लगभग एक महीने से वह बिस्तर पर पड़ी थी। कमर दर्द के कारण डॉक्टर ने उसे एक महीना और 15 दिन बेड रेस्ट के लिए कहा था। शरीर बेशक स्थिर पड़ा था पर मन उतना ही अस्थिर। जाने यादें उसे कहाँ-कहाँ ले जाती। दवाई के कारण बीच-बीच में नींद आ जाती तो वह समझ भी […]
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यह जगह ख्वातीन के लिए नहीं-21 श्रेष्ठ नारीमन की कहानियां
तीन घंटे, पिछले तीन घंटे अपने पति कंवल और दो बच्चों के साथ फ्रेंकफर्ड हवाई अड्डे पर अपनी सहेली सुक्खी की प्रतीक्षा करते हुए निकल गए, उक्ता गयी मैं, यहाँ आने की जितनी उत्सुकता थी, धीरे-धीरे ठंडी पड़ने लगी। कमाल कर दिया इस सुक्खी ने भी! क्या उसे उनका आना भूल गया? भूल कैसे सकती […]
सितारों भरी ओढ़नी-21 श्रेष्ठ नारीमन की कहानियां
नई दुल्हन ने अपने पति के साथ घर की दहलीज़ पर जैसे ही पांव रखा तो एक उल्लास भरा स्वर कानों में पड़ा, “ऐसे नहीं चलेगा भैया, पहले मेरा नेग, फिर भाभी को घर में लाना।” “ऐसी भी क्या व्यग्रता है अंजू, थोड़ी देर उधार ही सही, पहले हमें अंदर तो आने दे” प्रकाश ने […]
अपरिचित गंध-21 श्रेष्ठ नारीमन की कहानियां
वह सुन्न निष्क्रिय खड़ी रही। नीला लिफाफा हाथों में पकड़ होने पर भी हवा में फड़फड़ा रहा था। उसे लगा होस्टल की सीढ़ियां चढ़ते-चढ़ते वह भी पत्ते की मानिन्द फड़फड़ा रही है। एक अर्से के बाद यह उसे क्या सूझी? गेट से लेकर अपने कमरे तक पहुंचते-पहुंचते वह एक ही तरह के वाक्य का कोटि […]
डोन्ट बी सिली-21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां चंडीगढ़
दोनों ही पति-पत्नी बेटे के कैरियर को लेकर बहुत महत्त्वाकांक्षी थे। अभी कुल पाँच साल का ही हुआ था उनका बेटा। शिखर नाम भी उसका उन्होंने रखा था। शिखर के घर में उसे कम्प्यूटर सिखाने के लिए एक शिक्षक आता था तो व्यक्तित्व विकास का प्रशिक्षण देने के लिए दूसरे शहर के नामी स्कूल में […]
लड्डू की हार- 21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां चंडीगढ़
जंगल में तालाब के किनारे गंगू कछुए का घर था। वह सालों से अपने परिवार के साथ वहाँ रहता था। उनके घर में एक छोटा बच्चा था। जिसका नाम था लड्ड। गंगू अपनी जवानी की कहानी लड्डू को सुनाता था कि कैसे उसने अपने मित्र नटखट खरगोश को दौड़ में हराया था। गंगू को अपनी […]
अप्रैल फूल-21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां चंडीगढ़
सोनू, शीना और रमा तीन बहनें थीं। सबसे छोटी सोनू स्वभाव से ही बड़ी मस्त और सबको हंसते-हंसाते रहने वाली लड़की थी। उसे बचपन से ही सबको अप्रैल फूल बनाने में बड़ा मज़ा आता था। वह ऐसी कोई ना कोई युक्ति सोच ही लेती थी जिससे किसी को संदेह भी नहीं होता था। सबसे बड़ी […]
वो छाता-21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां चंडीगढ़
आज भी संभाल कर रखा है मैंने, अलग अलग रंगों से सजा, सावन के महीनों की यादें संजोए…. वो मेरा प्यारा।।।। काले, भूरे और थोड़े से अधपक्के पीले रंग का……वो छाता शिमला से लिया था मैंने, जब गर्मी की छुट्टियों में गया था घूमने, अपनी नानी के घर। उम्र तब कुछ दस साल की थी […]
फादर्स डे विशेष- लघु कहानी
गृहलक्ष्मी की लघु कहानी-पिताः एक रिश्ता विश्वास भरा ‘सुनो, गुड़िया आजकल बहुत खोई सी रहती है. क्या बात है?’‘मुझे भला वह कुछ बताती है? अपनी हर बात वह आप ही से शेयर करती है. कुछ खरीदना होगा तो आप से ही कहेगी। आपकी लाडली है, आप ही पूछिएगा.’‘लेकिन कुछ प्यार वगैरह का चक्र हुआ तो? […]
पश्चाताप- 21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां चंडीगढ़
“सुनो अमित, मुझे कुछ पैसों की ज़रूरत है। तुम्हारे पास हैं क्या? प्लीज़, अभी कुछ दिन बाद मुझे मम्मी पॉकेट मनी देंगी तब लौटा दूंगा।” रोहन ने अनजान बनते हुए कुछ झिझकते हुए अमित से कहा। “हाँ हाँ, क्यों नहीं? कैसी बातें करते हो रोहन? तुम्हें प्लीज़ कहने की कोई आवश्यकता नहीं। कुछ पैसे हैं […]
