Posted inकविता-शायरी

नारी के सवाल अनाड़ी के जवाब

अनाड़ी जी, जो लोग जीवन में प्रेम का महत्व नहीं समझते, उनसे आप क्या कहेंगे?संगीता शर्मा, गाजियाबाद जो प्रेम नहीं करता,जीवन से पलायन है,ये प्रेम और क्या,जीवन का ही गायन है।सांसें नहीं ज़रूरीजो हमको रखें जि़ंदा,जीवन की धमनियों मेंवह प्रेम-रसायन है। अनाड़ी जी, आपकी नज़र में कौन ज़्यादा महान है, एक घरेलू महिला या सफलता […]

Posted inकविता-शायरी

ये वो बदनाम गलियां हैं जहां बिस्तर तो नसीब होता है लेकिन नींद नहीं..

    ये वो बदनाम गलियां हैं  जहाँ किस्मत भी अपना रुख करने से पहले  सौ दफ़े दम तोड़ती है।    जहाँ सूरज रोज़ उगता तो है मगर  सिर्फ धूप लाकर छोड़ देता है,  पर कोई सुबह नहीं लाता।   यहाँ दिन में कई बार रात होती है  और रात भी वो, जिसमें बिस्तर तो […]

Posted inकविता-शायरी

नारी के सवाल अनाड़ी के जवाब

  अनाड़ी जी, शादी के बाद पुरुष तीन महिलाओं के बीच फंस जाता है- मां, पत्नी और बहन। कुछ समय बाद एक महिला और उसकी जिंदगी में आती है- बेटी। ऐसे चक्रव्यूह से वह कैसे बाहर निकल सकता है। क्या अपनी अपनी राय देंगे?भावना सारस्वत, उदयपुर कैसी भावनाहीन बात कर दी भावना!ऐसा प्रश्न पूछ करलगाओ […]

Posted inकविता-शायरी

औरत सब संभाल लेती है…

● वो “औरत” दौड़ कर रसोई तक ,दूध बिखरने से पहले बचा लेती है । ● समेटने के कामयाब मामूली लम्हों में,बिखरे “ख्वाबों” का गम भुला देती है । ● वक्त रहते रोटी जलने से बचा लेती है,कितनी “हसरतों” की राख उडा देती है । ● एक कप टूटने से पहले सम्हालती है ,टूटे “हौसलों” […]

Posted inकविता-शायरी

मेरे सपने

बाल कहानी नन्ही सी आंखों में मेरे, नन्हे नन्हे सेहैं सपनेकुछ औरों के लिए हैं लेकिन कुछनितांत ही मेरे अपने।सपने देखे हैं, मैं बनकर मदर टेरेसाकुछ कर जाऊंमिटा गरीबी भुखमरी, मैं इस समाजके काम तो आऊंनन्हा सा एक सपना मेरा, कल्पनाचावला बन जाऊं।अंतरिक्ष में घूम-घूम कर, नित नयाइतिहास बनाऊंसपना है मेरी आंखों में, नारी का […]

Posted inकविता-शायरी

एक बेटी ने बताई अपनी कहानी इस कविता की जुबानी..

  कोख में आई जब मैं माँ के ..   कोख में आई जब मैं माँ के ..दादी ने दुआ दी पोते के लिए,बुआ ने मन्नत मांगी भतीजे के लिए पापा ने कहा मेरा लाल आ रहा हैं,मेरे वंश का चिराग आ रहा हैं …… तब माँ ने मुझसे हौले से कहाडर मत मेरी रानी […]

Posted inकविता-शायरी

हास्य और व्यंग से भरपूर है ये कविता, जरूर पढ़ें

  इधर भी गधे हैं, उधर भी गधे हैं   इधर भी गधे हैं, उधर भी गधे हैंजिधर देखता हूं, गधे ही गधे हैं गधे हँस रहे, आदमी रो रहा हैहिन्दोस्तां में ये क्या हो रहा है जवानी का आलम गधों के लिये हैये रसिया, ये बालम गधों के लिये है ये दिल्ली, ये पालम […]

Posted inकविता-शायरी

शहीद जवान के बच्चे की ये कविता पढ़कर आपके भी छलक पड़ेंगे आंसू

  ओढ़ के तिरंगे को क्यूँ पापा आये हैं?_________   ओढ़ के तिरंगे को क्यूँ पापा आये हैं? माँ मेरा मन बात ये समझ ना पाये है, ओढ़ के तिरंगे को क्यूँ पापा आये हैं? पहले पापा मुन्ना मुन्ना कहते आते थे, टॉफियाँ खिलोने साथ में भी लाते थे। गोदी में उठा के खूब खिलखिलाते […]

Posted inकविता-शायरी

तेजाब खोखला नहीं कर पाया मेरे हौसलों को

लड़कियों के चेहरे पर तेजाब डालने वालों के लिए ये कविता एक करारा जवाब है।जो लोग ऐसी कुत्सित मानसिकता रखते हैं ,उन्हें ये पता होना चाहिए कि वो किसी की बाहरी सुंदरता को नुकसान पहुंचा सकते हैं लेकिन आंतरिक सुंदरता को नहीं ।

Posted inकविता-शायरी

काश! कि एक गृहणी की भी सरकार ने तनख्वाह तय की होती..

    (एक अनुत्तरित सवाल) काश! कि एक गृहणी की भी सरकार ने तनख्वाह तय की होती.._________________   तुम दिन भर करती क्या हो …?हाँ , मैं सचमुच दिन भर करती भी क्या हूँ?मैं एक सामान्य सी गृहणी सुबह से शाम तक जो बिना किसी शुल्क के बनाये रखती है संतुलन सारे परिवार का मैं भला […]

Gift this article