की तरह से उसके स्वभाव का ना होना हो ,जो यूज एण्ड थ्रो का प्यार ओढ़ और छोड़ देती हैं.

फिर एक दिन मुझे लगा कि, कही मैं इससे अपने दिल की बात कहने में इतना देर ना कर दूं कि, –“इसकी शादी कही और तय तमाम हो जाये और मैं किसी आशिक की तरह हर दिन ऑफिस से छुटने के बाद सड़क के फुटपाथ की तरफ ऐसे तड़प कर देखूं जैसे किसी फिल्म में शीरी ने अपने फरहाद की तरफ देखा था और मेरे दर्द की होंठ से निकले कि, हाय! कभी यही मेरी मुहब्बत जुड़े बेचा करती थी,मेरी महबूब मेरी जुड़े वाली लड़की जिसे मैं टूटकर चाहने के बावजूद केवल इसलिए खो बैठा कि ,उससे अपने दिल की बात ना कह सका.” इसीलिए आज मैं अपने फ्लैट से ही यह सोचकर निकला था कि, ऑफिस से छुटते ही हमेशा की तरह उससे जुड़े खरीदूंगा और उसे पैसा देने से पहले ही अपने दिल की सारी बाते कह दूंगा. फिर मैं ऑफिस से छूटते ही फुटपाथ की तरफ़ चल पड़ा लेकिन आज ना जाने क्यों मेरे पाँव थोड़े से लरज रहे थे. माथे पर पसीने की कुछ एक बूंदे भी चमक रही थी .शायद! ऐसा इसलिए था कि, मैं एक लड़की से अपने दिल की ही बात नहीं बल्कि जिंदगी की बात करने जा रहा था. जहां शादी जैसा बड़ा निर्णय था.

मैं जैसे ही उसके पास पहुंचा तो मुझे वह भी किसी खयाल में खोई हुई सी दिखी अगर ऐसा ना होता तो वह मेरे तीन-चार मर्तबा बुलाने पर कम से कम कुछ तो जवाब देती. लेकिन फिर भी जब वह नही बोली तो मैंने उसकी आँखों के सामने अपना हाथ हिलाया तो वह अचानक से चौक गई.  फिर कुछ देर वह खुद को सामान्य कर बोली, –कहिए बाबू ! मैं आपको कौन सा जुड़ा दूं ? इतना पूछने के बाद वह अपने टोकरी में रखे हुये जुड़े को इधर-उधर करने लगी.उसका अपनी टोकरी के जुडो का इधर-उधर करना यूं लग रहा था कि,– जैसे वह खुद को बहकाने का प्रयास कर रही हो. फिर मैने उससे एक जोड़े जुड़े देने को कहा. उसने जैसे ही जुड़े मेरी हाथ में रखा मैंने झट वैसे ही उसके जुड़े देने वाले दोनों हाथों को थाम लिया और वह मेरी इस अप्रत्याशित हरकत पर अचानक से चौक गई . शायद! उसे मुझसे इस तरह के हरकत करने की उम्मीद नहीं थी तभी तो मेरी इस हरकत पर उसके हाथ कांपने लगे और उसकी पूरी हथेली पसीने से भीग गई.

लेकिन मैंने उस तरफ बिना कोई ध्यान दिये ही उससे कहा कि,–“ शायद ! तुम नही जानती कि, मेरी शादी नही हुई है वह तो एक दिन यूं ही फुटपाथ पर तुम्हें जुड़े बेचते हुए देखा तो फिर वह देखना ना जाने कब मेरी चाहत में बदल गया ? और मैं तुम्हें करीब से देखने के चक्कर में हर रोज एक जोड़ी जुड़े खरीदने लगा.  वैसे क्या तुम मेरी जीवन संगिनी बनोगी ? क्या मै तुम्हें स्वीकार हूं?” यदि हां तो तुम मेरे इस खरीदे हुए जुड़े को कुबूल कर लो.फिर वह मेरे हाथों से जुड़े को पकड़ते हुए बोली कि, मै जानती हूं बाबू कि आप मुझसे पिछले दो वर्ष से प्यार करते हैं और यह जुड़े भी आप मुझसे केवल मुझे करीब से देखने के लिए खरीदते हैं. लेकिन मैं यह सब जानने और समझने के बावजूद भी अंजान बनी रहती थी क्योंकि कहां आप और कहां मैं ?

फिर मेरा आगे –पीछे सोचने वाला भी तो कोई नहीं.  मैं बिना माँ-बाप के पली बढ़ी एक अनाथ लड़की हूं. उसके मुंह से यह बात सुनकर मेरी आँख भी भीग गई और मैंने उससे कहा कि,– मैंने यह सोचकर तुमसे प्यार नही किया है कि, तुम अनाथ हो. बस तुम केवल यह बताओ कि, क्या तुम्हें मेरा यह प्यार स्वीकार है या नही ? तो उसने भी रोते हुए कहा कि,– मुझे आपका ये प्यार स्वीकार है और साथ ही मैं आपको यह भी यकीन दिलाती हूं कि, –“मैं कभी भी नही बदलुंगी आपकी जीवन-संगिनी बनकर मैं हमेशा आपके प्यार के इस जुड़े को अपने बालों में लगाये रखूंगी, ताकि आपकी आँखों में हमेशा दिखती रहे आपकी ये “जुड़े बेचने वाली लड़की.”