Hindi Poem: बागबान की झुकी कमर,अब बोझ नहीं उठा पाती।चेहरे की चमक अब, झुर्री से ढक जाती। जो हाथ पहले सारे घर का काम कर देते थे, वह कांपते हाथ अब थाली भी ठीक से पकड़ नहीं पाते।धूप की चटकीली किरणें अब इन आंखों को चुभती है, फिर भी बागबान की आंखें रोज सुबह समय से जाग जाती हैं। पैरों […]
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” शब्द कहाँ से लाऊँ ?”-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: लिखूँ क्या पिताजी के बारे में?शब्द नहीं हैं मेरे पास।जब भी कोशिश करती हूँ कुछ लिखने कीआँख मेरी भर आती है।कोशिश करती हूँ कुछ सोचने की,ठीक से सोच मैं पाती नहीं हूँ।लिखूँ क्या पिताजी के बारे में?शब्द नहीं हैं मेरे पास। पिता की तस्वीर दिल में समां जाती है,रह रहकर उनकी याद दिलाती […]
मोबाइल-गृहलक्ष्मी की कविता
Short Hindi Poem: अब दिन भर मोबाइल में उलझी रहती हूँ,इन्स्टा और फेसबुक पर ही बिज़ी रहती हूँ।मुलाकात नहीं होती किसी से फिर भीस्टेटस पर हर दम ही दिखती रहती हूँ। किचन में भी अब कहाँ मन लगता है,दाल,चावल भी बड़ी मुश्किल से पकता है।कोमेन्टस तो कभी लाइक गिनती रहती हूँ,अब दिन भर मोबाइल में […]
रिश्ते-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Short Poem:रिश्ते सिमट रहेबंद कमरों के जालो सेफासले बढ़ रहेशीत की ओस सेअब फुरसत कहां कहीं कोई अपना हैले लिया रिश्ता सब मोबाइल के नेटवर्क नेदिन कट जाता कामों मेंरात फ़िर सुबह के उलझन मेंबच्चे बड़े होकर व्यवस्थित हो गये कमरों मेंअब इतनी फुरसत कहाँ जो पूछे हाल दिन भर केकाम का टेन्शन ले […]
स्मार्ट सिटी- गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: बन रही स्मार्ट सिटी तोप रही दिखती मिट्टी क्या होगा प्रतिफल इसका कौन करे इस पर ड्यूटी गाँव बने स्मार्ट अगर पक्का होना है बेहतर पर जहाँ पर पत्थर ईंट पत्थर लगना कैसे बेहतर दुर्दशा है जीव जंतु की कल मानव तेरी होगी कोरोना के काल से भी सीख तूने न ली होगी […]
जल संकट-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Short Poem: जल संकट है बड़ी समस्या,सूख रही झीले और नदियाँ,जनसंख्या भी बढ रही,जल की मांग बढ़ रही ।जल जीवन है जल आधार,जल बिन जग है निराधार,चौमासे में बरखा आती ,भर भर कर पानी लाती ,सभी मगन हो जाते है,कढी पकौडे खाते है।बारिश का पानी बह जाता,कोई उसे संग्रह न करता ,पोखर, कुएँ सूखते […]
ऐसे ही प्यार करते रहना-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: रास्ते कैसे भी हूँ,तूम साथ चलते रहना.ऐसे ही प्यार करते रहना.ऐसे ही प्यार करते रहना.मेरा कहा ही नहीं,अनकहा भी सुन लेना.एक-दूजे के ख़्वाबों को,साथ मिलकर बुन लेना.शिकवा-गिला और शिकायत,करके भी हँस लेना.कभी हथेली सहलाना,कभी बाँहों में कस लेना.जिम्मेदारियां आपस में लेना बाँट,दुःख के बीच, ख़ुशी के लम्हें लेना छाँट.उपहार देना न देना,सम्मान के […]
स्त्री गुनगुनाती है-गृहलक्ष्मी की कविता
Women Poem in Hindi: स्त्री जब खुश होती हैबर्तन माजते माजते ,कपड़े धोते-धोते ,रोटी बेलते बेलते ,सब्जी में छोका लगाते लगातेवो खुशी में गुनगुनाती है ।प्याज छिलते छिलतेआंखों में आंसू लिए भीवह गुनगुनाती हैमाथे पर ओस की तरह चमकतीपसीने की बूंदे भीउसको विचलित नहीं कर पातीवह अपने अंदर खोई हुई ,होने के बाद भीकाम करते-करते […]
मुस्कान-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: हर मुस्कान कुछ तो कहती है,. यूं ही नहीं सबके होठों पर रहती है ..!! जीवन जीने की कला है मुस्कान, अपनों से किया वादा है मुस्कान, प्रेम की अति अधीरता है मुस्कान, कवि की अनंत कल्पना है मुस्कान, प्रेमी के दिल की थाह है मुस्कान, प्रेमिका की बलखाती अदा है मुस्कान, बच्चों […]
सभी को दीपोत्सव की अनेक शुभकामनाएं-गृहलक्ष्मी की कविता
Diwali Hindi Poem: जिसने आंगन मेरा रोशन किया है ,वह एक माटी का दीया है।बड़े ही प्यार से होगा दुलारा,चढ़ा कर चाक पर होगा संवारा।मृत माटी में जान डाली है,कला तेरी भी क्या निराली है।थपकियाँ तेज बाहर दे रहा है,और भीतर से सहारा भी दिया है।जिसने आंगन मेरा रोशन किया है,तेज़ धूप में खुद जल […]
