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वह जल रही थी – गृहलक्ष्मी कहानियां

कमरे के बीचों बीच उसकी आग में झुलसी हुई लाश, जो आधी जल चुकी थी, एक सफेद चादर में ढकी हुई थी। वह जल चुकी थी, सांसें खत्म हो चुकी थीं, लेकिन उसकी आग से अनछुई रूह वहीं कमरे में एक कोने में बैठी मुस्कुरा रही थी। घरवालों की, लोगों की, रिश्तेदारों की बातें सुन रही थी। कई बहुत अफसोस कर रहे थे कि देखो, बेचारी जलकर मर गई।

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देर से सही

कांतिलालजी ने भी दुनिया देखी थी। मन ही मन कुछ अनुमान भी लगा रहे थे, लगता तो मामला पिटने-पिटाने का है उनका अंदाज़ा बरसों के घायल मन को सुकून दे रहा था। पर कैसे! कहां! किससे?

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अनुभूति प्यार की – भाग 2 गृहलक्ष्मी कहानियां

उधर सुमित, आफिस में सिगरेट पर सिगरेट फूंके जा रहा था। काम पर कन्संट्रेट नही कर पा रहा था। वह शाम तक एक निर्णय पर पहुंचा। वह ऑफिस के काम से फुर्सत निकालकर ,शहर के एक नामी काउंसलर से प्रॉब्लम शेयर करने गया ।

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अनुभूति प्यार की – गृहलक्ष्मी कहानियां

‘रेवा के पति सुमित एक वकील हैं। वह उनसे बहुत प्यार करती थी। जब भी वह उसकी बाँहों में होती, तब उसे एक अजीब सी अनुभूति होती। आज उसकी शादी को 7 साल हो गए। लेकिन उसे लगने लगा कि अब उन दोनों के बीच में वह प्यार नहीं रहा, जो पहले था। आजकल सुमित, उससे ज्यादा अपने काम पर ध्यान देने लगा था। कभी-कभी उसे लगता जैसे वह उसको बिल्कुल ही भूल गया है।

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पाप का ताप- गृहलक्ष्मी कहानियां

 सुबह लगभग साढ़े नौ बजे शिवानी आफिस पहुँची। उसने अपना हैंडबैग टेबल पर रखा ही था कि:-  मैडम, आपको मैनेजर साहब ने बुलाया है, अभी”चपरासी ने शिवानी को आकर संदेश दिया।  ठीक है तुम जाओ”कह कर शिवानी कम्पनी के मैनेजर ‘गजेन्द्र सिन्हा’ के केबिन में दाखिल हुई।  अरे आओ शिवानी क्या बात है? आज तो […]

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घर की शांतिः गृहलक्ष्मी की कहानियां

गृहलक्ष्मी की कहानियां: बरसात के मौसम में आज बहुत दिनों बाद तेज धूप खिली थी। सुकेश के घर के आंगन में पता नहीं कहां से आकर एक बहुत बड़ा काला सांप रेंग रहा था। उसकी आठ साल की बेटी रिया उस समय आंगन में खेल रही थी। वह सांप देखकर डर गई और बदहवास सी […]

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गोरे रंग की चाह: गृहलक्ष्मी की कहानियां

गृहलक्ष्मी की कहानियां: शिखा! तुम्हारे लिए नाश्ता रख दिया है, जल्दी से कर लो। फिर तुम्हे दवा भी लेनी होगी।मम्मी जी आज फिर केसर वाला दूध औऱ ये नारियल! आज ये खाने का मन नहीं है मम्मी जी, कुछ चटपटा खाने का मन कर रहा है, जैसे पोहा या नमकीन चावल।प्लीज कुछ अच्छा सा बना […]

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मनमोहना: गृहलक्ष्मी की कहानियां

दरवाजे खोलते ही ही अपनी मम्मी का हाल जानने पहुंचे आयशा ने अपने अब्बू से पूछा-अब्बू अम्मी कैसी है?आयशा की अम्मी आसमां का अभी कुछ दिन पहले ही हार्ट ट्रांसप्लांट का ऑपरेशन हुआ था, उन्हें काफी दिनों से हार्ट में दिक्कत चल रही थी, बड़ी मुश्किल से बहुत लंबे इंतजार के बाद किसी हिंदू महिला, […]

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भरोसा: गृहलक्ष्मी की कहानियां

गृहलक्ष्मी की कहानियां: आज आटो लेकर जल्दी—जल्दी घर से निकला क्योंकि आज नीट का एंट्रेस एग्जाम था। बहुत से प्रतियोगी अलग-अलग जगहों से रायपुर आये होंगे तो सवारी मिलने की संभावना बहुत ज्यादा थी। स्टेशन पहुंचा तो प्रतियोगियों की भीड़ दिखी। कई सवारियों को उनके मंजिल तक पहुंचने के बाद मै स्टैंड पर सुस्ता रहा […]

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तिनके का संकट-गृहलक्ष्मी की कहानियां

जमींदार के नायब गिरीश बसु के अंतःपुर में प्यारी नाम की एक दासी काम में लगी। उसकी उम्र भले ही कम थी पर स्वभाव अच्छा था। दूर पराये गांव से आकर कुछ दिन काम करने के बाद ही, एक दिन वह वृद्ध नायब की प्रेम-दृष्टि से आत्मरक्षा के लिए मालकिन के पास रोती हुई हाजिर […]

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