बीरबल ने उसे इंसाफ दिलाने का भरोसा दिलाया और कुछ दिन बाद आने को कहा।

इसी दौरान, बीरबल ने व्यापारी के दोस्त को बुलाकर पूछा, “क्या तुमने अपने व्यापारी दोस्त से एक हजार रुपए उधार लिए थे” उसने कहा, “नहीं श्रीमान उसके पास इसका क्या सबूत है?”

बीरबल ने उससे और कुछ नहीं पूछा और वापिस जाने को कह दिया। अगले दिन बीरबल ने व्यापारी और उसके दोस्त को बुलाया। उसने दोनों को घी का एक-एक कनस्तर दे कर कहा, “कृपया, मेरे लिए इस घी को बेच आओ।” वे दोनों कनस्तर लेकर चले गए। व्यापारी का दोस्त नहीं जानता था कि बीरबल ने उसकी ईमानदारी की परख के लिए, उसके टिन में सोने का एक सिक्का डाल दिया था।

घी बेचने के बाद वे दोनों माल के पैसे देने बीरबल के पास आए। बीरबल ने दोस्त से पूछा, “तुम्हें टिन में से सिक्का मिला?” उसने तुरंत कहा, “मुझे तो कोई सिक्का नहीं मिला।”

बीरबल ने चुपचाप उसके घर पर सैनिक भेज कर उसका बेटा बुलवा लिया। बीरबल ने बच्चे से बात की तो, उसे मासूम और सच्चा पाया। बातों ही बातों में बच्चे ने यह भी बता दिया कि उसके पिता को कनस्तर में से सोने का सिक्का मिला था, जब बच्चे ने अपने पिता को व्यापारी के पास खड़े देखा तो बोला- “पिता जी, आपने चाचा जी से जो रुपए उधार लिए थे, वे लौटा दिए?”

अब उसका पिता झूठ नहीं बोल सका। वह शर्मिंदा होकर बीरबल से माफी माँगने लगा। बीरबल ने बच्चे के पिता को हुक्म दिया कि वह व्यापारी का रुपया वापिस कर दे, इसके साथ उसने बच्चे को उसकी ईमानदारी और सच्चाई के लिए ईनाम भी दिया। वहाँ मौजूद लोगों ने बीरबल के इंसाफ और अक्लमंदी की प्रशंसा की।