Summary: ग्लासहाउस प्लांट ‘सिक्किम सुंदरी’, आनंद महिंद्रा ने दिखाया प्रकृति का करिश्मा
उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने हाल ही में एक्स पर इसका वीडियो शेयर कर इसे “धैर्य की मास्टरक्लास” बताया, क्योंकि यह पौधा कई सालों तक सिर्फ पत्तियों के रूप में छोटे रूप में रहता है और उसके बाद अचानक लगभग 2 मीटर तक ऊँचा होकर जोड़‑बिंदु‑जैसा फूल देता है।
Sikkim Sundari Flower: हिमालय की ऊँची और बर्फ से ढकी चोटियों में एक ऐसा पौधा पाया जाता है। इसे देखकर प्रकृति का जादू साफ़ नजर आता है यह है ‘सिक्किम सुंदरी। समुद्र तल से लगभग 4,000 से 4,800 मीटर की ऊँचाई पर उगने वाला यह दुर्लभ पौधा न केवल अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है, बल्कि असाधारण परिस्थितियों में जीवित रहने की अपनी क्षमता के लिए भी अद्वितीय है। इसके नाजुक फूल और विशाल पत्तियाँ हिमालय की कठोर ठंड और पतली हवा में भी जीवंतता बनाए रखती हैं। हाल ही में उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने इसे सोशल मीडिया पर साझा करके दुनिया का ध्यान इस प्रकृति के अद्भुत चमत्कार की ओर खींचा है। आनंद महिंद्रा अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अक्सर ही कुछ अनोखी और प्रेरित करने वाली पोस्ट करते रहते हैं।
आनंद महिंद्रा ने दिखाई हिमालय की छुपी विरासत
दरअसल, हाल ही में उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें उन्होंने बेहद दुर्लभ फूल ‘सिक्किम सुंदरी’ का ज़िक्र किया है। इस बार भी उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर इसी दुर्लभ पौधे से जुड़ी एक पोस्ट की है, जिसने लोगों का ध्यान खींचा है। इस पोस्ट में सबसे खास बात यह है कि यह पौधा बहुत ही अलग और अनोखा है।
I knew nothing about this extraordinary marvel: the ‘Sikkim Sundari’
— anand mahindra (@anandmahindra) December 21, 2025
Thriving at staggering altitudes of 4,000–4,800 meters, this "Glasshouse Plant" stands like a glowing tower against the mountains.
Its life is a masterclass in patience.
It is monocarpic, which means that… pic.twitter.com/keoMSmGcUl
आनंद महिंद्रा ने ‘सिक्किम सुंदरी’ नाम के एक फूल को “सब्र की मास्टरक्लास” कहा है। उन्होंने बताया कि यह पौधा कई सालों तक सिर्फ पत्तियों जैसा छोटा रूप बनाकर रहता है, कभी‑कभी 20‑30 साल तक बिना फूल खिलाए। फिर एक दिन यह अचानक करीब दो मीटर तक ऊँचा हो जाता है, एक बार फूल देता है, अपने बीज छोड़ता है और फिर मर जाता है। विज्ञान में इस प्रक्रिया को मोनोकार्पी कहा जाता है। महिंद्रा ने यह भी कहा कि स्कूलों की किताबों में दुनिया भर के पौधों का ज़िक्र होता है, लेकिन अपनी स्थानीय जैविक धरोहरों को अक्सर नहीं पढ़ाया जाता। इस अनोखे पौधे की वजह से लोगों ने जंगलों की विविधता और धैर्य के बारे में फिर से सोचना शुरू कर दिया है।
लोगों ने क्या कहा?
लोग उनकी पोस्ट पढ़कर हैरान भी हैं और उत्सुक भी। कई लोग इसकी जानकारी भी शेयर कर रहे हैं। जैसे एक यूजर ने लिखा कि इस पौधे को ‘हिम चमेली’ भी कहते हैं और इसे पाचन, सूजन, लीवर और दर्द में लाभदायक माना जाता है। कई लोगों ने इसकी तुलना उत्तराखंड में पाए जाने वाले ब्रह्मकमल से भी की है, क्योंकि वह भी ऊँची पहाड़ियों में उगता है और रूप‑रंग में कुछ हद तक मिलता‑जुलता लगता है।
ऐसे करें ‘ग्लासहाउस प्लांट’ की पहचान

स्थानीय भाषा में ‘चुका’ कहलाने वाला यह पौधा अपने पारदर्शी पत्तों की वजह से ‘ग्लासहाउस प्लांट’ के नाम से जाना जाता है। इसके ऊपर के पत्ते जैसे छोटे‑छोटे परतें बनाते हैं, जो सूरज की रोशनी तो अंदर आने देती हैं, लेकिन खतरनाक अल्ट्रावॉयलेट किरणों और तेज़ ठंडी हवा को रोके रखते हैं, जिससे पौधे के अंदर एक छोटा‑सा ग्रीनहाउस जैसा माहौल बन जाता है। इससे हिमालय की ऊँची‑ठंडी जलवायु में भी यह पौधा सुरक्षित रह पाता है और उसकी नाज़ुक फूलों वाली संरचना को नुकसान नहीं होता है। इसी वजह से यह कठिन पहाड़ी मौसम में भी दूर से चमकता हुआ दिखाई देता है।
हिमालय का चमकता जीव सिक्किम सुंदरी
वनस्पति विशेषज्ञों के अनुसार, सिक्किम सुंदरी के पारदर्शी, भूरे‑सुनहरे रंग की पत्तियाँ और गुलाबी किनारे इसे पहाड़ों के बीच एक चमकते दीपक की तरह दिखाते हैं। ये पत्तियाँ सूरज की रोशनी को अंदर आने देती हैं और कठोर ठंडी हवाओं से पौधे के नाजुक फूलों की रक्षा करती हैं, जिससे यह कठिन मौसम में भी जीवित रह पाता है। स्थानीय समुदाय इसके तनों का सेवन करता है और जड़ों का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में दर्द, सूजन और पाचन जैसी समस्याओं के इलाज में करता है।
