drushtaa , dada dadi ki kahani
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Dada dadi ki kahani : एक जंगल में एक शेर रहता था। वह बूढ़ा हो गया था। इसीलिए उसको जानवरों का शिकार करने में परेशानी होती थी। उसने सोचा कि क्यों न चालाकी से जानवरों को यहाँ बुलाकर पकड़ लिया जाए।

उसने सब जानवरों को बुलाया और बोला, ‘भाइयो, अब मैं बूढ़ा हो गया हूँ। मैंने हमेशा आप लोगों का शिकार किया। अब मैं चाहता हूँ कि मैं सादा जीवन जीऊँ। मैंने तय किया है कि अब मैं जानवरों को नहीं मारूँगा और शाकाहारी हो जाऊँगा।’

सब जानवर बहुत खुश हो गए।

शेर ने कहा, ‘लेकिन आप लोगों को मेरी मदद करनी होगी।’

‘हम तैयार हैं।’ सब बोले।

शेर ने आगे कहा, ‘देखिए मैं कमज़ोर हो गया हूँ, इसलिए खाना पकाना मेरे लिए मुश्किल है। मैं चाहता हूँ कि आपमें से कोई एक हर रोज़ मेरे लिए खाना पकाकर ले आए। इस तरह मुझे आप जानवरों को मारना नहीं पड़ेगा और मेरा पेट भी भरता रहेगा।’

जानवर तैयार हो गए।

उस दिन के बाद हर रोज़ एक जानवर खाना लेकर शेर की गुफ़ा . में जाता था। शेर खाना लानेवाले जानवरों को पकड़ लेता था और मारकर खा जाता था। इस तरह वह दुष्ट शेर अपना पेट भर लेता था। वह भी बिना मेहनत किए हुए।

काफी दिनों तक ऐसा ही चलता रहा। जंगल में जानवर कम होने लगे। तब एक लोमड़ी को लगा कि कुछ गड़बड़ है। उसने बाकी के जानवरों से कहा, ‘आज खाना लेकर मैं जाऊँगी।’

लोमड़ी शेर की गुफा के बाहर पहुँची। उसने शेर को आवाज़ लगाकर कहा, ‘खाना लाई हूँ।’ शेर ने कहा, ‘अंदर आ जाओ। मैं बहुत भूखा हूँ।’

लोमड़ी ने कहा, ‘मैं खाना बाहर रखकर जा रही हूँ। भूखे हो तो बाहर आकर ले लो। मैं तुम्हारी चालाकी समझ गई हूँ। तुम जानवरों को चालाकी से पकड़ लेते हो।’

शेर को आश्चर्य हुआ कि लोमड़ी को यह बात कैसे पता चली। उसने पूछा-‘ऐसा तुम क्यों कह रही हो? तब लोमड़ी ने दूर से कहा-‘तुम्हारी गुफा के अंदर की ओर जाते हुए पैरों के बहुत से निशान हैं, लेकिन बाहर की ओर आते हुए एक भी निशान नहीं है। इसका मतलब है कि जो जानवर एक बार अंदर जाता है, वह कभी बाहर नहीं आता।’

यह कहकर लोमड़ी भागकर जंगल के अंदर चली गई। उसने बाकी के जानवरों को शेर की दुष्टता के बारे में बताया।

उस दिन के बाद कभी कोई जानवर शेर की गुफा के आस-पास नहीं गया।

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