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स्त्री गुनगुनाती है-गृहलक्ष्मी की कविता

Women Poem in Hindi: स्त्री जब खुश होती हैबर्तन माजते माजते ,कपड़े धोते-धोते ,रोटी बेलते बेलते ,सब्जी में छोका लगाते लगातेवो खुशी में गुनगुनाती है ।प्याज छिलते छिलतेआंखों में आंसू लिए भीवह गुनगुनाती हैमाथे पर ओस की तरह चमकतीपसीने की बूंदे भीउसको विचलित नहीं कर पातीवह अपने अंदर खोई हुई ,होने के बाद भीकाम करते-करते […]

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बदलाव -गृहलक्ष्मी की कविता

नए साल पर,कुछ तो नयापन लाओ। हो सके तो, कुछ आदतों में ही सुधार लाओ। कोई कब तक कहेगा तुम सुधर जाओ कभी  तुम हीस्वयं को बदल कर, लोगों को अचंभित कर जाओ। चुन चुन कर तुम,  व्यसनों को पनाह देते हो। पुराने साल पर मिट्टी डालो नए साल पर, नए रंग रूप में आओ। दिन ,महीने ,साल ,कब तक बे खबरी […]

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