Hindi Poem: स्मृतियों की गुल्लक से कुछ ,इतवारी दोपहर चुरानी है।जो जी हमने हर ऋतु में दोपहरें,उनसे परिचय कराना बाकी है। स्मृतियों की गुल्लक से रिक्त हृदय के,वो श्रंगार आज भी बाकी हैं,न थे जिसमें ईर्ष्या और द्वेष भरे,बस प्रेम के वो गुलाब आज भी साथी हैं। स्मृतियों की गुल्लक से वो प्यास,फिर से उस बचपन जीने की […]
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नारी गाथा से कैसे बनी विजय गाथा-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: समझौताहर बार हर वक्तसमझौते से गुजरीहैं ये जिंदगी। समर्पणक़दम क़दम पर हरइच्छाएं, आकांक्षाएंसमर्पण करते आएहम खुद को। त्यागसदैव अपनी प्यारीसे प्यारी हर करीबीवस्तु त्यागते आए। करूणाहमेंशा दया भावकरूणा से सबकीसेवा करते आए। नजर अंदाजअपनी हर हक कीचीजों में नजरअंदाज होते आए। पीड़ाएंरो-रोकर सिसक-सिसक कर,सुख काकहीं खो जाना भीगीपलकों में सारी आशाओंका बह जाना।हर […]
नव वर्ष तेरा स्वागत हो—गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: खुशियां ही खुशियां सबके जीवन में हो बस यही मेरी चाहत हो, नव वर्ष तुम्हारा स्वागत हो। फूल, कलियां ,नदी, झरना, पर्वत पंछी झूम झूम यही गावत हो, नव वर्ष तुम्हारा स्वागत हो। नया साल नई पहल कठिन जीवन हो सरल सबके दिलों में राहत हो, नव वर्ष तुम्हारा स्वागत हो। नव उमंग […]
पिया का घर -गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: छोड़ बाबुल का घर, जब मैं पिया के घर आई,नये लोगों के बीच थोड़ा सहमी और संकुचाई;सुना था जैसा मैंने, उससे हटकर सबको पाई,मेरे ससुराल वालों ने मुझसे ऐसी प्रीत निभाई। जीवनसाथी के रूप में एक सच्चा साथी पाई,खुशियों पर मेरी जिसने, अपनी खुशियां लुटाई;स्नेह मिला इतना, कि कभी लगा नहीं मैं पराई,छोड़ बाबुल का घर, जब मैं पिया के घर आई। सास-ससुर […]
नव वर्ष तेरा स्वागत हो—गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: नव वर्ष तेरा स्वागत हो…खुशियां ही खुशियां सबके जीवन में हो बस यही मेरी चाहत हो,नव वर्ष तुम्हारा स्वागत हो।फूल, कलियां ,नदी, झरना, पर्वत पंछी झूम झूम यही गावत हो,नव वर्ष तुम्हारा स्वागत हो।नया साल नई पहल कठिन जीवन हो सरल सबके दिलों में राहत हो,नव वर्ष तुम्हारा स्वागत हो।नव उमंग से भरी […]
उम्र, इच्छा और पैसे की कहानी-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: जब छोटे थे, जेब में सिक्के भी नहीं थे,पर सपनों के झोले में बादल भरे कहीं थे। सोचा था, बड़े होकर सब पा लेंगे,पैसे भी होंगे, ठाट से जी लेंगे। जवानी आई — उमंगों की थी बरसात,जेब में तूफ़ान नहीं, बस खाली हालात। जॉब मिली तो तनख्वाह ने मज़ाक किया,मन बोला “शाबाश”, जेब […]
त्यौहारों पर मां याद आती है-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: हर बेटी के भीतरएक अनसुनी धड़कन होती है —माँ की।जो समय के हर पड़ाव परधीरे से याद दिलाती है कि“तू अकेली नहीं, मैं तेरे भीतर हूँ।” माँ बहुत याद आती है —क्योंकि जीवन के हर रंग, हर विधि,उसी से तो सीखी थी।खाना बनाना, तुलसी को जल चढ़ाना,दीपक का रुख किस दिशा में हो —सब उसकी ही सिखाई हुई लकीरें हैं,जो आज […]
निशब्द-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: क्यूं ना हो जाओ तुम ‘निशब्द ‘जब भावनाओं का ज्वार फटने लगे,और मन पर ना रहे काबू ,तब ओढ़ लेना तुम मौन की चादर को ,और हो जाना ‘ निशब्द’ ।जब खुशियां दे दरवाजे पर दस्तक,तो उनका भी करना तुम स्वागत ,मुस्कुराकरऔर समेट लेना उन्हें भी ‘निशब्द ‘होकर।जब दिल टूटे ,और मन कहना चाहे, कुछ चीख-चीखकर […]
सुनो—गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: ये जो तुम शहद में डूबे हुए शब्दों सेप्रेम परोसते हो, नये तुम पुरुष ही कर सकते होऔर शायद इसीलिएनही समझ पाते स्त्री का प्रेम स्त्री के लिए तो प्रेमएक एहसास है जिसे वह जीती हैहृदय की धड़कन सेसाँसो की सरगम तक ! इस बार आनातो इंतजार व मिलन केसपनों केअनगिनत बिम्ब उकेरे हुएमेरी […]
औरत की दिनचर्या-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: औरत करती कितने काम, बात भले ये लगती आम, तनिक नहीं मिलता आराम, काम चले बस सुबहो शाम,*दिनचर्या*की कर लो बात, सम है उसके तो दिन रात,पाँच बजे से पहले जाग, पूरा दिन फिर भागमभाग । सबसे पहले करें स्नान, फिर देवों का हो सम्मान,बना पिलाती सबको चाय, वो ही सबकी नींद भगाय,फिर तो कामों […]
