Hindi Poem: उस गली से गुजरे जमाना हो गया, आज मेरा उस गली से जाना हो गया, वो घर नहीं था..,वहां अब फ्लैट बन गया, माँ के गुजरते ही वहां का नक्शा बदल गया, ना थी वो हवाएं, ना थी वो खुशबुएं, बरसा करती थीं, जहां माता -पिता की रहमतें, यह देख मेरे अंदर का […]
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स्त्री जीवन हमेशा-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: स्त्री जीवन हमेशा किताब सा रहाज़िल्द पर शीर्षक था त्याग और समर्पण कापहले पन्ने पर कर्तव्यों की सूची आईप्रस्तावना प्राचीन थीकर्तव्य और बीमारियों पर प्रश्नचिन्ह रहेरेखांकित किये गये सदा अवगुणचरित्र महत्वपूर्ण पन्ना थामाफ़ करते जाना अहम विषयप्रेम देना अनिवार्य थाऔर मिलना परीक्षक की मर्जी, भावनाओं को कभीपढ़ा ही नहीं गयाप्रश्न पूछने की अनुमति उन्हें […]
नमन शारदे-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: क्या चंद्र बिंदु ओंकार का हैपूरब से उदित, आभा लेकर?यह किसके हाथों की गति हैदिखलाता पथ को दिशा देकर? किसने थामी है, प्रबल किरणकिसने रोकी है, प्रखर छायाये दिव्य बांह किसकी है, कहो!किसने फैलाई है माया? खेलता है कौन, लहरों के संगकिसने हाथों में, रखा सूर्य?किसने प्रभात के मंत्र पढ़ेकिसने है बजाया प्रकृति […]
आशा और उम्मीद-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Kavita: एक दिन माँ-बाप ने,बड़े प्यार से, दुलार से,बच्चे से कहा,बेटे ! हमने तुम्हे बड़े कष्ट से पाला,बहुत दुःख-दर्द सहा,तुमसे हमारी उम्मीदें जुडी हैं,हमारी आशाएं तुम पर टिकी हैं,तुम ही हमारे प्राणाधार हो,तुम्ही हमारे भविष्य का आधार हो,बेटे ने धीरे से कहा,मम्मी-पापा स्वार्थी न बनो,हमें पालो,पर हमसे, उम्मीदें ,आशाएं न पालो,जीवन कितना दुरूह है,हम […]
मां-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: मां तो मां होती है ,मां जैसी कहां कोई होती है।इस दुनिया में अगर बच्चो का जन्म संभव हो पाया है तो मां के दुख झेलने से हो पाया है।मां तो मां होती है, मां की जैसी कहां कोई होती है।बहुत मुश्किल है इस धरती पर।बच्चों का जन्म संभव हो पाना।मां ने वो […]
नारी तू नारायणी-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: आज जब मैं नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा अर्चना कर रही थी तो मन में एक विचार आया कि नारी तू नारायणी, नारी तू कल्याणी, नारी तू जगत जननी जैसे शब्द नारी के लिए लिखे और कहे गये। इतना मान, इतना सम्मान जो एक नारी को मिला वो सिर्फ इसलिए कि नारी […]
युद्ध-गृहलक्ष्मी की कविता
Poem in Hindi: इतिहास गवाह है किस्त्रियों ने कभी भी युद्ध नहीं चुनेजब भी युद्ध हुएयुद्ध पुरूषों ने चुनेस्त्रियों ने रखे घायलघाव पर रूई के फाहेस्त्रियों ने युद्ध नहींप्रेम चुनाऔर बचाएअपने स्वाभिमान का रास्ताअपने स्त्रीत्व कोबचाने के लिए जौहर चुनेफिर भी वो सबसे ज्यादा सजा भुगतती हैशहीद सैनिकों की ….कभीमां बनकर कभी पत्नी बनकरऔर कभी […]
महिला दिवस का उत्सव-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: महिला दिवस का उत्सव चलो मनाते हैं,चंद बाते भूल जाते हो अक्सर वो तुमको याद दिलाते हैं।मेरे लिए हर दिन उत्सव है क्योंकि हर रोज मैं किसी न किसी कुरीति पर विजय पाती हूँ,हर दिन अग्नि-परीक्षा को ठुकरा कर अपने विचार दर्ज कराती हूँ ।एक दिन के लिए सराहना नही चाहिए मुझको,नहीं हूं […]
मैं बनाम सिर्फ़ मैं ही…..गृहलक्ष्मी की कविता
Poem in Hindi: ना किसी से तुलना ना कोई स्पर्धा कर पाती हूंँ,लिखती बहुत कम हूंँ पढ़ती थोड़ा ज्यादा हूंँ।इसलिए ही शायद थोड़े से ही मन के भावों को लिख पाती हूंँ।थोड़े को ही तुम पढ़ना एक बार,देना अपने मन से थोड़ा सा प्यार।आपके ही प्रेम से तो मैं समृद्ध हो पाती हूंँ।ना किसी से […]
एक ईट से शुरू होकर-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: एक घर तक की कहानी नारी है|जहाँ दरवाजे से समृद्धि प्रवेश करती है|खिड़कियों से प्रेम और,रोशनदानो से कष्टों की हवाएँवातायन करती रहती है|दीवारों पर घर के प्राणियों के स्वप्न,किसी खुबसूरत पेंटिंग की तरह,वो अपने हाथों से सजाती है|एक चाय की प्याली से शुरू होकर,एक रोटी तक का हुनर स्त्री है|जहाँ हर कोर में […]
