Hindi Poem: क्यूं ना हो जाओ तुम ‘निशब्द ‘जब भावनाओं का ज्वार फटने लगे,और मन पर ना रहे काबू ,तब ओढ़ लेना तुम मौन की चादर को ,और हो जाना ‘ निशब्द’ ।जब खुशियां दे दरवाजे पर दस्तक,तो उनका भी करना तुम स्वागत ,मुस्कुराकरऔर समेट लेना उन्हें भी ‘निशब्द ‘होकर।जब दिल टूटे ,और मन कहना चाहे, कुछ चीख-चीखकर […]
