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कथा-कहानी

जब सुरेश छुट्टी के बाद अपनी साइकिल पर घर जाने लगा तो देखा साइकिल के टायर में हवा नहीं थी । वह बहुत परेशान हो गया। अब वह क्या करे उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। आज तो उसका क्रिकेट का मैच था और उसे सीधे मैच के लिए निकलना था। उसकी आँखों में आंसू आ गए और वह रोने लगा। आज उसकी क्षेत्रीय टीम का चुनाव भी था और अगर वह समय पर वहां नहीं जाता तो उसका टीम में शामिल होने का सपना  भी टूट जाता।

 यह बात उसने अपने किसी भी मित्र को अब तक नहीं बताई थी। विनय उसके पास जा कर बोला, भाई क्या हुआ इतना उदास क्यूं हो, हवा ही तो निकली है, चलो ठीक करवा  लेते हैं। यह सुन कर सुरेश ने रोते हुए विनय को बताया कि उसे आज टीम सलेक्शन के लिए जल्दी स्टेडियम पहुंचना था। वैसे ही स्कूल की छुट्टी देर से होती है और वह लेट है अब तो और देर हो जाएगी। आज उसका जाना बहुत ज़रूरी था क्यूंकि आज टीम का सलेक्शन भी था ।

 अब विनय को भी बहुत दुःख हुआ। मजाक में उसने अपने मित्र का ही बुरा कर दिया था। उसने अपनी साइकिल सुरेश को दे दी और खुद उसकी साइकिल ठीक कराने के लिए चला गया। साइकिल ठीक कराते हुए उसने संकल्प लिया कि अब वह कभी भी किसी को तंग नहीं करेगा और इस तरह का मज़ाक नहीं करेगा जिससे किसी को हानि हो। साइकिल ठीक करा  कर जब वह सुरेश के घर पहुंचा  तो वह उसे घर के बाहर ही मिल गया। सुरेश बहुत ही खुश था वह समय पर स्टेडियम  पहुंच गया था और उसका सलेक्शन भी हो गया था। उसने विनय को गले लगा लिया और बोला आज अगर उसने उसकी मदद नहीं की होती तो वह आज टीम में नहीं होता। अब तो विनय की आंखें भी भर आई और शर्म के मारे वह सर नहीं उठा पा रहा था। पर वह खुश था कि समय रहते उसने सब संभाल लिया था।

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